दुनिया इस वक्त एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां से हर किसी की नजरें तेल की कीमतों पर टिकी हैं. मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने न सिर्फ वहां के माहौल को गर्म कर दिया है, बल्कि इसका सीधा असर आपके जेब और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है, जो अप्रैल 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि एक चेतावनी है कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन में भारी दिक्कतें आ रही हैं. चलिए समझते हैं कि आखिर हो क्या रहा है और यह सब आपकी दुनिया को कैसे बदल रहा है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट और सप्लाई पर असर
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मिडिल ईस्ट में मचे घमासान ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री पाइपलाइन, यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया है. दुनिया भर में रोज जितनी तेल की खपत होती है, उसका लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. शनिवार को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, तो तेहरान ने इस रास्ते से होकर जाने वाले सारे तेल टैंकरों को रोक दिया.
यह रुकावट इतनी बड़ी है कि फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से तेल की कीमतों में यह अब तक की सबसे तेज साप्ताहिक बढ़त है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि एनर्जी प्रोड्यूसिंग इलाकों में रिफाइनरीज और एलएनजी प्लांट को बंद करने तक की नौबत आ गई है.
कीमतों में तेजी का डरावना गणित
- ब्रेंट क्रूड के दाम में इस हफ्ते 20 फीसदी का उछाल आया है, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) तेल की कीमतें 25 फीसदी तक उछल गई हैं.
- शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 3 फीसदी चढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
- डब्ल्यूटीआई भी 5 फीसदी की छलांग के साथ 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया.
- कतर के ऊर्जा मंत्री ने तो और भी चौंकाने वाली बात कही है कि आने वाले हफ्तों में खाड़ी देश अपने निर्यात पूरी तरह बंद कर सकते हैं.
- अगर ऐसा होता है, तो तेल का दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकता है, जो दुनिया भर की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा.
ग्लोबल मार्केट पर पड़ रहा गहरा असर
- तेल की कीमतों में यह आग लगते ही दुनिया भर के शेयर बाजारों में हड़कंप मच गया है.
- यूरोप के बाजारों से लेकर अमेरिकी फ्यूचर्स तक, सब लाल निशान में फिसल रहे हैं.
- निवेशक अब यह सोचकर डरे हुए हैं कि अगर एनर्जी का खर्च ऐसे ही बढ़ता रहा, तो महंगाई का क्या होगा.
- अमेरिकी बाजार में डॉव, एसएंडपी 500 और नैस्डैक इंडेक्स सब गिरावट के साथ खुले.
- बाजार में इस डर का भी असर दिख रहा है कि क्या केंद्रीय बैंक अब ब्याज दरों में कटौती का अपना फैसला बदलेंगे.
टेक शेयरों और चिप्स पर भी बुरा साया
- सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि तकनीक की दुनिया के दिग्गज शेयर भी दबाव में हैं.
- एनवीडिया और एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेस जैसे एआई-चिप शेयरों में करीब 0.7 फीसदी की गिरावट देखी गई.
- अमेरिका अब एआई चिप्स के एक्सपोर्ट के लिए नए नियम बनाने पर विचार कर रहा है, जो निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं.
- बाजार के खिलाड़ी अब किसी बड़े आर्थिक धमाके के डर से अपने निवेश को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं.
- मार्च 6 को शाम 5:35 बजे तक अमेरिकी बाजार के फ्यूचर्स में बड़ी बिकवाली देखने को मिली.
काम की बात
तेल की कीमतों में यह तेज उछाल आने वाले समय में दुनिया भर के लिए एक बड़ी चुनौती बनने वाला है. जब तक मिडिल ईस्ट का तनाव खत्म नहीं होता, तब तक एनर्जी सप्लाई और बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा. हर किसी की नजर अब इस पर है कि आने वाले कुछ हफ्ते अर्थव्यवस्थाओं को किस दिशा में लेकर जाते हैं.