ESOP और Variable Pay का गजब का खेल, ₹30 हजार की Salary पर रोज किया 15-15 घंटे काम, अब कहानी हो रही वायरल

स्टार्टअप (Startup) की चमक-दमक के पीछे कई बार कड़वी हकीकत छिपी होती है. ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक भारतीय कर्मचारी ने तीन साल की मेहनत के बाद खुद को ठगा हुआ महसूस किया. कंपनी ने वेतन (Salary) और शेयर (Shares) का झांसा देकर उसे बांधकर रखा और 3 साल पूरा होने से ठीक पहले निकाल दिया, ताकि शेयर देने से बचा जा सके.
ESOP और Variable Pay का गजब का खेल, ₹30 हजार की Salary पर रोज किया 15-15 घंटे काम, अब कहानी हो रही वायरल

भारत में तेजी से बढ़ते स्टार्टअप्स (Indian Startup Culture) युवाओं को बड़ी उम्मीदें देते हैं. ऊंचे पैकेज, तेज ग्रोथ और शेयरहोल्डिंग जैसी बातें सुनकर नए ग्रेजुएट्स इसमें कूद जाते हैं. लेकिन असलियत हमेशा वैसी नहीं होती जैसी दिखती है.

ऐसा ही एक अनुभव सामने आया है, जहां एक कर्मचारी ने रेडिट (Reddit) पर अपनी कहानी साझा की है. उसने बताया कि कैसे उसे 7 LPA पैकेज का वादा किया गया था, लेकिन हाथ में सिर्फ 3 LPA सैलरी मिली. बाकी हिस्सा शेयरों में दिया जाना था, जो 3 साल बाद मिलने थे. लेकिन ठीक 3 साल पूरा होने से पहले ही उसे निकाल दिया गया.

कैसे दिया गया 'शेयर' का झांसा?

इस कर्मचारी ने बताया कि शुरुआत में उसे 7 LPA पैकेज ऑफर किया गया. इसमें से इनहैंड सैलरी 3 LPA और शेयर के नाम पर 4 LPA (तीन साल बाद वेस्ट होने थे) का वादा किया गया. शुरुआत में यह आकर्षक डील लगी, लेकिन हकीकत में यह सिर्फ कर्मचारियों को कंपनी से बांधने का तरीका था.

लंबे घंटे, कम सैलरी और कटौती

कर्मचारी का कहना है कि उसने ढाई साल तक दिन-रात काम किया. हफ्ते के सातों दिन काम, रोज़ 15 घंटे तक ड्यूटी. पूरी टीम छोड़कर चली गई, लेकिन वह और एक साथी बचकर पूरा बोझ संभालते रहे. इतना ही नहीं, 50,000 रुपये की सैलरी भी घटाकर 30,000 रुपये कर दी गई और कारण बताया गया "परफॉर्मेंस-आधारित कटौती".

झूठे पैकेज का खेल

स्टार्टअप ने बाद में उसके पैकेज को 16 LPA दिखाया, लेकिन इसमें से 12 LPA "वेरिएबल पे" था, जो उसे कभी नहीं मिला. कर्मचारी ने यह सब सहा, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि 3 साल बाद शेयर मिलेंगे और वह अपने 5 लाख रुपये का कर्ज चुका सकेगा.

3 साल होने से एक महीने पहले कर दी छंटनी

3 साल पूरे होने से ठीक एक महीने पहले उसे निकाल दिया गया. कारण बताया गया कि उसने एक हाई-प्रायोरिटी काम को एक घंटे तक शुरू नहीं किया. लेकिन कर्मचारी का कहना है कि असल कारण यह था कि फाउंडर उसे शेयर नहीं देना चाहता था.

reditt

लोगों ने जताया गुस्सा

इस पोस्ट पर रेडिट यूजर्स ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

एक ने लिखा- "भारत में स्टार्टअप कल्चर (Startup Culture in India) अक्सर खराब होता है, यह सिर्फ एक और उदाहरण है."

दूसरे ने सवाल किया: "जब सब लोग कंपनी छोड़कर चले गए तो तुम क्यों रुके?"

तीसरे ने सलाह दी: "कंपनी पर केस करो, अगर तुम्हें पेमेंट नहीं कर सकती तो कम से कम वकीलों को तो पैसे देने पड़ेंगे."

क्या होता है ESOP?

ESOP का मतलब है Employee Stock Option Plan. इसमें कंपनी अपने कर्मचारियों को शेयर खरीदने का अधिकार देती है, लेकिन एक तय समय (वेस्टिंग पीरियड) के बाद. यानी शुरुआत में आपको शेयर नहीं मिलते, बल्कि भविष्य में एक तय कीमत पर खरीदने का हक मिलता है. अगर कंपनी का वैल्यूएशन बढ़ता है, तो कर्मचारी को फायदा होता है. इसे कर्मचारी को कंपनी से जोड़कर रखने और उनका मोटिवेशन बढ़ाने के लिए दिया जाता है. लेकिन ध्यान रहे, अगर कंपनी नुकसान में जाती है या समय से पहले नौकरी छोड़ दी जाए तो इसका लाभ नहीं मिलता.

वैरिएबल पे (Variable Pay)

वैरिएबल पे सैलरी का वह हिस्सा है जो हर महीने फिक्स नहीं होता. यह कंपनी की परफॉर्मेंस, आपके टारगेट पूरे करने और सालाना रिजल्ट्स पर निर्भर करता है. आम तौर पर यह बोनस, इंसेंटिव या परफॉर्मेंस लिंक्ड पे के रूप में दिया जाता है.

उदाहरण के लिए, किसी का सालाना पैकेज 10 लाख रुपये है, जिसमें 7 लाख रुपये फिक्स और 3 लाख रुपये वैरिएबल पे है. अगर कंपनी या कर्मचारी का परफॉर्मेंस अच्छा रहा तो पूरा वैरिएबल पे मिलेगा, वरना कम भी हो सकता है. यानी वैरिएबल पे भरोसेमंद नहीं होता, बल्कि जोखिम भरा हिस्सा होता है.

क्यों फंसते हैं युवा स्टार्टअप्स में?

स्टार्टअप्स चमकदार पैकेज, तेजी से प्रमोशन और शेयरहोल्डिंग का सपना दिखाते हैं. लेकिन अक्सर ये वादे सिर्फ कागज पर रह जाते हैं.

क्या सच में है कोई रास्ता?

ऐसे मामलों से बचने के लिए युवाओं को कुछ चीजें ध्यान में रखनी चाहिए:

  • ऑफर लेटर को ध्यान से पढ़ें
  • शेयर या वेरिएबल पे पर निर्भर न रहें
  • हमेशा लिखित एग्रीमेंट की कॉपी रखें
  • अपने हक की लड़ाई से पीछे न हटें

Conclusion

यह कहानी सिर्फ एक कर्मचारी की नहीं है, बल्कि भारत के स्टार्टअप कल्चर की हकीकत दिखाती है. चमकते हुए पैकेज के पीछे छिपा शोषण और झूठे वादे कई युवाओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं. जरूरत है कि नौकरी शुरू करने से पहले सही रिसर्च की जाए और बिना सोचे-समझे किसी भी ऑफर पर भरोसा न किया जाए.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. स्टार्टअप क्या होता है?

एक नई कंपनी जो नए आइडिया या प्रोडक्ट पर काम करती है.

Q2. वेस्टिंग पीरियड क्या होता है?

वह समय जिसके बाद शेयर या स्टॉक ऑप्शन कर्मचारी को मिलते हैं.

Q3. वेरिएबल पे क्या होता है?

सैलरी का वह हिस्सा जो परफॉर्मेंस या कंपनी की कमाई पर निर्भर करता है.

Q4. क्या हर स्टार्टअप टॉक्सिक होता है?

नहीं, लेकिन कई जगह ऐसा कल्चर देखने को मिलता है.

Q5. कर्मचारी के पास क्या विकल्प होते हैं अगर वादा पूरा न हो?

कर्मचारी श्रम विभाग या कोर्ट का सहारा ले सकता है.

Q6. ऑफर लेटर में क्या देखना चाहिए?

सैलरी ब्रेकअप, शेयर की शर्तें और बोनस की डिटेल्स.

Q7. क्या सिर्फ शेयर के भरोसे नौकरी लेना सही है?

नहीं, स्थिर सैलरी पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए.

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