कच्चा तेल $80 के नीचे फिसला, US-Iran डील की खबरों से आई नरमी; अमेरिका का रणनीतिक तेल भंडार 40 सालों के Low पर

Brent Crude Oil Price: मंगलवार की शाम एक बार के लिए ब्रेंट क्रूड का भाव 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया था. हालांकि, इस माहौल के बीच एक नया जोखिम भी उभरकर सामने आया है. अमेरिका का रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve - SPR) चार दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भविष्य में किसी नई सप्लाई बाधा की स्थिति में चिंता बढ़ सकती है.
कच्चा तेल $80 के नीचे फिसला, US-Iran डील की खबरों से आई नरमी; अमेरिका का रणनीतिक तेल भंडार 40 सालों के Low पर

Brent Crude की कीमतों में आज भी तेज गिरावट. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Brent Crude Oil Price: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबरों और टाइमिंग की अटकलों ने वैश्विक बाजारों में राहत की लहर पैदा कर दी है. इसके चलते कच्चे तेल में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिल रही है. मंगलवार की शाम एक बार के लिए ब्रेंट क्रूड का भाव 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया था.

कच्चे तेल की कीमतों से दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में खरीदारी बढ़ी है. हालांकि, इस माहौल के बीच एक नया जोखिम भी उभरकर सामने आया है. अमेरिका का रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve - SPR) चार दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे भविष्य में किसी नई सप्लाई बाधा की स्थिति में चिंता बढ़ सकती है.

तेल की कीमतों में लगातार गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष खत्म होने की उम्मीद के चलते निवेशकों ने सप्लाई बाधित होने की आशंकाओं को कम आंकना शुरू कर दिया है. ब्रेंट क्रूड लगभग 4% गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 78 डॉलर प्रति बैरल के करीब फिसल गया. कुछ सप्ताह पहले यही कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई थीं.

तेल बाजार की नजर खासतौर पर हॉर्मुज स्ट्रेट पर है. दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी रूट्स में शामिल यह जलमार्ग फिर से पूरी तरह खुलने की उम्मीद है. यदि ऐसा होता है तो एशिया समेत कई देशों को तेल सप्लाई सामान्य होने में मदद मिलेगी.

हालांकि एनालिस्ट्स का मानना है कि समझौते के बावजूद सप्लाई चेन को पूरी तरह सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं.

ग्लोबल शेयर बाजारों में तेजी

तेल में नरमी और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद से वैश्विक शेयर बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली. अमेरिकी बाजारों में शुरुआती कारोबार से पहले S&P 500 (+0.1%) और Dow Jones (+0.1%) फ्यूचर्स बढ़त में रहे, जबकि Nasdaq फ्यूचर्स (+0.3%) में भी मजबूती दिखी.

एशियाई बाजारों में जापान का Nikkei पहली बार 70,000 (+0.1%) के स्तर के करीब पहुंच गया. दक्षिण कोरिया का Kospi इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई (+2.1%) पर कारोबार करता दिखा. भारत का Sensex (+0.7%) भी मजबूती के साथ बंद हुआ.

किन सेक्टर्स में दिखी सबसे ज्यादा हलचल?

तेल कीमतों में गिरावट का असर सेक्टर-वार भी साफ नजर आया. एयरलाइन और ट्रैवल कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी क्योंकि कम ईंधन लागत से उनकी कमाई बेहतर हो सकती है. दूसरी ओर ऊर्जा कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रहा.

वॉल स्ट्रीट पर टेक सेक्टर में भी मजबूती देखने को मिली. चिप कंपनियों में पिछले कुछ हफ्तों की अस्थिरता के बाद रिकवरी जारी रही. SpaceX के शेयर लगातार तीसरे दिन बढ़त में रहे. कंपनी ने 60 अरब डॉलर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप Cursor के अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की घोषणा की है. इससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा है.

लेकिन अमेरिका के लिए नई चिंता

जहां एक ओर तेल कीमतों में गिरावट राहत दे रही है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के रणनीतिक तेल भंडार में तेज गिरावट चिंता का विषय बन गई है. ताजा आंकड़ों के अनुसार अमेरिका का Strategic Petroleum Reserve घटकर 340.3 मिलियन बैरल रह गया है. यह 1983 के बाद का सबसे निचला स्तर है.

ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक करीब 7.5 करोड़ बैरल तेल इस रिजर्व से निकाला जा चुका है. केवल पिछले सप्ताह ही 89 लाख बैरल तेल जारी किया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए इस समस्या से टैकल करना भी बहुत जरूरी होगा.

अमेरिका के रणनीतिक तेल भंडार की स्थिति

आंकड़ास्थिति
वर्तमान भंडार340.3 मिलियन बैरल
1983 के बाद सबसे निचला स्तरहां
युद्ध शुरू होने के बाद कमी75 मिलियन बैरल
कुल क्षमता के मुकाबले50% से कम

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में मैक्सिको की खाड़ी में कोई बड़ा तूफान आता है या फिर कोई नई सप्लाई बाधा पैदा होती है तो अमेरिका के पास पहले जैसी सुरक्षा नहीं बचेगी.

आगे बाजार की नजर किन बातों पर?

अमेरिका-ईरान समझौते की शर्तें अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुई हैं. कुछ मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं. ईरान ने समझौते के लिए कुछ अतिरिक्त शर्तें रखी हैं, जिन पर सहमति बनना बाकी है.

अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहने की उम्मीद है. इसी दौरान निवेशक यह भी देखेंगे कि हॉर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुलता है या नहीं और तेल सप्लाई कितनी तेजी से सामान्य होती है.

फिलहाल बाजार राहत की सांस ले रहे हैं, लेकिन ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. इसलिए तेल, मुद्रास्फीति और वैश्विक बाजारों पर नजर बनाए रखना निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा.

(ANI से इनपुट के साथ)

Add Zee Business as a Preferred Source
  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6