&format=webp&quality=medium)
भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन चुका है. पिछले कुछ सालों में देश में यूनिकॉर्न की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. इस सफलता को और आगे ले जाने के लिए सरकार ने Fund of Funds के दूसरे संस्करण को हरी झंडी दिखा दी है. भारत सरकार ने देश के स्टार्टअप्स को दुनिया के शिखर पर पहुंचाने के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है.
सरकार ने 'स्टार्टअप इंडिया' अभियान को एक नई मजबूती देते हुए 'Startup India Fund of Funds 2.0' (FFS 2.0) के लिए 10,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी गई है. यह फंड उन प्रतिभाशाली उद्यमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिनके पास क्रांतिकारी आइडिया तो हैं, लेकिन उन्हें हकीकत में बदलने के लिए पर्याप्त पूंजी यानी पैसे की कमी है.
सरकार का यह निवेश सीधे तौर पर भारतीय स्टार्टअप्स की नींव को मजबूत करेगा, जिससे वह न केवल स्वदेशी बाजार में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना सकेंगे.इस योजना की सबसे खास बात यह है कि यह केवल पैसा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत में एक ऐसा निवेश तंत्र विकसित कर रही है जिससे आने वाले समय में हमें विदेशी फंडिंग पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
अक्सर देखा गया है कि भारतीय स्टार्टअप्स को बड़े होने के लिए अमेरिका या चीन जैसे देशों के निवेशकों की तरफ देखना पड़ता है, लेकिन FFS 2.0 के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि भारतीय पैसा ही भारतीय इनोवेशन को आगे बढ़ाए. यह फंड विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा जो भविष्य की तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप-टेक और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हैं, ताकि 'आत्मनिर्भर भारत' का सपना सच हो सके.
आम तौर पर जब हम सरकारी फंड की बात करते हैं, तो हमें लगता है कि सरकार सीधे हमारे बैंक खाते में पैसा भेजेगी. लेकिन 'फंड ऑफ फंड्स' का मॉडल थोड़ा अलग और बहुत स्मार्ट है. इसे एक उदाहरण से समझते हैं.
सरकार सीधे किसी एक स्टार्टअप को चुनने के बजाय, उन प्रोफेशनल कंपनियों को पैसा देती है जो स्टार्टअप्स में निवेश करने का काम करती हैं. इन कंपनियों को सेबी (SEBI) के तहत 'अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स' (AIFs) कहा जाता है. सरकार यह पैसा 'सिडबी' (SIDBI) को देती है, और सिडबी इन छोटे-छोटे वीसी (Venture Capital) फंड्स में निवेश करता है. इसके बाद, ये वीसी फंड्स बाजार से भी पैसा जुटाते हैं और फिर आपके स्टार्टअप में निवेश करते हैं. इस तरह सरकारी पैसे की मदद से बाजार में कई गुना ज्यादा पूंजी उपलब्ध हो जाती है.
यह योजना का नया और अधिक प्रभावशाली वर्जन है. 2016 में शुरू हुए पहले वर्जन की सफलता के बाद, सरकार ने इसे और बेहतर बनाया है. 2.0 का मुख्य टारगेट उन स्टार्टअप्स को मदद देना है जो रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में लगे हैं. इसके तहत 10 हजार करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी मिली है.
स्पेशल फोकस: इस बार सरकार ने एआई, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे जटिल क्षेत्रों के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया है.
ज्यादा पारदर्शिता: 2.0 वर्जन में पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी बनाया गया है ताकि छोटे शहरों (Tier 2 और Tier 3) के स्टार्टअप्स को भी बराबरी का मौका मिल सके.
घरेलू पूंजी को बढ़ावा: इसका उद्देश्य विदेशी निवेशकों के प्रभाव को कम करना और भारतीय निवेशकों को स्टार्टअप्स में पैसा लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है.
यह 10,000 करोड़ रुपये का सफर सरकार की तिजोरी से आपके स्टार्टअप तक कई चरणों में तय होता है. सरकार ने इसके लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है:
SIDBI की भूमिका: सरकार यह सारा पैसा सिडबी को सौंपती है, जो इस फंड का कस्टोडियन या मैनेजर है.
AIFs का चुनाव: सिडबी उन फंड मैनेजर्स (Venture Capitals) का चुनाव करता है जिनका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा होता है. इसके लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाती है.
पूंजी का विस्तार: अगर सरकार किसी फंड मैनेजर को 10 करोड़ रुपये देती है, तो उस मैनेजर की जिम्मेदारी होती है कि वह बाहर से भी कम से कम 10 करोड़ रुपये और जुटाए. इस तरह सरकार के 10,000 करोड़ रुपये असल में बाजार में 20,000 करोड़ रुपये या उससे भी ज्यादा की लिक्विडिटी पैदा करते हैं.
स्टार्टअप्स में निवेश: अंत में, ये फंड मैनेजर देश भर के होनहार स्टार्टअप्स की स्क्रीनिंग करते हैं और उनमें इक्विटी के बदले निवेश करते हैं.

अगर आप एक स्टार्टअप फाउंडर हैं और आप चाहते हैं कि आपको इस सरकारी योजना के तहत फंडिंग मिले, तो आपको नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करना होगा. यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी जरूर है, लेकिन यह आपके बिजनेस को एक नई पहचान देगी.
स्टेप 1: DPIIT मान्यता प्राप्त करें
सबसे पहले आपकी कंपनी को भारत सरकार के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) से मान्यता प्राप्त होनी चाहिए. इसके बिना आप किसी भी सरकारी स्टार्टअप लाभ के पात्र नहीं हैं. इसके लिए startupindia.gov.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें. वहीं अपनी कंपनी के सर्टिफिकेट और इनोवेशन की डीटेल्स जमा करें.
स्टेप 2: योग्यता की जांच करें
स्टेप 3: सही फंड (VC) की पहचान करें
जैसा कि हमने बताया, आपको सीधे सरकार के पास नहीं जाना है. सिडबी की वेबसाइट पर उन सभी फंड्स (AIFs) की लिस्ट होती है जिन्हें FFS के तहत पैसा मिला है. आपको अपनी कैटेगरी (जैसे फिनटेक, एग्रीटेक, एडुटेक आदि) के हिसाब से सही वीसी फंड चुनना होगा.
स्टेप 4: पिच डेक और बिजनेस प्लान
अब आपको इन फंड मैनेजर्स को प्रभावित करना होगा. इसके लिए एक शानदार 'पिच डेक' तैयार करें. इसमें बताएं कि आपका आइडिया क्या है, आप कौन सी समस्या हल कर रहे हैं, आपका रेवेन्यू मॉडल क्या है और आप अगले 5 साल में कंपनी को कहां देखते हैं. इसे एक शार्क टैंक पिच जैसा ही समझ लें.
स्टेप 5: ड्यू डिलिजेंस और एग्रीमेंट
अगर कोई वीसी फंड आपके आइडिया में दिलचस्पी दिखाता है, तो वह आपके दस्तावेजों की कानूनी और वित्तीय जांच करेंगे. सब कुछ सही पाए जाने पर आपके और फंड के बीच एक समझौता होगा और आपके स्टार्टअप को जरूरी फंडिंग मिल जाएगी.

Startup India Fund of Funds 2.0 भारतीय उद्यमियों के लिए एक सुनहरा अवसर है. ₹10,000 करोड़ का यह निवेश न केवल स्टार्टअप्स को वित्तीय संकट से उबारेगा, बल्कि देश में इनोवेशन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा. सरकार का यह कदम साफ तौर पर संकेत देता है कि आने वाला दशक भारत के स्टार्टअप्स का है. अगर आपके पास एक विजन है और आप मेहनत करने को तैयार हैं, तो पूंजी अब आपके रास्ते की बाधा नहीं बनेगी. बस जरूरत है सही जानकारी के साथ सही दिशा में कदम बढ़ाने की.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या मुझे यह पैसा वापस लौटाना होगा?
नहीं, यह कोई लोन नहीं है. यह एक 'इक्विटी निवेश' है, जिसमें फंड आपकी कंपनी के कुछ शेयर (हिस्सेदारी) के बदले पैसा निवेश करता है.
Q2 क्या एक बहुत छोटा स्टार्टअप (Early Stage) भी आवेदन कर सकता है?
हां, FFS 2.0 का एक बड़ा हिस्सा विशेष रूप से अर्ली-स्टेज और सीड-स्टेज स्टार्टअप्स के लिए ही रखा गया है.
Q3 क्या मुझे फंड के लिए किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने होंगे?
बिल्कुल नहीं, यह पूरी प्रक्रिया प्रोफेशनल वेंचर कैपिटल फंड्स के जरिए होती है, जो निजी संस्थानों की तरह काम करते हैं.
Q4 DPIIT सर्टिफिकेट मिलने में कितना समय लगता है?
आमतौर पर अगर आपके सभी दस्तावेज सही हैं, तो ऑनलाइन आवेदन के बाद 7 से 15 दिनों के भीतर यह सर्टिफिकेट मिल जाता है.
Q5 क्या यह फंड केवल दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों के स्टार्टअप्स के लिए है?
नहीं, सरकार का विशेष जोर टियर-2 और टियर-3 शहरों (छोटे शहरों और गांवों) के स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर है.