&format=webp&quality=medium)
भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ाया है. ओडिशा स्थित डीप-टेक स्टार्टअप Coratia Technologies के साथ नौसेना ने 66 करोड़ रुपये की डील की है. इसके तहत कंपनी अपने स्वदेशी Underwater Remotely Operated Vehicles (UWROVs) मुहैया कराएगी. बता दें कि Shark Tank India के तीसरे सीजन में भी यह स्टार्टअप आया था. वहां उन्होंने रितेश अग्रवाल से 1 फीसदी इक्विटी के बदले 80 लाख रुपये जुटाए थे.
इन अत्याधुनिक रोबोट्स का इस्तेमाल जहाजों के नीचे जमी गंदगी की सफाई, छोटे-मोटे बचाव कार्य (Salvage Operations), पानी के नीचे बने ढांचों की जांच और सर्वे के लिए किया जाएगा. खास बात यह है कि ये सिस्टम पूरी तरह से भारत में बने हैं और अब नौसेना की ताकत को और बढ़ाएंगे.
Coratia का फ्लैगशिप प्रोडक्ट है Jalasimha. इसने Technology Readiness Level-9 टेस्ट पास किया है. इसे नौसेना के ऑपरेशंस में शामिल कर लिया गया है. खासियत यह है कि यह विदेशी विकल्पों से बहुत सस्ता और असरदार है.
कंपनी की शुरुआत 2020 में हुई. इसे NIT Rourkela में इनक्यूबेट किया गया है. 2023 में कंपनी ने iDEX Challenge जीता, जो रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर में इनोवेशन को बढ़ावा देता है. अब यह कंपनी नौसेना को सीधे सप्लाई कर रही है.
स्टार्टअप के को-फाउंडर्स देवेन्द्र प्रधान (CEO) ने कहा, "यह हमारे लिए सम्मान है कि नौसेना ने हमारी तकनीक पर भरोसा जताया. यह सिर्फ हमारी उपलब्धि नहीं बल्कि भारत की रिसर्च और इनोवेशन की ताकत का सबूत है."
कंपनी के सीटीओ बिस्वजीत स्वैन बोले, "हमारा मकसद है कि भारत अब विदेशी सप्लायर्स पर निर्भर न रहे. यह तकनीक ब्लू इकॉनमी (Blue Economy) और डिफेंस प्रिपेयर्डनेस दोनों में मदद करेगी."
पहले नौसेना को पानी के नीचे निरीक्षण और जहाजों की सफाई के लिए विदेशी रोबोट्स पर निर्भर रहना पड़ता था. अब Coratia Technologies ने देश में ही ऐसे रोबोट बना लिए हैं. इससे खर्च कम होगा, तकनीक अपने कंट्रोल में रहेगी और भारत की ब्लू इकॉनमी को भी बढ़ावा मिलेगा.
Coratia Technologies का यह कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ एक स्टार्टअप की जीत नहीं बल्कि भारत की तकनीकी ताकत का प्रमाण है. यह सौदा "Make in India" के सपने को मजबूत करता है और आने वाले समय में भारत को अंडरवॉटर रोबोटिक्स के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बना सकता है.
नहीं, आजकल रोबोट्स शिक्षा, स्वास्थ्य और घरों में भी उपयोग हो रहे हैं.
हाँ, अगर उनके पास इनोवेटिव टेक्नोलॉजी और प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट हो तो.
नहीं, ये डैम, पाइपलाइन और एनर्जी प्रोजेक्ट्स में भी काम आते हैं.
जी हाँ, खासकर डिफेंस और इंडस्ट्रियल सेगमेंट में.
विदेशी टेक्नोलॉजी महंगी होती है, लेकिन भारतीय डिजाइन सस्ता है.
हाँ, iDEX जैसी स्कीम्स इन्हें बढ़ावा देती हैं.
जी हाँ, इन्हें कठोर टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन से गुजरना पड़ता है.
हाँ, इनकी ग्लोबल डिमांड लगातार बढ़ रही है.
हाँ, मेंटेनेंस और इम्पोर्ट कॉस्ट दोनों घटेंगे.
जी हाँ, मौजूदा रफ्तार और निवेश को देखते हुए यह संभव है.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)