&format=webp&quality=medium)
भारत सरकार ने देश के स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए 'स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0' (Startup India FFS 2.0) के गठन की आधिकारिक घोषणा कर दी है. 13 अप्रैल 2026 को गजट अधिसूचना जारी होने के साथ ही यह योजना प्रभावी हो गई है.
इस योजना का मकसद सिर्फ फंडिंग देना नहीं है, बल्कि एक ऐसा ढांचा तैयार करना है, जहां वेंचर कैपिटल (उद्यम पूंजी) उन क्षेत्रों तक पहुंचे जो पूंजी की कमी से जूझ रहे हैं, जैसे डीप टेक और उच्च-तकनीकी विनिर्माण.
यह योजना 10,000 करोड़ रुपये के बड़े फंड के साथ शुरू की गई है. इसकी कार्यप्रणाली 'फंड ऑफ फंड्स' मॉडल पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि यह फंड सीधे किसी स्टार्टअप में निवेश नहीं करेगा, बल्कि सेबी (SEBI) के पास पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) को पैसा देगा, जो आगे चलकर स्टार्टअप्स का चयन कर उनमें निवेश करेंगे.
सरकार ने इस बार लक्षित सहायता के लिए 4 अलग-अलग सेगमेंट बनाए हैं:
सेगमेंट-1 (DeepTech): उन स्टार्टअप्स के लिए जो जटिल इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक खोजों पर काम कर रहे हैं.
सेगमेंट-2 (Micro VC): छोटे एआईएफ को सहायता, जो शुरुआती स्तर के स्टार्टअप्स को फंडिंग देते हैं.
सेगमेंट-3 (Innovative Manufacturing): प्रौद्योगिकी-आधारित निर्माण इकाइयों को बढ़ावा देने के लिए.
सेगमेंट-4 (Sector Agnostic): सभी क्षेत्रों और चरणों के स्टार्टअप्स के लिए सामान्य फंड.
इस योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक तीन लेवल का ढांचा तैयार किया है:
मुख्य एजेंसी: भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) इस योजना की प्राथमिक कार्यान्वयन एजेंसी होगी. यह एआईएफ से प्रस्ताव प्राप्त करेगी और उनकी जांच करेगी.
समिति की भूमिका: DPIIT सचिव की अध्यक्षता में एक अधिकार प्राप्त समिति (EC) का गठन किया गया है. यह समिति योजना के प्रदर्शन की निगरानी करेगी और इसमें नीतिगत बदलावों का सुझाव देगी.
रिटर्न का उपयोग: इस फंड से होने वाली कमाई (प्रॉफिट) का 5% हिस्सा स्टार्टअप ईकोसिस्टम की ट्रेनिंग और क्षमता निर्माण पर खर्च किया जाएगा. बाकी राशि भारत के समेकित कोष (CFI) में जमा होगी.
FFS 2.0 को पिछले अनुभवों से सीखकर अधिक लचीला बनाया गया है. इसमें पूंजी प्रधान क्षेत्रों (Capital Intensive Sectors) जैसे मैन्युफैक्चरिंग के लिए बड़े कॉर्पस वाले एआईएफ को जोड़ने की व्यवस्था है. साथ ही, लंबी अवधि वाले एआईएफ को भी सपोर्ट मिलेगा ताकि स्टार्टअप्स को 'धैर्यवान पूंजी' (Patient Capital) मिल सके.
'स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0' भारत को एक 'प्रोडक्ट नेशन' बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. डीप टेक और विनिर्माण पर विशेष ध्यान देकर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारतीय स्टार्टअप्स केवल सर्विस सेक्टर तक सीमित न रहें, बल्कि वह दुनिया के लिए भविष्य की तकनीकें भी विकसित करें.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या कोई स्टार्टअप सीधे इस फंड के लिए आवेदन कर सकता है?
नहीं, स्टार्टअप्स को उन एआईएफ (AIFs) से संपर्क करना होगा जिन्हें इस स्कीम के तहत फंडिंग मिली है.
Q2 SIDBI की इस योजना में क्या भूमिका है?
सिडबी कार्यान्वयन एजेंसी है, जो एआईएफ के प्रस्तावों की जांच करती है और फंड का प्रबंधन करती है.
Q3 डीप टेक स्टार्टअप्स को इससे क्या फायदा होगा?
उनके लिए एक अलग 'सेगमेंट-1' बनाया गया है, जिससे उन्हें अधिक मात्रा में और लंबी अवधि के लिए निवेश मिल सकेगा.
Q4 क्या यह योजना पुराने फंड ऑफ फंड्स से अलग है?
हां, 2.0 वर्जन में डीप टेक और मैन्युफैक्चरिंग के लिए अलग सेगमेंट और अधिक परिचालनगत छूट दी गई है.
Q5 इस योजना की निगरानी कौन करेगा?
इसकी निगरानी DPIIT सचिव की अध्यक्षता वाली एक अधिकारप्राप्त समिति (EC) द्वारा की जाएगी.