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Shark Tank India 5: शार्क टैंक इंडिया में हाल ही में एक ऐसा स्टार्टअप आया, जिसने असली रुद्राक्ष बेचने का दावा किया. फाउंडर ने जब पिच शुरू की, तो शायद किसी भी शार्क को नहीं लग रहा था कि यह बिजनेस कितना बड़ा हो सकता है. लेकिन फाउंडर ने बहुत ही छोटी सी पिच दी और उसी बीच ये कह डाला कि इस साल वह 60 करोड़ का रेवेन्यू करेंगे. ये सुनते ही सारे शार्क हैरान रह गए. नमिता ने तो यहां तक कह दिया- 'आपको ज्यादा बोलना भी नहीं पड़ा.. 60 करोड़.. काम खत्म.'
इस स्टार्टअप का नाम है 'जपं', जो असली रुद्राक्ष बेचने का दावा करता है. इसकी शुरुआत की है मोहाली की रहने वाले रितोबन चक्रबर्ती (Ritoban Chakrabarti) ने. यह बिजनेस दिसंबर 2022 में शुरू हुआ था. फाउंडर ने दावा किया कि लोग पवित्र रुद्राक्ष कई वजहों से धारण करते हैं, लेकिन अगर इसे खरीदते वक्त इंसान का पहला सवाल ये आता है कि क्या ये असली है? तो कुछ तो गड़बड़ है. फाउंडर ने दो रुद्राक्ष दिखाकर सभी शार्क से पूछा भी कि कौन सा असली है.
जपं एक स्पिरिचुअल वीयरेबल ब्रांड है, जो रुद्राक्ष समेत कई स्पिरिचुअल बीड्स से वीयरेबल चीजें बनाता है. फाउंडर ने कहा कि ग्राहकों का इस ब्रांड पर भरोसा इतना ज्यादा है कि कंपनी इस साल 60 करोड़ रुपये का रेवेन्यू करेगी. बता दें कि शार्क टैंक की पिच के दौरान इंस्टाग्राम पर इस स्टार्टअप के 2.1 लाख फॉलोअर्स थे, जो 18 जनवरी 2026 तक बढ़कर 2.43 लाख हो गए हैं. कंपनी के पास करीब 12 लाख से ज्यादा ग्राहक हैं.
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फाउंडर ने रुद्राक्ष के पीछे की कहानी भी बताई. उन्होंने कहा- 'शिव पुराण के अनुसार शिवजी ने घोर तपस्या के बाद जब अपनी आंखें खोलीं, जो उनकी आंखें छलक उठीं. जहां-जहां उनके आंसू गिरे, वहां-वहां एक अनोखे पेड़ ने जन्म लिया. रुद्राक्ष. रुद्र यानी महादेव और अक्ष यानी आंसू.'
फाउंडर ने बताया कि असली रुद्राक्ष की तलाश में उन्हें कई वेंडर्स और लैब्स तक को रिजेक्ट भी करना पड़ता है. यह स्पेस पूरी तरह अनऑर्गेनाइज्ड है, ऐसे में नकली होने के चांस बहुत हैं. कई लोग लकड़ी या प्लास्टिक से नकली रुद्राक्ष बनाकर बेचते हैं. असली रुद्राक्ष को कई लैब्स में टेस्ट कराया जाता है, जब पता चलता है कि वह असली है, तभी हम इसे आगे बेचते हैं.
असली रुद्राक्ष चेक करने के कुछ तरीके भी फाउंडर ने बताए.
पहला तरीका है स्पेक्ट्रोस्कोपी (Spectroscopy) होता है, जिसके तहत रुद्राक्ष से लाइट पास कर के उसके असली या नकली होने की जांच की जाती है.
दूसरा तरीका है यूवी यानी अल्ट्रावाइलेट रेज़ के जरिए टेस्टिंग.
तीसरा तरीका है माइक्रोस्कोप से टेस्ट करना.
इन टेस्टिंग से ये देखा जाता है कि उसमें कटिंग कैसी है, डिजाइन कैसा है और काफी बारीकी से चेक करने के बाद ये पता चल जाता है कि वह कितने असली हैं.
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जब फाउंडर से नमिता ने पूछा कि अभी मार्केट में कई प्लेयर हैं जो आपके सामने कॉम्पटीशन की तरह आ रहे हैं, तो आप क्या करेंगे. ऐसे में फाउंडर ने कहा कि उन्हें कॉम्पटीशन अच्छा लगता है, इससे मार्केट और ज्यादा बढ़ता है. कॉम्पटीशन कई तरह की स्पिरिचुअल सर्विस में आए, जिनके आने की वजह से जपं की सेल्स भी खूब बढ़ी. कई तरह के इंट्रेस्टिंग डिजाइन बनाकर ये स्टार्टअप यंग जनरेशन को भी आकर्षित करता है.
कंपनी की कुल सेल का 40 फीसदी हिस्सा तो सिर्फ रुद्राक्ष से आता है. वहीं बाकी का 60 फीसदी रेवेन्यू कारुंगली, एनर्जी स्टोन और स्पिरिचुअल ज्वैलरी से आता है. कंपनी के करीब 250 एसकेयू हैं. कंपनी मार्केटिंग पर करीब 40 फीसदी खर्च करती है. अभी कंपनी का ग्रॉस मार्जिन 80 फीसदी है.
कंपनी ने वित्त वर्ष 2022-23 में 88 लाख की सेल की थी. 2023-24 में कंपनी ने 12 करोड़ रुपये कमाए. अगले साल 18 करोड़ रुपये का बिजनेस किया. वहीं इस साल अक्टूबर तक कंपनी 25.5 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कर चुकी है और इस साल 60 करोड़ रुपये की नेट सेल्स का अनुमान है. इस साल EBITDA 20 फीसदी के करीब रहेगा.
फाउंडर ने शार्क टैंक के मंच पर जजों से 1 फीसदी इक्विटी के बदले 1.5 करोड़ रुपये मांगे. यानी इस हिसाब से कंपनी का वैल्युएशन हो जाता है 150 करोड़ रुपये. अभी तक कंपनी दिसंबर-जनवरी 2023 में कंपनी ने फ्रेंड्स एंड फैमिली से 40 लाख रुपये जुटाए हैं. विराज, विनीता और कुणाल इस डील से बाहर रहे. हालांकि, नमिता और वरुण ने साथ मिलकर ऑफर दिया. उनका फाइनल ऑफर था 1.5 करोड़ 1 फीसदी इक्विटी के बदले और 1 फीसदी रॉयल्टी, जिस पर डील फाइनल हो गई.
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‘जपं’ की कहानी बताती है कि भरोसा और प्रामाणिकता आज के बिजनेस की सबसे बड़ी ताकत है. अनऑर्गेनाइज्ड और धोखे से भरे स्पिरिचुअल मार्केट में असलीपन को ब्रांड बनाकर इस स्टार्टअप ने न सिर्फ ग्राहकों का दिल जीता, बल्कि शार्क्स को भी इंप्रेस कर दिया. यह स्टार्टअप दिखाता है कि स्पिरिचुअलिटी भी स्केलेबल बिजनेस बन सकती है.
जपं असली रुद्राक्ष और स्पिरिचुअल बीड्स से बने वीयरेबल प्रोडक्ट्स बेचता है.
इस स्टार्टअप की शुरुआत दिसंबर 2022 में हुई थी.
स्पेक्ट्रोस्कोपी, यूवी टेस्ट और माइक्रोस्कोप जांच के जरिए.
इस साल कंपनी करीब 60 करोड़ रुपये का रेवेन्यू करने का दावा कर रही है.
1.5 करोड़ रुपये के बदले 1% इक्विटी और 1% रॉयल्टी पर डील फाइनल हुई.
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