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जब कोई स्टार्टअप Shark Tank India पर पिच करता है और डील पाता है (या नहीं भी पाता), तो असली गेम उस शो के खत्म होने के बाद शुरू होता है. टीवी पर जो 30–40 मिनट दिखता है, उसके बाद महीनों तक ड्यू डिलिजेंस, ग्रोथ, ब्रांडिंग और असली बिजनेस की परीक्षा होती है. यह भी जान लें कि इस 30-40 मिनट के एपिसोड को बनाने में कई घंटों का शूट होता है, क्योंकि पिच काफी लंबी चलती हैं.
अब एक सवाल ये उठता है कि क्या शार्क टैंक पर मिले चेक को स्टार्टअप फाउंडर बैंक में डाल सकते हैं? आइए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि Shark Tank के बाद स्टार्टअप्स के साथ असल में क्या-क्या होता है. ये 10 प्वाइंट इसे समझने में आपकी मदद करेंगे.
शो में डील मिलने का मतलब यह नहीं कि पैसा तुरंत मिल गया. डील के बाद Sharks की टीम स्टार्टअप की पूरी जांच करती है:
अगर डेटा शो में बताए गए आंकड़ों से मैच नहीं करता, तो डील कैंसिल भी हो सकती है.
बहुत से लोग मानते हैं कि जो टीवी पर डील दिखी, वह पक्की हो गई. लेकिन सच ये है:
यानी ऑन-एयर डील = Final Investment नहीं होता हमेशा.
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Shark Tank पर आने के बाद सबसे बड़ा फायदा होता है ब्रांड विजिबिलिटी. आम तौर पर स्टार्टअप्स का:
कई स्टार्टअप्स की एक दिन की सेल्स, पूरे महीने जितनी हो जाती है.
शो पर दिखने के बाद:
Tagline “As Seen on Shark Tank” खुद में एक मार्केटिंग हथियार बन जाता है.
अगर डील फाइनल हो जाती है, तो Sharks सिर्फ पैसा ही नहीं देते, बल्कि:
जैसे ई-कॉमर्स, रिटेल या मार्केटिंग में एक्सपर्ट गाइडेंस भी देते हैं.
अचानक डिमांड बढ़ने से उन स्टार्टअप्स को दिक्कत आती है, जो पहले से तैयार नहीं होते. कई स्टार्टअप्स ग्रोथ संभाल नहीं पाते और नेगेटिव रिव्यू भी मिलने लगते हैं. अचानक डिमांड बढ़ने से ये होता है:

भले ही Sharks निवेश करें या ना करें, शो के बाद:
इसे “Shark Tank Effect” भी कहा जाता है.
हर स्टार्टअप सफल नहीं होता. फेल होने के कारण:
कई स्टार्टअप्स हाइप के बाद sustain नहीं कर पाते.
यह सबसे दिलचस्प बात है. जिन स्टार्टअप्स को कोई निवेश नहीं मिलता:
कई “No Deal” स्टार्टअप्स बाद में ज्यादा सफल हुए हैं.
आखिर में शो नहीं, बल्कि ये चीजें तय करती हैं:
Shark Tank स्टार्टअप्स के लिए एक लॉन्चपैड है, फाइनल जीत नहीं. शो के बाद असली परीक्षा शुरू होती है- ड्यू डिलिजेंस, स्केलिंग, ऑपरेशंस और सस्टेनेबल ग्रोथ की. कुछ स्टार्टअप्स रातों-रात ब्रांड बन जाते हैं, जबकि कुछ हाइप के बाद टिक नहीं पाते. असली सफलता आखिरकार मजबूत बिजनेस मॉडल और execution पर ही निर्भर करती है, ना कि सिर्फ टीवी पर मिली डील पर.
1. क्या Shark Tank पर मिला चेक तुरंत कैश हो जाता है?
नहीं, पहले ड्यू डिलिजेंस होता है, उसके बाद ही फाइनल निवेश मिलता है.
2. क्या शो में दिखी हर डील फाइनल होती है?
नहीं, कई डील्स बाद में वैल्युएशन या डेटा मिसमैच के कारण टूट जाती हैं.
3. Shark Tank पर आने के बाद सेल्स क्यों बढ़ जाती हैं?
क्योंकि ब्रांड विजिबिलिटी, ट्रस्ट और मीडिया एक्सपोजर अचानक बढ़ जाता है.
4. जिन स्टार्टअप्स को डील नहीं मिलती, क्या उन्हें नुकसान होता है?
नहीं, उन्हें भी फ्री मार्केटिंग, ट्रैफिक और कस्टमर ग्रोथ का बड़ा फायदा मिलता है.
5. Long Term में स्टार्टअप की सफलता क्या तय करती है?
प्रोडक्ट क्वालिटी, रिपीट कस्टमर, प्रॉफिटेबिलिटी, एक्सीक्यूशन और स्केलेबिलिटी.
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