MSME उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की नई पहल, बिजनेस और डेवलपमेंट को मिलेगी रफ्तार

केंद्र सरकार ने एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने के लिए नियमों में बड़ी राहत दी है. BIS की तरफ से क्वालिटी नियमों में छूट, शुल्क में भारी कटौती और लैब नियमों में ढील दी गई है. वहीं RBI ने सस्ते लोन और बिना जमानत फाइनेंस का रास्ता आसान किया है, जिससे कारोबार और रोजगार दोनों को रफ्तार मिलेगी.
MSME उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की नई पहल, बिजनेस और डेवलपमेंट को मिलेगी रफ्तार

केंद्र सरकार लगातार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई (MSME sector reforms) को मजबूत करने के लिए नए कदम उठा रही है. सरकार का फोकस साफ है कि छोटे कारोबारियों को नियमों की उलझन से राहत मिले और उन्हें आसानी से लोन और तकनीकी मदद मिल सके.

सरकार का मानना है कि एमएसएमई (Ease of doing business for MSMEs) देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. यही सेक्टर सबसे ज्यादा रोजगार देता है और घरेलू उत्पादन को आगे बढ़ाता है. इसी सोच के साथ सरकार ने BIS और RBI के जरिए कई अहम बदलाव किए हैं.

MSME को क्वालिटी नियमों में बड़ी राहत

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भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS ने एमएसएमई के लिए क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर को आसान बना दिया है. अब सूक्ष्म और लघु उद्योगों को नए नियम लागू करने के लिए 3 से 6 महीने का अतिरिक्त समय मिलेगा. इससे छोटे कारोबारियों पर अचानक बोझ नहीं पड़ेगा और वे धीरे-धीरे नियमों के हिसाब से खुद को तैयार कर पाएंगे.

आयात और पुराने स्टॉक पर छूट का फायदा

सरकार ने निर्यात के लिए प्रोडक्ट बनाने वाली घरेलू यूनिट्स को आयात पर छूट दी है. इसके अलावा रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए 200 यूनिट तक आयात की छूट भी मिलेगी. जो माल पहले बन चुका है या आयात हो चुका है, उसे लागू तारीख से 6 महीने के भीतर बेचने की अनुमति दी गई है. इससे MSME का पैसा फंसने से बचेगा.

BIS फीस में 80 प्रतिशत तक की छूट

BIS ने MSME यूनिट्स को बड़ी वित्तीय राहत दी है. वार्षिक न्यूनतम फीस में 10 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है. वहीं नॉर्थ ईस्ट में स्थित MSME यूनिट्स और महिला उद्यमियों को अतिरिक्त 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी. इससे खासकर छोटे और नए कारोबारियों का खर्च काफी कम होगा.

लैब नियमों में ढील, खर्च होगा कम

अब MSME यूनिट्स के लिए इन-हाउस लैब रखना जरूरी नहीं है. वे BIS मान्यता प्राप्त या NABL अप्रूव्ड बाहरी लैब की सेवाएं ले सकती हैं. इससे छोटे उद्योगों को महंगी लैब बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनका ऑपरेशन खर्च घटेगा.

सर्टिफिकेशन प्रक्रिया अब ज्यादा पारदर्शी

BIS ने प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन से जुड़े सभी नियम और गाइडलाइंस अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी हैं. अब MSME यूनिट्स को साफ पता रहेगा कि कौन सा प्रोडक्ट कैसे सर्टिफाई होगा. इससे भ्रष्टाचार और भ्रम दोनों कम होंगे.

RBI ने सस्ते लोन का रास्ता खोला

RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि MSME लोन की ब्याज दरें बाहरी बेंचमार्क से जोड़ी जाएं. इससे हर तीन महीने में ब्याज दर दोबारा तय होगी और गिरती दरों का फायदा MSME को जल्दी मिलेगा.

बिना जमानत लोन और क्रेडिट गारंटी

म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी स्कीम के जरिए MSME को मशीनरी और उपकरण खरीदने के लिए लोन गारंटी दी जा रही है. साथ ही बैंकों को 10 लाख रुपये तक के लोन पर जमानत न लेने का निर्देश दिया गया है. इससे छोटे कारोबारियों को फाइनेंस आसानी से मिलेगा.

रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

इन सभी कदमों से MSME सेक्टर में निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग शुरू होंगे और लाखों रोजगार पैदा होंगे. सरकार का लक्ष्य है कि MSME देश की मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात ताकत को नई ऊंचाई तक ले जाए.

Conclusion

सरकार की ये पहल MSME सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है. नियमों में ढील, सस्ती फाइनेंसिंग और तकनीकी राहत से छोटे उद्योग मजबूत होंगे. इससे न सिर्फ कारोबार बढ़ेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी लंबी अवधि में फायदा मिलेगा.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1- MSME का मतलब क्या होता है?

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग.

2- BIS क्या करता है?

यह प्रोडक्ट क्वालिटी और सर्टिफिकेशन से जुड़ा संस्थान है.

3- MSME को कितनी फीस छूट मिली है?

10 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक.

4- महिला उद्यमियों को क्या फायदा मिलेगा?

उन्हें अतिरिक्त 10 प्रतिशत छूट मिलेगी.

5- क्या MSME को अब लैब बनानी जरूरी है?

नहीं, बाहरी मान्यता प्राप्त लैब का इस्तेमाल कर सकते हैं.

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