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Shark Tank India 5: शार्क टैंक इंडिया के मंच पर कभी-कभी कुछ ऐसा होता है, जिसे देखकर हैरानी हो जाती है. कुछ ऐसा ही हुआ, जब शार्क टैंक पहुंचा स्टार्टअप 3 Sisters. सबसे पहले तो सभी शार्क हैरान हो गए कि ऑटो रिक्शा मंच पर कैसे आ गया. फिर जब उसमें से 4 मेल फाउंडर निकले, तो फिर सब हैरान हो गए कि ये तो सारे लड़के हैं. जज बोले- हमारे साथ धोखा हुआ है.
इस स्टार्टअप की शुरुआत की है मनीष कनुंगा, निमिश सोलंकी, अक्षय सोलंकी और संजय प्रसाद बारी ने. मुंबई का ये स्टार्टअप बेवरेज बनाता है, जिसे फाउंडर्स संस्कारी नॉन एल्कोहलिक बेवरेज कहते हैं. कंपनी अभी तक 50 लाख से भी ज्यादा यूनिट बेच चुकी है. यह स्टार्टअप 3 फ्लेवर के साथ शुरू हुआ था, यही वजह है कि फाउंडर्स ने इस बिजनेस का नाम 3 सिस्टर्स रखा.
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इस स्टार्टअप की कहानी शुरू होती है 2006 से, जब संजय बनारस से मुंबई आए. उन्होंने रिक्शा चलाना शुरू किया, फिर सोडा पॉप स्टॉल की शुरुआत की. धीरे-धीरे उन्होंने 12 सोडा पॉप स्टॉल शुरू कर लिए. उनसे इतने पैसे कमाए कि मैन्युफैक्टरिंग प्लांट ही शुरू कर दिया. उसी प्लांट में एक दिन संजय से मिलने पहुंचे बाकी 3 फाउंडर्स और फिर हुई इस स्टार्टअप की शुरुआत.
निमिश और अक्षय सिबलिंग हैं, जो राजस्थान के जालौर से हैं. वहीं मनीष इनके चचेरे भाई है. 2016 में मनीष और अक्षय ने मिलकर बेवरेज इंडस्ट्री में कदम रखा. कोविड के दौरान संजय के साथ मिलकर भी उन्होंने काम किया. आखिरकार उन्होंने 2021 में संजय के साथ मिलकर नई कंपनी की ही शुरुआत कर दी. 2022 से कंपनी ने अपने ऑपरेशन शुरू कर दिए.
इस स्टार्टअप ने 2022-23 में 2.35 करोड़ रुपये का बिजनेस किया. अगले साल कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर 6.34 करोड़ हो गया. अगले साल यानी 2024-25 में कंपनी की सेल्स 11.89 करोड़ रुपये हो गई. इस साल सितंबर तक कंपनी 10.66 करोड़ रुपये का बिजनेस कर चुकी है और टारगेट है कि इस साल 27-28 करोड़ रुपये का रेवेन्यू रहेगा. बता दें कि इस कमाई में कंपनी के ब्रांड रेवेन्यू के साथ-साथ कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग की कमाई भी शामिल है.
सबसे पहले तो सभी शार्क को इस बेवरेज की कीमत थोड़ी ज्यादा लगी. वहीं नमिता को कैमिकल जैसा कुछ टेस्ट आया. जजों को यह भी ठीक नहीं लगा कि छोटे से बिजनेस में ही फाउंडर्स ने बहुत सारे फ्लेवर लॉन्च कर दिए हैं. यहां तक कि इसमें कई ब्रांड भी लॉन्च कर दिए, जो दिखाता है कि फोकस क्लीयर नहीं है.
फाउंडर्स ने अपने स्टार्टअप की 2.5 फीसदी इक्विटी के बदले 3 करोड़ रुपये की फंडिंग मांगी. इस कंपनी में 42 फीसदी हिस्सेदारी संजय के पास है. वहीं बाकी सभी को-फाउंडर्स के पास 16-16 फीसदी हिस्सेदारी है. फाउंडर्स को बिजनेस की कमाई और मुनाफा तो खूब पसंद आया, टीम भी अच्छी लगी, लेकिन फिर भी एक ब्रांड पर फोकस ना होने की वजह से किसी भी जज ने इसमें पैसे नहीं लगाए.
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3 Sisters स्टार्टअप की कहानी दिखाती है कि सिर्फ अच्छी सेल्स और ग्रोथ ही फंडिंग की गारंटी नहीं होती. शार्क्स ने टीम और बिजनेस की सराहना की, लेकिन ब्रांड फोकस, प्राइसिंग और प्रोडक्ट क्लैरिटी की कमी बड़ी कमजोरी बन गई. स्टार्टअप्स के लिए यह बड़ा सबक है कि ग्रोथ के साथ स्पष्ट रणनीति भी उतनी ही जरूरी है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 3 Sisters स्टार्टअप क्या बनाता है?
A. यह एक संस्कारी नॉन-अल्कोहलिक बेवरेज ब्रांड है जो अलग-अलग फ्लेवर के ड्रिंक्स बनाता है.
Q2 शार्क टैंक में इनकी एंट्री खास क्यों थी?
A. क्योंकि फाउंडर्स ऑटो रिक्शा में मंच पर पहुंचे, जिससे सभी शार्क हैरान रह गए.
Q3 कंपनी का रेवेन्यू कितना है?
A. कंपनी ने 2022-23 में 2.35 करोड़, 2023-24 में 6.34 करोड़ और 2024-25 में करीब 11.89 करोड़ रुपये का बिजनेस किया.
Q4 शार्क्स ने इस स्टार्टअप में निवेश क्यों नहीं किया?
A. ऊंची कीमत, ज्यादा फ्लेवर, और एक ब्रांड पर फोकस की कमी मुख्य कारण रहे.
Q5 फाउंडर्स ने कितनी फंडिंग मांगी थी?
A. फाउंडर्स ने 2.5% इक्विटी के बदले 3 करोड़ रुपये की फंडिंग मांगी थी.