Editor's Take: युद्ध, तेल और टैरिफ की तिकड़ी से बाजार पर बढ़ा खतरा, समझें ट्रिगर्स

Editor's Take: युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि धीरे-धीरे आर्थिक मोर्चे पर भी फैलता नजर आ रहा है. यही वजह है कि तेल से लेकर शेयर बाजार और वैश्विक ग्रोथ तक, हर जगह दबाव बढ़ने की आशंका बन रही है.
Editor's Take: युद्ध, तेल और टैरिफ की तिकड़ी से बाजार पर बढ़ा खतरा, समझें ट्रिगर्स

बाजार में गिरावट के कई ट्रिगर्स

Editor's Take: वैश्विक स्तर पर हालात तेजी से बदल रहे हैं और इसका असर सीधे बाजारों पर दिखाई देने लगा है. ईरान-इजरायल युद्ध अब 13वें दिन में पहुंच चुका है और हालात शांत होने के बजाय और जटिल होते दिख रहे हैं. हॉर्मुज स्ट्रेट पर हमले, तेल की सप्लाई को लेकर धमकियां, अमेरिका-चीन-भारत जैसे देशों के खिलाफ टैरिफ जांच और बाजारों के तकनीकी संकेत, ये सभी मिलकर एक ऐसा माहौल बना रहे हैं जहां निवेशकों के लिए जोखिम लगातार बढ़ रहा है.

युद्ध अब सिर्फ सैन्य टकराव तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि धीरे-धीरे आर्थिक मोर्चे पर भी फैलता नजर आ रहा है. यही वजह है कि तेल से लेकर शेयर बाजार और वैश्विक ग्रोथ तक, हर जगह दबाव बढ़ने की आशंका बन रही है.

युद्ध पर क्या हैं बड़े अपडेट्स?

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युद्ध के मोर्चे पर हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण हैं. ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट में तीन तेल टैंकरों पर हमला किया है. भारत आ रहे थाइलैंड के एक जहाज पर भी हमला होने की खबर सामने आई है.

ईरान के राष्ट्रपति ने युद्ध खत्म करने के लिए साफ शर्त रखी है. उनका कहना है कि युद्ध से हुए नुकसान का हरजाना दिया जाए और भविष्य में हमला न होने की पक्की इंटरनेशनल गारंटी दी जाए.

इसके साथ ही ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिका और इजरायल के बैंक ठिकानों पर हमले की धमकी भी दी है. इस चेतावनी के बाद कतर और दुबई में कई बैंकों ने एहतियातन अपने ऑफिस बंद कर दिए.

इजरायल के रक्षा मंत्री ने साफ कहा है कि जब तक जीत हासिल नहीं हो जाती तब तक हमले जारी रहेंगे. वहीं डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अगर वे चाहें तो युद्ध तुरंत खत्म हो सकता है. ट्रंप ने यहां तक कहा कि ईरान में अब नष्ट करने के लिए कुछ बचा ही नहीं है.

तेल से फिर बिगड़ेगा बाजार का खेल

इस पूरे युद्ध का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल पर दिखाई दे रहा है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने अपने रिजर्व से 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का ऐलान किया है. यह अब तक का सबसे बड़ा तेल रिलीज माना जा रहा है.

इसके बावजूद बाजार में तेल की कीमतें गिरने के बजाय और उछल गईं. ब्रेंट क्रूड करीब 12% उछलकर 98 डॉलर के पास पहुंच गया.

इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान की चेतावनी है. ईरान ने साफ कहा है कि अगर हमले नहीं रुके तो कच्चा तेल 200 डॉलर तक जा सकता है. साथ ही यह भी कहा गया है कि हॉर्मुज स्ट्रेट से एक लीटर तेल भी गुजरने नहीं दिया जाएगा.

दुनिया के बड़े हिस्से की तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. इसलिए यह बयान वैश्विक बाजारों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है.

युद्ध से बाजार के लिए खतरे और बढ़े

युद्ध अब 13वें दिन में पहुंच चुका है. भले ही हमलों की तीव्रता थोड़ी कम दिखे, लेकिन जोखिम पहले से ज्यादा बढ़ गया है.

संकेत साफ हैं कि ईरान युद्ध को लंबा खींचने के मूड में है. अमेरिका भी चाहकर इसे तुरंत खत्म नहीं कर पा रहा.

ईरान ने अब हॉर्मुज स्ट्रेट को युद्ध का केंद्र बना दिया है. कच्चे तेल के दम पर पूरी दुनिया को दबाव में लाने की रणनीति अपनाई जा रही है.

साथ ही गल्फ देशों में अमेरिकी बैंकों को निशाना बनाने की बात भी सामने आई है. इसका मतलब साफ है कि ईरान अब इसे सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि ‘Economic War’ में बदलने की तैयारी में है.

क्रूड के 200 डॉलर तक जाने की धमकी भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है. अगर ऐसा होता है तो बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है.

तेल कंपनियों की लागत बढ़ेगी. एविएशन सेक्टर के लिए मुश्किलें और बढ़ेंगी क्योंकि फ्यूल कॉस्ट बढ़ेगी. होटल और ट्रैवल सेक्टर पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है.

इतना ही नहीं, अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो इस तिमाही की GDP ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है और स्लोडाउन का खतरा बढ़ सकता है.

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टैरिफ पर ट्रंप की नई चाल

इसी बीच टैरिफ के मोर्चे पर भी अमेरिका की नई रणनीति सामने आई है. भारत और चीन समेत 16 देशों के खिलाफ सेक्शन 301 के तहत ट्रेड जांच शुरू करने का ऐलान किया गया है.

टैरिफ पर कोर्ट की रोक के बाद ट्रंप प्रशासन ने यह नया रास्ता चुना है. सेक्शन 301 के तहत अमेरिका यह जांच कर सकता है कि कोई विदेशी देश अमेरिकी व्यापार पर अनुचित प्रतिबंध तो नहीं लगा रहा.

इस जांच की प्रक्रिया 17 मार्च से शुरू होकर 15 अप्रैल तक चलेगी. इसके बाद अमेरिका टैरिफ बढ़ाने के साथ-साथ इंपोर्ट पर बैन लगाने जैसे कदम भी उठा सकता है.

दरअसल इसे ट्रंप का टैरिफ बढ़ाने का एक इनडायरेक्ट तरीका माना जा रहा है.

बाजार के संकेत क्या बता रहे?

तकनीकी नजरिए से भी बाजार के संकेत मजबूत नहीं दिख रहे. निफ्टी, बैंक निफ्टी, मिडकैप सेलेक्ट और स्मॉलकैप, चारों इंडेक्स ने Lower High और Lower Low का पैटर्न बनाया है.

निफ्टी करीब 10 महीनों के निचले स्तर 23866 पर बंद हुआ. लगातार दूसरे दिन निफ्टी का इंट्राडे हाई 24300 के आसपास रहा, लेकिन दोनों दिन इसी स्तर से भारी बिकवाली देखने को मिली.

दरअसल 9 मार्च को निफ्टी ने 24300 का बड़ा सपोर्ट लेवल तोड़ा था. अब वही स्तर बाजार के लिए बड़ी रुकावट बन गया है.

बैंक निफ्टी भी दबाव में है. इंडेक्स करीब 5 महीनों के निचले स्तर 55735 पर बंद हुआ. 3 फरवरी को बने 61764 के लाइफ हाई से बैंक निफ्टी करीब 11% यानी लगभग 6100 अंक नीचे आ चुका है.

इन सभी संकेतों को देखते हुए साफ है कि फिलहाल बाजार के सामने सबसे बड़ा खतरा युद्ध, तेल और टैरिफ- तीनों मोर्चों से बना हुआ है. निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में सावधानी और रणनीति दोनों बेहद जरूरी रहने वाली हैं.

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