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चेन्नई के स्टार्टअप Fragaria का हेडक्वार्टर अब बेंगलुरु शिफ्ट होने जा रहा है. कंपनी के फाउंडर हरीश वरदराजन (Harish Varadharajan) ने यह जानकारी अपने लिंक्डइन (LinkedIn) और एक्स (X) पोस्ट के जरिए दी. उन्होंने लिखा कि चेन्नई में उन्होंने पूरी मेहनत से एक ग्लोबल प्रोडक्ट (Global Product) तैयार किया और स्ट्रॉबेरी (Strawberry) की खेती में नए एक्सपेरिमेंट किए.
लेकिन अब कंपनी को बेहतर बिजनेस माहौल, मार्केट एक्सेस (Market Access), एक्सपैट्स (Expats) के लिए बेहतर रहन-सहन और बेंगलुरु के मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम की वजह से वहां शिफ्ट होना पड़ रहा है. हालांकि, कंपनी का आरएंडडी (R&D) फार्म अभी भी चेन्नई में ही रहेगा.
स्टार्टअप के इस फैसले से चेन्नई के कई लोग नाराज नजर आए. कुछ लोगों का कहना है कि चेन्नई में पहले से ही टैलेंट और इन्फ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) मौजूद है. शहर में समुद्री हवाएं रहती हैं और केवल अप्रैल-मई में ही ज्यादा गर्मी होती है. फिर भी कंपनियां बेंगलुरु चली जाती हैं.
कई यूजर्स ने इसे पॉलिसी (Policy) और लिवेबिलिटी (Livability) से जुड़ा मुद्दा बताया. उनका कहना है कि चेन्नई में बिजनेस पॉलिसी और स्टार्टअप फ्रेंडली कल्चर की कमी है. एक यूजर ने लिखा कि "हम एजुकेशन में पैसा लगा रहे हैं और बेंगलुरु इसका फायदा उठा रहा है."
कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि स्टेट की राजधानी को कोयंबटूर (Coimbatore) शिफ्ट कर देना चाहिए. इससे क्लाइमेट की शिकायत खत्म होगी और नया स्टार्टअप हब तैयार हो सकता है. उन्होंने पुणे (Pune) की ग्रोथ का उदाहरण देते हुए कहा कि कोयंबटूर भी ओटी (Ooty), कोडाईकनाल (Kodaikanal) और मुन्नार (Munnar) जैसी जगहों की वजह से टूरिज्म और बिजनेस दोनों में तेजी पकड़ सकता है.
हरीश वरदराजन ने अपनी पोस्ट में लिखा कि "चेन्नई हमेशा हमारा पहला घर रहेगा". उन्होंने बताया कि कंपनी का आरएंडडी फार्म वही रहेगा और टीम लगातार काम करती रहेगी.
इस पूरी बहस से साफ है कि चेन्नई से बेंगलुरु का रुख करने वाले स्टार्टअप्स सिर्फ क्लाइमेट या इन्फ्रास्ट्रक्चर की वजह से नहीं, बल्कि स्टार्टअप फ्रेंडली माहौल, मार्केट एक्सेस और नीतियों (Policies) की वजह से ऐसा कर रहे हैं. अब देखना यह होगा कि तमिलनाडु (Tamil Nadu) सरकार इस ट्रेंड को रोकने के लिए क्या कदम उठाती है.
एक नई और इनोवेटिव बिजनेस कंपनी, जो तेजी से बढ़ने का लक्ष्य रखती है.
क्योंकि यहां टेक टैलेंट, निवेशक और बिजनेस नेटवर्क आसानी से मिलते हैं.
कंपनी का मुख्य ऑफिस और मैनेजमेंट लोकेशन बदलना.
नीतियों और बिजनेस माहौल की वजह से कंपनियों को दिक्कत आती है.
रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी रिसर्च और नए प्रोडक्ट्स पर काम.
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