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दिग्गज चिपमेकर TSMC का मार्केट कैप ताइवान की इकोनॉमी के मुकाबले डबल है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
Taiwan Stock Market: छोटे से देश ताइवान जिसकी अर्थव्यवस्था का आकार भारत के मुकाबले एक चौथाई है, लेकिन वहां के शेयर बाजार ने भारतीय शेयर बाजार को मार्केट कैप के लिहाज से पीछे छोड़ दिया है. ताइवान का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 4.95 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जबकि भारत का मार्केट कैप 4.92 ट्रिलियन डॉलर है.
ताइवान का स्टॉक मार्केट (TAIEX) अब दुनिया का पांचवां (5th) सबसे बड़ा शेयर बाजार बन गया है. अब ताइवान से आगे केवल अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग हैं. इकोनॉमी के साइज की बात करें तो IMF के मुताबिक, ताइवान की इकोनॉमी 977 अरब डॉलर है, जबकि भारत की इकोनॉमी 4.15 ट्रिलियन डॉलर है.
GDP vs Market Cap Analysis
| देश | मार्केट कैपिटलाइजेशन (USD) | भारतीय रुपए में (अनुमानित मूल्य) | ग्लोबल रैंकिंग | जीडीपी (GDP) |
| ताइवान | $4.95 Trillion | ₹415 लाख करोड़ | 5वां स्थान | $977 Billion |
| भारत | $4.92 Trillion | ₹412 लाख करोड़ | 6ठा स्थान | $4.15 Trillion |
ताइवान शेयर बाजार के इस आउटपरफॉर्मेंस का सबसे बड़ा कारण दुनिया की सबसे बड़ी चिपमेकर कंपनी TSMC (Taiwan Semiconductor Manufacturing Company) के शेयरों में आई भारी तेजी है. ताइवान के मुख्य स्टॉक इंडेक्स में अकेले TSMC की हिस्सेदारी 40% के करीब हो चुकी है. यह दिखाता है कि ताइवान का पूरा शेयर बाजार मुख्य रूप से केवल एक ही कंपनी की ग्रोथ पर बहुत ज्यादा निर्भर है.

TSMC के शेयर ने 2026 में अब तक 43% की तेजी दिखाई है जबकि एक साल में इस स्टॉक ने 133% का रिटर्न दिया है. इस सुपर रैली के कारण कंपनी का मार्केट कैप 59 लाख करोड़ रुपए के करीब पहुंच गया है. वहीं, ताइवान स्टॉक्स इंडेक्स TAIEX ने इस साल अब तक 52% का रिटर्न दिया है जबकि एक साल में इसने 110% का रिटर्न दिया है.
अप्रैल के महीने में TSMC ने 2026 की पहली तिमाही का रिजल्ट जारी किया था. कंपनी ने प्रेस नोट में बताया कि अमेरिकी डॉलर टर्म में Q1 रेवेन्यू 35.90 बिलियन डॉलर रहा और इसमें सालाना आधार पर 40.6% की तेजी दर्ज की गई जबकि तिमाही आधार पर यह ग्रोथ 6.4% था. इसमें कंपनी का नेट प्रॉफिट मार्जिन 50.5% था. मतलब करीब 18 बिलियन डॉलर का मुनाफा कंपनी ने कमाया है.

Q2 के लिए कंपनी ने 39-40.2 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू गाइडेंस जारी किया है और ग्रॉस प्रॉफिट मार्जिन 65.5%-67.5% के दायरे में रह सकता है. वहीं, ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 56.5%-58.5% के दायरे में रहने का गाइडेंस जारी किया गया है.
ताइवान शेयर बाजार का इंडेक्स नेम TAIEX है जिसे नवंबर 1970 में लॉन्च किया गया था. वर्तमान में इसमें कुल 1053 स्टॉक्स शामिल हैं. इस इंडेक्स में वेटेज की बात करें तो 78.65% योगदान केवल इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर का है जबकि 12.85% ट्रेडिशनल सेक्टर हैं और 8.5% फाइनेंस एंड इंश्योरेंस सेक्टर हैं. इस इंडेक्स में 101 लार्जकैप कंपनियां, 206 मिडकैप कंपनियां और 746 स्मॉलकैप कंपनियों को शामिल किया गया है. इंडेक्स में लार्जकैप का वेटेज 86.64%, मिडकैप का वेटेज 8.53% और स्मॉलकैप का वेटेज 4.83% है.

वेटेज के लिहाज से बात करें तो टॉप-5 स्टॉक्स की लिस्ट में TSMC, DELTA, HON HAI, MEDIATEK और ASEH आता है. इसमें से तीन सेमीकंडक्टर कंपनियां हैं. इंडेक्स में अकेले TSMC का योगदान करीब 40%-42%, DELTA का करीब 4%, MediaTek का 4-5 फीसदी और Hon Hai का 3-4 फीसदी आती है. कुल मिलाकर ताइवान के शेयर बाजार की जो चमक है वह पूरी तरह सेमीकंडक्टर थीम पर आधारित है और एकमात्र कंपनी TSMC इस रैली को दम दे रहा है.
अब आपको यह समझ में आ गया होगा कि पिछले कुछ समय से ताइवान के शेयर बाजार ने क्यों आउट परफॉर्मेंस दिखाया है. चिपमेकर TSMC ने बाजार में एकतरफा रैली को लीड किया है. दरअसल, TSMC पूरी तरह AI प्ले है. पूरी दुनिया में इस समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की होड़ चल रही है. इस रेस में TSMC की चिप के बिना दौड़ा नहीं जा सकता है. ऐसे में कंपनी का ऑर्डर बुक और रेवेन्यू आसमान छू रहा है जिसका फायदा पूरे बाजार को मिल रहा है.
बात अगर भारतीय बाजार की करें तो पहले सितंबर 2024 में 26000 के पार लाइफ हाई बनाया और वहां से जो अंडर परफॉर्मेंस की शुरुआत हुई वह पिछले 18-20 महीनों से जारी है और फिलहाल निफ्टी 24000 के आसपास कारोबार कर रहा है. हालांकि, जनवरी 2026 में इंडेक्स ने फिर से 26300 के करीब का नया लाइफ हाई बनाया थे लेकिन निवेशकों के पोर्टफोलियो लाल निशान में ही रहे.
| साल | भारत | ताइवान |
| 2023 | शानदार रैली- PSU, Railways, Defence और Capital Goods सेक्टर्स में भारी तेजी | AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) थीम की शुरुआत |
| 2024 | चुनावी अनिश्चितता के बावजूद बाजार में मजबूती, Retail Participation रिकॉर्ड स्तर पर | TSMC और चिपमेकर्स (सेमीकंडक्टर शेयरों) में विस्फोटक तेजी |
| 2025 | Valuation को लेकर चिंताएं शुरू, FII Selling बढ़ी, Global Risk का असर | AI Infra Spending Boom (एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च में भारी उछाल) का फायदा |
| 2026 | FII बिकवाली, Earnings डाउनग्रेड, लार्जकैप का कमजोर प्रदर्शन, Oil Price का झटका, महंगाई का डर | AI प्ले के कारण FII इन्फ्लो, AI Hardware Supercycle की शुरुआत |
2023 और 2024 में भारतीय बाजार ने आउट पररफॉर्मेंस दिखाया था. उसके बाद 2025 में वैल्युएशन की चिंता होने लगी, फिर FIIs की बिकवाली शुरू हुई, अमेरिका के साथ ट्रेड डील क्राइसिस पैदा हुई, रुपए में गिरावट की शुरुआत हुई और अंत में ईरान युद्ध के कारण क्रूड ऑयल में लगी आग ने ओवरऑल इंफ्लेशन, कंजप्शन और करेंसी डेप्रिसिएशन का भारी संकट पैदा कर दिया है. इस समय भारत की अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों मैक्रो इकोनॉमिक चैलेंज से जूझ रहा है.
| ताइवान की रैली के 5 बड़े कारण (Taiwan Rally) | भारत के अंडरपरफॉर्मेंस के 5 कारण (India Underperformance) |
| TSMC का दबदबा: दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर फाउंड्री होने से ग्लोबल AI इकोसिस्टम इस पर निर्भर है | क्रूड ऑयल प्राइस: भारत बड़ा तेल आयातक है, इसलिए मिडिल ईस्ट तनाव और महंगी क्रूड ने सेंटिमेंट बिगाड़ा |
| ग्लोबल AI बूम: Nvidia के AI GPU की भारी डिमांड से ताइवान के प्रोडक्शन में जोरदार उछाल आया | महंगा वैल्युएशन: लगातार तेजी के बाद 2024 तक भारत दुनिया के सबसे महंगे इमर्जिंग मार्केट्स में शामिल हो गया था |
| FIIs की पसंद: फंड मैनेजर्स ने प्योर AI हार्डवेयर एक्सपोजर के लिए भारत के मुकाबले ताइवान को ओवरवेट किया | FIIs की भारी बिकवाली: हाई वैल्युएशन के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में जमकर प्रॉफिट बुकिंग की |
| रेगुलेटरी बदलाव का सपोर्ट: घरेलू फंड्स को सिंगल स्टॉक एक्सपोजर लिमिट बढ़ने से TSMC में डोमेस्टिक बाइंग और तेज हुई | AI थीम का अभाव: भारत में IT सर्विसेज तो हैं, लेकिन ग्लोबल स्केल पर चिप मैन्युफैक्चरिंग न होना बड़ा स्ट्रक्चरल गैप है |
| मजबूत एक्सपोर्ट मोमेंटम: दमदार चिप एक्सपोर्ट से ताइवान का ट्रेड सरप्लस बढ़ा और वहां की करेंसी को सपोर्ट मिला | अर्निंग्स में सुस्ती: भारतीय बाजार के मुख्य सेक्टर्स जैसे बैंकिंग और कंजम्पशन की ग्रोथ में सुस्ती दर्ज की गई |
भारतीय बाजार ने पिछले 18-20 महीने से अंडर परफॉर्मेंस जरूर दिखाया है लेकिन घरेलू निवेशकों का जोश हाई है जिसके कारण हर महीने 30 हजार करोड़ रुपए के आसपास SIP हो रही है जिसने FII आउटफ्लो को संभाल रखा है. भारतीय बाजार की सबसे बड़ी चुनौती इस समय क्रूड में तेजी और रुपए पर दबाव है. ईरान और अमेरिका के बीच डील होने से क्रूड में नरमी आएगी जो भारत की अधिकांश चुनौती दूर कर देगी. हालांकि, FII के आउटफ्लो को लेकर समस्या बनी हुई है.
दूसरी तरफ ग्लोबल रिस्क बढ़ रहा है और AI को लेकर उत्साह धीरे-धीरे कम हो रहा है. ऐसे में अगर AI थीम सुस्त पड़ती है और आने वाले समय में चीन और ताइवान के बीच टेंशन बढ़ती है तो ताइवान का बाजार हाई रिस्क पर रहेगा. डायवर्सिफाइड थीम, मैक्रो इकोनॉमिक स्टैबिलिटी और प्राइस एंड टाइम करेक्शन के बाजार भारतीय बाजार फिर से विदेशी निवेशकों का फेवरेट बनने की राह पर है. अगर आप ग्लोबल इन्वेस्टर्स हैं तो इन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है.