अक्षय तृतीया पर सोने के गहने खरीदें या डिजिटल गोल्ड? मोतीलाल ओसवाल के एक्सपर्ट ने समझा दिया पूरा गणित

क्या इस अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना फायदे का सौदा है? मोतीलाल ओसवाल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में सोना 10% तक बढ़ चुका है, लेकिन उतार-चढ़ाव अभी जारी रहेगा. जानिए एक्सपर्ट्स क्यों दे रहे हैं 'Buy on Dips' की सलाह और क्या हैं सोने में निवेश के नए तरीके.
अक्षय तृतीया पर सोने के गहने खरीदें या डिजिटल गोल्ड? मोतीलाल ओसवाल के एक्सपर्ट ने समझा दिया पूरा गणित

अक्षय तृतीया पर सोने के गहने खरीदें या डिजिटल गोल्ड?

भारत में त्योहारों और निवेश का पुराना नाता है. खासकर जब बात अक्षय तृतीया की हो, तो घर में सोने का आना शुभ माना जाता है. साल 2026 की शुरुआत से ही सोने ने अपनी रफ्तार दिखाई है और करीब 10% की बढ़त दर्ज की है.

लेकिन, क्या ये चमक बरकरार रहेगी? मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की ताजा रिपोर्ट कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब लेकर आई है. बाजार में जिस तरह की हलचल है, उसे देखकर हर निवेशक के मन में ये सवाल है कि इस वक्त पैसा सोने में लगाना चाहिए या थोड़ा इंतजार करना बेहतर है.

बाजार की चाल और सोने का नया रंग

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सोने की कीमतें फिलहाल एक टेढ़ी-मेढ़ी सड़क पर चल रही हैं. 2026 की पहली तिमाही में हमने देखा कि कीमतें कभी आसमान छूती हैं तो कभी अचानक नीचे आ जाती हैं. इसके पीछे कई बड़े कारण हैं.

दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर जारी खींचतान ने सोने को एक 'सेफ हेवन' यानी सुरक्षित ठिकाना बना दिया है. जब भी दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए सोने की तरफ भागते हैं.

रिपोर्ट की बड़ी बातें-

  • साल 2026 में अब तक सोने में 10% की तेजी देखी गई है.
  • डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने बीच-बीच में कीमतों पर दबाव बनाया है.
  • भारत में सोने की कीमतें ऊंची होने की वजह से फिलहाल ज्वेलरी की मांग थोड़ी कम है.
  • चीन में निवेश के मकसद से सोने की भारी खरीदारी हो रही है.

एक्सपर्ट्स की राय क्या है?

मोतीलाल ओसवाल के कमोडिटी रिसर्च हेड नवनीत दमानी का कहना है कि सोना फिलहाल एक जटिल वैश्विक माहौल से गुजर रहा है. भले ही करेंसी की मजबूती और ब्याज दरों की वजह से कुछ समय के लिए दबाव दिखे, लेकिन लंबे समय का नजरिया अभी भी पॉजिटिव है. उनके मुताबिक, भारतीय निवेशकों के लिए सोना हमेशा से वैल्यू बचाने का सबसे भरोसेमंद जरिया रहा है, खासकर तब जब बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव हो.

फैक्टरसोने पर असरवजह
जियोपॉलिटिकल टेंशनपॉजिटिव (तेजी)सुरक्षा के लिए निवेश बढ़ता है
मजबूत डॉलरनेगेटिव (मंदी)विदेशी खरीदारों के लिए सोना महंगा होता है
सेंट्रल बैंक बाइंगपॉजिटिव (सपोर्ट)रिजर्व के लिए सोने की भारी डिमांड
ऊंची कीमतेंनेगेटिव (डिमांड पर असर)घरेलू ज्वेलरी मार्केट में सुस्ती

बदल रहा है निवेश का तरीका

अब वो जमाना धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है जब लोग सिर्फ फिजिकल गोल्ड यानी सिक्कों या गहनों में ही निवेश करते थे. मोतीलाल ओसवाल के एक्सपर्ट मानव मोदी बताते हैं कि भारतीय निवेशकों के व्यवहार में एक बड़ा बदलाव आ रहा है. अक्षय तृतीया जैसे मौकों पर अब लोग ETF (Exchange Traded Funds) और सोने के अन्य डिजिटल रूपों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.

डिजिटल गोल्ड की तरफ झुकाव के कारण-

  • इसमें फिजिकल गोल्ड की तरह सुरक्षा या चोरी का डर नहीं होता.
  • लिक्विडिटी यानी जरूरत पड़ने पर इसे तुरंत कैश में बदला जा सकता है.
  • इसमें मेकिंग चार्ज जैसा कोई अतिरिक्त खर्च नहीं देना पड़ता.
  • पारदर्शिता के मामले में ये फिजिकल गोल्ड से काफी बेहतर है.

सेंट्रल बैंकों का भरोसा और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े

सोने की कीमतों को सहारा देने में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की बड़ी भूमिका है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 में सेंट्रल बैंकों ने लगभग 860 से 870 टन सोना खरीदा है. हालांकि यह पिछले कुछ सालों के मुकाबले थोड़ा कम है, लेकिन फिर भी यह एक बहुत बड़ी मात्रा है. यह साफ दिखाता है कि दुनिया भर की बड़ी संस्थाएं अभी भी सोने को अपने खजाने का अहम हिस्सा मानती हैं.

ग्लोबल मार्केट का हाल-

  • ग्लोबल गोल्ड ETF में अब धीरे-धीरे पैसा वापस आने लगा है.
  • साल 2026 की शुरुआत से ही ETF में निवेश का ट्रेंड सुधरा है.
  • महंगाई के खिलाफ हेजिंग के लिए सोना अभी भी पहली पसंद बना हुआ है.

क्या है 'Buy on Dips' की रणनीति?

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में सबसे खास बात 'Buy on Dips' की सलाह है. इसका मतलब है कि जब भी सोने की कीमत में कोई छोटी गिरावट आए, तो उसे खरीदारी के मौके के तौर पर देखना चाहिए. एक्सपर्ट्स का मानना है कि शॉर्ट टर्म में कीमतें एक दायरे में रह सकती हैं, लेकिन मीडियम से लॉन्ग टर्म यानी मध्यम से लंबी अवधि के लिए सोना आपको निराश नहीं करेगा.

निवेशकों के लिए जरूरी टिप्स-

  • बाजार की गिरावट को देखकर डरें नहीं, बल्कि उसे निवेश का मौका मानें.
  • अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा सोने में जरूर रखें ताकि रिस्क कम हो सके.
  • लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए सोना एक बेहतरीन संपत्ति है.
  • केवल एक साथ सारा पैसा न लगाएं, किस्तों में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.

काम की बात

अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह एक स्मार्ट वित्तीय फैसला भी है. मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट यह साफ करती है कि भले ही वैश्विक कारणों से बाजार में थोड़ी उथल-पुथल दिखे, लेकिन सोने की बुनियादी मजबूती बनी हुई है. जियोपॉलिटिकल रिस्क और ग्लोबल ग्रोथ में सुस्ती जैसे कारक कीमतों को सहारा देते रहेंगे. इसलिए, अगर आप एक लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो इस अक्षय तृतीया पर सोने में निवेश करना आपके भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 क्या अक्षय तृतीया 2026 पर सोना खरीदना सही रहेगा?

हां, एक्सपर्ट्स के मुताबिक लंबी अवधि के लिए सोना हमेशा एक अच्छा विकल्प है. गिरावट पर खरीदारी करना यानी 'Buy on Dips' की रणनीति सबसे बेस्ट है.

Q2 2026 में अब तक सोने ने कितना रिटर्न दिया है?

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमतों में करीब 10% की बढ़ोतरी हुई है.

Q3 क्या फिजिकल गोल्ड के मुकाबले ETF में निवेश करना बेहतर है?

आजकल निवेशक पारदर्शिता और लिक्विडिटी की वजह से ETF और डिजिटल गोल्ड को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज नहीं होता और सुरक्षा की चिंता भी नहीं रहती.

Q4 सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव की मुख्य वजह क्या है?

वैश्विक तनाव, अमेरिका में ब्याज दरों की स्थिति, डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बदलाव सोने की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं.

Q5 सेंट्रल बैंकों ने 2025 में कितना सोना खरीदा?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने 2025 में लगभग 860-870 टन सोना अपने रिजर्व में शामिल किया है.

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