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जल्द ही देश का बजट (Budget 2024) पेश होने वाला है. 23 जुलाई को बजट आने से पहले तमाम स्टार्टअप (Startup) उम्मीद कर रहे हैं और साथ ही सरकार से मांग भी कर रहे हैं कि एंजेल टैक्स को खत्म किया जाए. अब सवाल ये उठता है कि आखिर क्या होता है ये एंजेल टैक्स (Angel Tax), जिसे लेकर सारे स्टार्टअप दहशत में हैं. एंजेल टैक्स को स्टार्टअप की दुनिया में इतना खराब माना जाता है कि इसे दोधारी तलवार भी कहा जाता है. आइए जानते हैं एंजेल टैक्स के बारे में सब कुछ.
Angel Tax को साल 2012 में लागू किया गया था. यह उन अनलिस्टेड बिजनेस पर लागू होता है, जो एंजेल निवेशकों से फंडिंग हासिल करते हैं. जब किसी स्टार्टअप को किसी एंजेल निवेशक से फंड हासिल होता है, तो उसे इस पर टैक्स चुकाना पड़ता है. आयकर अधिनियम 1961 की धारा 56 (2) (vii) (b) के तहत स्टार्टअप को Angel Tax चुकाना पड़ता है. असली दिक्कत तो तब होती है जब किसी स्टार्टअप को मिलने वाला इन्वेस्टमेंट उसकी Fair Market Value (FMV) से भी अधिक हो जाता है. ऐसी हालत में स्टार्टअप को 30.9 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता है.
सरकार की तरफ से इस टैक्स को मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए लागू किया गया था. साथ ही इसकी मदद से तमाम बिजनेस को टैक्स के दायरे में लाने की कोशिश की गई. सरकार ने भले ही इसे अच्छे मकसद से शुरू किया है, लेकिन इससे तमाम स्टार्टअप्स को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिससे चलते ही सालों से इसका विरोध हो रहा है.
मान लीजिए कि आपके स्टार्टअप में किसी निवेशक ने 5000 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से इक्विटी मनी लगाई है. वहीं अगर आपके स्टार्टअप की फेयर मार्केट वैल्यू 4000 रुपये प्रति शेयर है तो इसका मतलब हुआ कि आपको 1000 रुपये प्रति शेयर पर टैक्स चुकाना होगा. हालांकि, अगर तमाम स्टार्टअप एंजेल टैक्स गाइडलाइन्स को फॉलो करते हैं और उसके वैल्युएशन को किसी सर्टिफाइड वैल्यूअर द्वारा गाइडलाइन्स के हिसाब से सर्टिफाई किया जाता है तो कंपनी को मिले प्रीमियम पर भी एंजेल टैक्स से छूट मिलेगी.
The Startup Capital के आदित्य एस कपूर कहते हैं- जब स्टार्टअप्स और उनका समर्थन करने वाले निवेशकों की बात आती है तो एंजेल टैक्स एक 'दोधारी तलवार' जैसा होता है. किसी शुरुआती चरण की कंपनी में निवेश करना रोमांचक भी है और चुनौतीपूर्ण भी. एंजेल निवेशक अपने विचारों को वास्तविकता में बदलने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता देकर स्टार्टअप की शुरुआत और विकास में अहम भूमिका निभाते हैं. एंजेल टैक्स की अवधारणा इस यात्रा में अनिश्चितता और जटिलता के बादल लाती है.
इसे देखकर ऐसा लगता है कि सरकारें वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना चाहती है. हालांकि, एंजेल टैक्स अक्सर संभावित निवेशकों को हाई रिस्क और हाई रिवॉर्ड वाले स्टार्टअप में निवेश करने से रोकता है. भारी-भरकम टैक्स के चलते निवेशक स्टार्टअप में पैसे लगाने से झिझक रहे हैं, भले ही स्टार्टअप की क्षमता पर पूरा विश्वास क्यों ना हो. यह निवेश के निर्णय को तो प्रभावित करती ही है, तेजी से उभरते बिजनेस पर भी असर डालता है. हालांकि, ये देखकर अच्छा लगता है कि सरकारें स्टार्टअप के लिए नियमों के अधिक अनुकूल बनाने का काम कर रही हैं. इस मामले में अधिक सहायक नीतियां बनाने की उम्मीद है.
स्टार्टअप्स को angel tax की वजह से बहुत सी दिक्कतें होती हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में.
बिजनेस बढ़ाने में दिक्कत
जब भी कोई फाउंडर अपने स्टार्टअप का बिजनेस बढ़ाना चाहता है तो उसे फंड की जरूरत होती है. इसके लिए एंजेल निवेशकों से पैसे जुटाना एक अच्छी प्रैक्टिस होती है. हालांकि, जब भी कोई फाउंडर किसी एंजेल निवेशक से पैसे जुटाता है तो उसे टैक्स चुकाना पड़ता है. वहीं अगर स्टार्टअप की FMV से ज्यादा निवेश मिला तो टैक्स 30.9 फीसदी लगता है. ऐसे में स्टार्टअप जितना कमाता नहीं है, उससे ज्यादा तो वह टैक्स चुका देता है.
फंडिंग में दिक्कत
अमीर लोग और एंजेल निवेशक इस भारी भरकम एंजेल टैक्स की वजह से कई बार स्टार्टअप में निवेश करने से कतराते हैं. इससे आंत्रप्रेन्योर्स को फंड की दिक्कत हो सकती है.
आसान नहीं सही FMV बता पाना
किसी स्टार्टअप की बिल्कुल सही FMV बता पाना आसान नहीं है, खासकर उस स्टार्टअप के शुरुआती दिनों में. ऐसे में टैक्स अथॉरिटीज के साथ अक्सर डिस्प्यूट भी हो जाते हैं. कई बार असेसमेंट लंबा खिंच जाता है, जिससे बेकार का बोझ स्टार्टअप पर आ जाता है. इसकी वजह से कई भारतीय स्टार्टअप्स को ग्लोबल लेवल की कंपनियों से टक्कर भी नहीं ले पाते हैं.