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अगर आप शार्क टैंक इंडिया (Shark Tank India) देखते हैं तो आपने अक्सर निवेशकों या 'शार्क्स' को यह कहते जरूर सुना होगा कि उन्हें इस बिजनेस में 'फाउंडर-मार्केट फिट' नजर आ रहा है. स्टार्टअप की दुनिया में जहां हर दिन नए आइडिया जन्म लेते हैं, वहां सिर्फ एक बेहतरीन आइडिया होना सफलता की गारंटी नहीं है. असली खेल इस बात का है कि उस आइडिया को हकीकत में बदलने वाला इंसान यानी 'फाउंडर' उस मार्केट के लिए कितना सही है.
फाउंडर-मार्केट फिट वह स्थिति है जब किसी आंत्रप्रेन्योर का पिछला अनुभव, उसकी निजी दिलचस्पी और उसकी काबिलियत उस समस्या से सीधे जुड़ी होती है जिसे वह हल करने की कोशिश कर रहा है. सरल शब्दों में कहें तो, क्या आप वही व्यक्ति हैं जिसे यह काम करना चाहिए? निवेशक मानते हैं कि आइडिया बदले जा सकते हैं (पिवट), लेकिन एक सही फाउंडर अपनी गहरी समझ से कठिन समय में भी कंपनी को उबार सकता है.
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यह केवल एक चमकदार रिज्यूमे या बड़ी डिग्री के बारे में नहीं है, बल्कि यह 'प्रासंगिकता' (Relevance) के बारे में है. एक फाउंडर जिसके पास मजबूत मार्केट फिट होता है, वह ग्राहकों की समस्याओं को किताबी ज्ञान से नहीं बल्कि अपने अनुभव से समझता है. वह जानता है कि इंडस्ट्री कैसे काम करती है, उसमें खामियां कहां हैं और मौजूदा समाधान क्यों विफल हो रहे हैं.
जब फाउंडर अपने मार्केट के साथ गहराई से जुड़ा होता है, तो वह दूसरों के मुकाबले तेजी से फैसले ले पाता है. उसे मार्केट रिसर्च के लिए महीनों का समय नहीं चाहिए होता, क्योंकि वह खुद उस समस्या का हिस्सा रह चुका होता है. यही 'इनसाइट' स्टार्टअप को शुरुआती गलतियों से बचाती है और उसे कॉम्पिटिशन में आगे रखती है.
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स्टार्टअप्स के शुरुआती दौर में अनिश्चितता बहुत अधिक होती है. आइडिया कॉपी किए जा सकते हैं और मार्केट की स्थितियां रातों-रात बदल सकती हैं. ऐसे में निवेशक अपना पैसा उस 'घोड़े' (आइडिया) पर नहीं, बल्कि 'जॉकी' (फाउंडर) पर लगाते हैं.
विश्वसनीयता और स्पीड: जो फाउंडर अपने क्षेत्र का विशेषज्ञ होता है, उसे निवेशकों, कर्मचारियों और ग्राहकों का भरोसा जल्दी मिलता है.
ग्राहकों की गहरी समझ: खुद उस समस्या को महसूस करने वाले फाउंडर ऐसे प्रोडक्ट्स बनाते हैं जो सीधे लोगों के दिलों को छूते हैं. इससे ग्राहकों का जुड़ाव (Retention) बढ़ता है.
कठिन समय में टिके रहना: स्टार्टअप चलाना काफी तनावपूर्ण होता है. अगर फाउंडर का जुड़ाव केवल पैसे से है, तो वह बुरा वक्त आने पर जल्दी हार मान सकता है. लेकिन मार्केट फिट वाला फाउंडर जुनून के कारण टिका रहता है.
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अगर आप अपना स्टार्टअप शुरू करने की सोच रहे हैं, तो केवल ट्रेंड के पीछे न भागें. खुद से ये सवाल जरूर पूछें:

अगर इन सवालों का जवाब 'हां' है, तो आपके सफल होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. स्टार्टअप की दुनिया का बड़ा सबक यही है कि आइडिया आपको सुर्खियां दिला सकते हैं, लेकिन एक सही फाउंडर ही कंपनी खड़ी करता है.
अंत में, सफलता केवल उस आइडिया को नहीं मिलती जो सबसे अनोखा हो, बल्कि उसे मिलती है जो उस मार्केट को सबसे बेहतर समझता हो. फाउंडर-मार्केट फिट वह अदृश्य ताकत है जो एक स्टार्टअप को मुश्किलों के बीच भी रास्ता दिखाने का काम करती है. जैसा कि अनुभवी निवेशक कहते हैं- एक औसत आइडिया और बेहतरीन फाउंडर की जोड़ी सफल हो सकती है, लेकिन एक बेहतरीन आइडिया और गलत फाउंडर की जोड़ी अक्सर नाकाम ही होती है.
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