गजब की है ये मशीन, ऊपर से कचरा डालो.. नीचे से 'काला सोना' निकालो, जो भी देखता है बांध देता है तारीफों के पुल!

बेंगलुरु (Bengaluru) की एक महिला फाउंडर सीमा सिंह (Seema Singh) ने ऐसा इनोवेशन किया है जो हर घर की किचन वेस्ट (Kitchen Waste) की समस्या का समाधान बन सकता है. उनका स्टार्टअप दोस्त बिन (Dost Bin) ऐसा स्मार्ट कंपोस्टर (Smart Composter) बनाता है, जो 14 दिनों में वेस्ट को कंपोस्ट (Compost) में बदल देता है, वो भी बिना बदबू के. अब तक इस स्टार्टअप ने करीब ₹59.57 लाख की फंडिंग (Funding) जुटा ली है और इसका लक्ष्य है हर घर में एक कंपोस्ट मशीन लगाना.
गजब की है ये मशीन, ऊपर से कचरा डालो.. नीचे से 'काला सोना' निकालो, जो भी देखता है बांध देता है तारीफों के पुल!

भारत के हर घर में रोजाना किचन वेस्ट निकलता है- सब्जियों के छिलके, बचे हुए खाने के टुकड़े, फलों के छिलके. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही कचरा आपकी मिट्टी की ताकत (Soil Fertility) बढ़ाने वाली खाद बन सकता है? आसान भाषा में कहें तो आप इस कचरे से कंपोस्ट बना सकते हैं, जिसे काला सोना भी कहा जाता है.

बेंगलुरु की रहने वाली सीमा सिंह ने इस सोच को हकीकत में बदला है. उन्होंने 2023 में दोस्त बिन (Dost Bin Solutions) नाम का स्टार्टअप शुरू किया, जो किचन वेस्ट को बिना बदबू और बिना मेहनत के कंपोस्ट (Compost) में बदल देता है. सिर्फ 14 दिनों में आपके किचने का कचरा पौधों के लिए खाद बन जाता है- वो भी किसी बदबू के बिना.

कौन हैं दोस्त बिन की फाउंडर सीमा सिंह?

सीमा सिंह इलेक्ट्रॉनिक्स में एमटेक गोल्ड मेडलिस्ट (Gold Medalist in MTech) हैं और इसी विषय में उन्होंने पीएचडी (PhD) भी की है. वह पिछले 23 सालों से रिसर्च और अकेडमिक (Research & Academics) क्षेत्र में हैं और वर्तमान में BMS institute of technology and management (BMSITM), बेंगलुरु में डीन ऑफ इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (Dean of Innovation & Entrepreneurship) के पद पर कार्यरत हैं.

कॉलेज में फैकल्टी को अपने-अपने इनोवेशन पर काम करने के लिए प्रेरित किया जाता है और इसी प्रोग्राम के तहत सीमा ने “दोस्त बिन” की नींव रखी. उनका लक्ष्य है- “हर घर को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाना.”

दोस्त बिन: एक स्मार्ट और पेटेंटेड कंपोस्टिंग मशीन

दोस्त बिन (Dost Bin) की सोच जुलाई 2023 में शुरू हुई और अक्टूबर 2023 में सीमा ने इसे स्टार्टअप की तरह रजिस्टर कराया. फरवरी 2025 में उन्होंने अपना पहला प्रोडक्ट ग्राहक को डिलीवर किया. कंपनी ने अपने वर्जन 1 से प्रोडक्ट मार्केट फिट हासिल कर लिया है और अब कंपनी वर्जन 2 लॉन्च कर रही है. कंपनी के पास अभी तीन मॉडल हैं, जिनमें दो मैनुअल और एक ऑटोमेटिक मॉडल शामिल है.

मॉडल का नामप्रकारकीमत (₹)
मैनुअल बेसिकमैनुअल17,000
मैनुअल एडवांसमैनुअल22,000
स्मार्ट ऑटोमेटिकऑटोमेटिक32,000

कैसे काम करती है यह मशीन?

दोस्त बिन मशीन दो-स्टेज कंपोस्टिंग प्रोसेस पर काम करती है. आइए जानते हैं इसके बारे में.

1- पहला स्टेज: किचन वेस्ट को ऊपर से डालने पर, वह श्रेडर और एरिएटर के जरिए टूटकर नीचे पहुंचता है. यह चरण वेस्ट की नमी को कंट्रोल में रखता है ताकि बदबू न आए.

2- दूसरा स्टेज: यहां मशीन में रोटर मिक्सर और ब्लोअर (Rotor Mixer & Blower) होता है. ऑटोमेटिक वैरिएंट में यह हर 6 घंटे में अपने आप चालू होते हैं. इससे ऑक्सीजन और माइक्रोब्स का लेवल सही रहता है और 14 दिनों के भीतर तैयार कंपोस्ट नीचे निकल आता है.

बदबू नहीं, सिर्फ कंपोस्ट

सीमा ने बताया कि इस मशीन में एक आउटलेट दिया गया है जिससे अतिरिक्त लिक्विड ड्रेन (Liquid Drain) बाहर निकल जाता है. इससे बदबू की कोई समस्या नहीं होती. अगर चाहें तो यह लिक्विड पौधों के लिए ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर (Organic Fertilizer) के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ध्यान रहे इसका एक लीटर 15 लीटर पानी में मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है.

ऐप से कंट्रोल होने वाली ऑटोमेटिक मशीन

Protouch जैसी हाईटेक स्टार्टअप्स की तरह दोस्त बिन का ऑटोमेटिक मॉडल भी पूरी तरह टेक-इनेबल्ड (Tech-enabled) है. यह एक मोबाइल ऐप (Mobile App) से कनेक्टेड है जहां यूजर्स कई काम कर सकते हैं, जैसे-

  • मशीन के डेटा (Data Analytics) की निगरानी
  • कंपोस्ट सेल बुकिंग (Compost Sell Booking)
  • असेसरीज ऑर्डर (Accessories Order) जैसे रीमिक्स पाउडर, कोकोपीट, चारकोल

अब तक मिली ₹59.57 लाख की फंडिंग

सीमा की यह यात्रा बिना सपोर्ट के नहीं रही. दोस्त बिन को अभी तक 59.57 लाख रुपये की फंडिंग मिल चुकी है. उन्होंने बताया कि शुरुआत में कॉलेज ने उन्हें ₹36,000 का सीड फंड (Seed Fund) दिया था. इसके बाद सफलता की एक-एक सीढ़ी इस तरह चढ़ी-

सोर्सरकम (₹ में)मकसद
कॉलेज फंड36,000पहला प्रोटोटाइप
नेशनल प्लेटफॉर्म्स (कैश प्राइज)3.5 लाखप्रोडक्ट डेवलपमेंट
कॉलेज प्रिंसिपल ग्रांट2.45 लाखमार्केट रेडी प्रोडक्ट
IIT मद्रास “कार्बन जीरो चैलेंज”5 लाखइनोवेशन ग्रांट
कर्नाटक एलिवेट फंडिंग23 लाखप्रोडक्शन और ब्रांडिंग
IIM बेंगलुरु10 लाखबिजनेस एक्सपेंशन
Ideabaaz (शैली चोपड़ा)25 लाखप्रोडक्ट स्केलिंग

क्या है बिजनेस मॉडल?

फिलहाल कंपनी का राजस्व प्रोडक्ट सेलिंग और असेसरी सब्सक्रिप्शन मॉडल पर आधारित है. कंपनी कंपोस्ट बिन की बिक्री करती है. वहीं रीमिक्स पाउडर, कोकोपीट, चारकोल का सब्सक्रिप्शन देकर भी कंपनी कमाती है. भविष्य में “कंपोस्ट बायबैक मॉडल” यानी दोस्त बिन से बना कंपोस्ट कंपनी खुद खरीदेगी

फ्यूचर प्लान: हर घर में कंपोस्टर

सीमा का विजन है कि आने वाले सालों में “कंपोस्टिंग को वॉशिंग मशीन जितना आम (Composting Like Washing Machine)” बना दिया जाए. इसके लिए वह कीमत कम करने और सप्लाई चेन नेटवर्क (Compost Supply Chain) बनाने पर काम कर रही हैं, ताकि दोस्त बिन यूजर्स द्वारा बना कंपोस्ट सीधे बाजार तक पहुंचे. वर्तमान में यह प्रोडक्ट पूरे भारत (Pan India) में ऑनलाइन उपलब्ध है. कंपनी वेबसाइट से ही सबसे ज्यादा सेल करती है.

एक प्रदर्शनी से मिली पहचान

एक बार सीमा सिंह ने अपने प्रोटोटाइप को एक इनोवेशन एग्जीबिशन में दिखाया था. वहीं से लोगों ने इस मशीन की खासियत देखी. वहीं से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और इसके बाद ऑर्डर्स की झड़ी लग गई.

सीमा सिंह का “दोस्त बिन” सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि भारत के ग्रीन इनोवेशन (Green Innovation) की नई पहचान है. यह स्टार्टअप दिखाता है कि टेक्नोलॉजी और पर्यावरण (Technology & Environment) का मेल अगर सही दिशा में किया जाए तो छोटे-से आइडिया से भी बड़ा बदलाव संभव है. हर घर में “दोस्त बिन” लगेगा तो भारत की वेस्ट मैनेजमेंट (Waste Management) की तस्वीर जरूर बदलेगी.

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