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दिल्ली-एनसीआर को लेकर सोशल मीडिया पर जितनी नफरत मिलती है, शायद ही किसी और मेट्रो सिटी को मिलती हो. यहां के लोग, कल्चर, ट्रैफिक और अब तो स्टार्टअप ईकोसिस्टम (Startup Ecosystem) तक को अक्सर ट्रोल किया जाता है.
लेकिन अरुणाभ सिन्हा की कहानी कुछ और ही कहती है. बिहार के रहने वाले और मुंबई में 7 साल बिताने के बाद, जब वह सितंबर 2010 में दिल्ली आए तो उन्होंने भी शहर को नापसंद किया. पर धीरे-धीरे दिल्ली ने उन्हें अपनाया. इसी शहर ने उन्हें प्यार दिया, पहला घर और कार दिलाई और पहली बार स्टार्टअप शुरू करने का मौका भी दिया.
इसी महीने से दिल्ली सरकार ने अपनी नई Startup Policy 2025 पेश की है. इस पॉलिसी का सबसे बड़ा विजन है दिल्ली को सिलिकॉन वैली जैसा बनाना. दिल्ली सरकार 2035 तक दिल्ली को तमाम स्टार्टअप के लिए पहली पसंद बनाना चाहती है. बता दें कि अभी बेंगलुरु को भारत का सिलिकॉन वैली कहा जाता है, जो स्टार्टअप्स का हब है.
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लॉन्ड्री स्टार्टअप यूक्लीन (Uclean) के फाउंडर अरुणाभ सिन्हा के मुताबिक, अगर आप पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें तो दिल्ली सरकार का इरादा बिल्कुल साफ दिखता है. यह पॉलिसी न केवल निवेश आकर्षित करने के लिए बनी है, बल्कि अकेडेमिक्स और इंडस्ट्री को जोड़ने की भी कोशिश है.
अरुणाभ सिन्हा ने अपने पोस्ट में कई अहम कारण गिनाए हैं, जिनसे दिल्ली स्टार्टअप राजधानी बन सकती है.
बेंगलुरु की सबसे बड़ी समस्या है ट्रैफिक. वहां गाड़ियां घंटों जाम में फंसी रहती हैं. इसके मुकाबले दिल्ली का ट्रैफिक भले खराब हो, लेकिन चलता जरूर है. मेट्रो नेटवर्क और सड़कों का फैलाव दिल्ली को बढ़त देता है.
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बेंगलुरु में काम करने वाला बड़ा हिस्सा पूर्वी भारत से आता है. अगर दिल्ली मजबूत ईकोसिस्टम बना ले तो यही टैलेंट दिल्ली को चुनेगा, क्योंकि दिल्ली पास भी है और सांस्कृतिक रूप से भी ज्यादा करीब.
दिल्लीवालों को चाहे जितना तेज और बिंदास कह लें, लेकिन यहां किसी पर भाषा थोपने का दबाव नहीं है. न हिंदी जानने की मजबूरी, न किसी और बोली का दबाव. यह ओपन कल्चर स्टार्टअप्स के लिए सही माहौल देता है.
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दिल्ली के स्कूल और यूनिवर्सिटीज पहले से ही मजबूत हैं. अगर इन्हें इंडस्ट्री से जोड़ा गया तो यहां से सीधे स्कूल ड्रॉपआउट्स भी उद्यमी बनकर निकलेंगे.
| फैक्टर | दिल्ली (Delhi) | बेंगलुरु (Bengaluru) |
|---|---|---|
| ट्रैफिक | जाम है लेकिन चलता है | जाम पूरी तरह ठहर जाता है |
| टैलेंट | पूर्वी भारत से सीधा कनेक्शन | पूर्वी भारत का आकर्षण लेकिन दूरी ज्यादा |
| भाषा | कोई थोपने का दबाव नहीं | लोकल भाषा को लेकर बहस होती रहती है |
| शिक्षा | DU, JNU, IIT Delhi जैसे बड़े संस्थान | IIMB, IISc, कुछ प्राइवेट यूनिवर्सिटीज |
| इंफ्रास्ट्रक्चर | मेट्रो, सड़कों का मजबूत नेटवर्क | पब्लिक ट्रांसपोर्ट कमज़ोर |
सिन्हा का मानना है कि दिल्ली को सबसे ज्यादा सतर्क रहना होगा. जैसे बेंगलुरु दबाव झेल नहीं पा रहा और टूटने की कगार पर है, वैसे ही अगर दिल्ली ने तैयारी नहीं की तो वही हाल यहां भी हो सकता है. खासकर, ब्यूरोक्रेसी (Bureaucracy) को कंट्रोल में रखना होगा. अगर सरकारी लालफीताशाही बढ़ी तो पॉलिसी का फायदा आधा हो जाएगा.
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