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सैन फ्रांसिस्को के एक फ्यूजन एनर्जी स्टार्टअप Marathon Fusion ने ऐसा दावा किया है जिसने विज्ञान और बिजनेस दोनों की दुनिया को हैरान कर दिया है. कंपनी का कहना है कि उन्होंने मरकरी यानी पारा को सोने में बदलने का तरीका खोज लिया है. यह वही तकनीक है, जिसे भविष्य में साफ और असीमित ऊर्जा का स्रोत माना जा रहा है. लेकिन अब इसने ‘अल्केमी’ यानी तत्वों को एक-दूसरे में बदलने वाली पुरानी सोच को भी साइंटिफिक हकीकत में बदलने की उम्मीद जगा दी है.
कंपनी ने एक पेपर पब्लिश किया है, जिसमें बताया गया है कि उन्होंने न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन की प्रक्रिया से यह मुमकिन किया है. इसमें किसी तत्व के नाभिक से प्रोटॉन हटाकर उसे किसी और तत्व में बदला जा सकता है. हालांकि, इस रिसर्च की अभी समीक्ष नहीं की गई है, लेकिन अमेरिका के एनर्जी डिपार्टमेंट के एक साइंटिस्ट ने इसे "रोचक और उत्साहजनक" बताया है.
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Marathon Fusion पिछले 3 सालों में करीब 6 मिलियन डॉलर की प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और 4 मिलियन डॉलर की सरकारी ग्रांट जुटा चुका है. इसका फोकस अब तक ज्यादा एफिशिएंट फ्यूजन पावर सिस्टम बनाने पर रहा है.
फिर भी अब तक वैज्ञानिक ये नहीं कर पाए हैं कि फ्यूजन प्लांट से इतनी एनर्जी निकले जिससे खुद प्लांट भी चल सके. इसके लिए सूरज जैसे माहौल की जरूरत होती है, जिसमें हाई-एनर्जी प्लाज्मा को कंट्रोल करना बेहद मुश्किल है.
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Marathon Fusion अब जिस टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है, उसमें वह फ्यूजन रिएक्टर में mercury-198 को डालते हैं, ताकि वह mercury-197 में बदले. यह रेडियोधर्मी होता है और वक्त के साथ खुद ही gold-197 में बदल जाता है- यानी शुद्ध सोना.
अगर ये तकनीक काम करती है, तो फ्यूजन प्लांट से बिजली के साथ-साथ हर साल करीब 5,000 किलो सोना भी निकाला जा सकता है. कंपनी का कहना है कि ये प्रक्रिया एनर्जी आउटपुट को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगी और फ्यूजन रिएक्टर की फ्यूल साइकिल पर भी असर नहीं होगा.
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इस "आर्टिफिशियल गोल्ड" को लेकर एक बड़ी दिक्कत है- रेडिएशन. इस प्रक्रिया में बने सोने में trace level पर रेडियोधर्मी तत्व भी हो सकते हैं. ऐसे में इसे 14 से 18 साल तक स्टोर करना पड़ सकता है ताकि वह इस्तेमाल या बिक्री के लिए सुरक्षित हो सके.
Marathon के CTO का कहना है कि यह कोई जादू नहीं, बल्कि फास्ट न्युट्रॉन रिएक्शन की सीरीज़ है जिससे बड़ी मात्रा में सोना बन सकता है, वो भी तब जब रिएक्टर का फ्यूल साइकिल भी चलता रहे.
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Marathon Fusion का कहना है कि ये तकनीक सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि और भी कई हाई-वैल्यू मटेरियल बना सकती है. इनमें मेडिकल में इस्तेमाल होने वाले isotopes, nuclear batteries के पार्ट्स और कीमती मेटल जैसे palladium भी शामिल हैं. मतलब अगर सब कुछ सही चला तो एक फ्यूजन पॉवर प्लांट डबल कमाई कर सकता है- बिजली भी और सोना भी.
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फिलहाल दुनिया भर में कई स्टार्टअप्स इस कोशिश में लगे हैं कि फ्यूजन रिएक्टर से साफ, सुरक्षित और असीमित बिजली बनाई जाए. करोड़ों डॉलर निवेश किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई भी इसे पूरी तरह से कामयाब नहीं बना पाया है.
Marathon Fusion की "सोना बनाने वाली तकनीक" अभी कागज़ों पर ही है. लेकिन अगर यह हकीकत बनी, तो यह सिर्फ एनर्जी इंडस्ट्री ही नहीं, पूरी इकॉनमी का खेल बदल सकती है. बता दें कि Marathon Fusion की रिसर्च अभी परीक्षण के स्तर पर है और वैज्ञानिक समुदाय में इसकी समीक्षा बाकी है. लेकिन जो दावा किया जा रहा है, वह किसी साइंस फिक्शन से कम नहीं है.