Shark Tank India 5: आपके दूध में भी 'जहर' तो नहीं! चुटकी में होगा चेक, कीमत भी है मामूली, फिर क्यों नाराज हो गए जज?

Shark Tank India 5 में आए Paper Pro स्टार्टअप ने दूध में मिलावट पहचानने की 40 रुपये की टेस्टिंग किट पेश की. मुजफ्फरनगर के ध्रुव द्वारा शुरू किए गए इस स्टार्टअप ने 70% दूध के मिलावटी होने का दावा किया. हालांकि इनोवेशन के बावजूद कैपटेबल, टीम स्ट्रक्चर और सैलरी को लेकर शार्क्स नाराज दिखे और डील नहीं हो पाई.
Shark Tank India 5: आपके दूध में भी 'जहर' तो नहीं! चुटकी में होगा चेक, कीमत भी है मामूली, फिर क्यों नाराज हो गए जज?

Shark Tank India 5: पहले के वक्त में तो दूध में सिर्फ पानी मिलाया जाता था, लेकिन आज के वक्त में दूध में कई तरह की मिलावट हो रही है. अब दूध में डिटर्जेंट, यूरिया समेत कई तरह के कैमिकल भी मिलाए जा रहे हैं, ताकि नकली दूध को भी असली जैसा दिखाया जा सके. अब सवाल ये है कि आखिर पता कैसे चलेगा कि दूध असली है या नकली. इसी समस्या को सॉल्व करता है स्टार्टअप Paper Pro, जो शार्क टैंक इंडिया के पांचवे सीजन में फंडिंग मांगने पहुंचा.

पेपर प्रो की शुरुआत 2024 में मुजफ्फरनगर के रहने वाले ध्रुव ने की है. उन्होंने दावा किया कि भारत में मिल रहा 70 फीसदी दूध जहर बन चुका है. फाउंडर ने एक छोटा सा कार्ड बनाया है, जिसकी मदद से आप दूध में कई तरह की मिलावट का पता लगा सकते हैं. उन्होंने तमाम जजों को दो तरह के दूध और टेस्टिंग किट भी दी.

पता चलेगा दूध में कौन-कौन सी हैं मिलावट

Add Zee Business as a Preferred Source

इस किट से ये पता चलता है कि दूध में किस तरह की मिलावट है और कितनी मिलावट है. अगर कोई बदलाव ना हो, तो इसका मतलब दूध में कोई मिलावट नहीं है. फाउंडर ने कहा कि उन्होंने तमाम मार्केट जाकर रिसर्च के बाद इसे बनाया है. मिलावट का सबसे ज्यादा डर उस दूध में होता है, जो खुले में बिकता है. उन्होंने ये भी दावा किया कि महाराष्ट्र का 85 फीसदी दूध मिलावटी है. वहीं राजस्थान के 97 फीसदी दूध में मिलावट होने का दावा किया.

40 रुपये है किट की कीमत

मुजफ्फरनगर से ही ध्रुव ने अपनी स्कूलिंग की. इसके बाद ग्रेजुएशन के लिए वह देहरादून चले गए. पढ़ाई के दौरान उन्हें दूध में मिलावट का पता चला. यह बहुत ज्यादा एक्युरेट इंफोर्मेशन देते हैं. बी2बी मार्केट के लिए अलग-अलग तरह के किट बनाए जाते हैं. बता दें कि इस किट की कीमत 40 रुपये है, जिससे दूध की प्योरिटी चेक की जा सकती है.

पारुल ने बनाई है किट, पर बेहद कम मिल रही सैलरी

सीटीओ पारुल ने इसे अपनी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए बनाया है. पारुल की सैलरी 30 हजार रुपये है और उनके पास 5 फीसदी ESOP है. ये सुनते ही जज नाराज हो गए और बोले कि जिसने ये टेक्नोलॉजी बनाई है, उसे आप मामूली सैलरी दे रहे हैं, जबकि वह सबसे जरूरी इंसान हैं इस बिजनेस में. फाउंडर ने कहा कि पारुल के आने से पहले ही वह प्रोटोटाइप बना चुके थे.

कितना है कंपनी का रेवेन्यू?

वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 5.7 लाख रुपये की सेल की. इस साल कंपनी अभी तक करीब 22 लाख रुपये की सेल कर चुकी है. इस पूरे साल कंपनी का टारगेट . इसमें 80 फीसदी रेवेन्यू बी2बी से आता है. यह कलेक्शन सेंटर को बेचे जाते हैं. अभी पब्लिक इसे बहुत कम इस्तेमाल कर रही है.

क्या है कंपनी का फ्यूचर प्लान?

जब जजों ने पूछा कि आखिर उन्होंने इसका नाम पेपर प्रो क्यों रखा, मिल्क प्रो क्यों नहीं, क्या आगे का कुछ और प्लान है? तो फाउंडर ने बताया कि पनीर टेस्टिंग किट कंपनी बना चुकी है, घी टेस्टिंग किट बन रही है और शहद की टेस्टिंग किट बनाने की तैयारी भी चल रही है.

कैपटेबल पर खफा हुए जज

जब फाउंडर से कंपनी के कैपटेबल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जो जवाब दिया, उसने जजों को खफा कर दिया. उन्होंने बताया कि इस बिजनेस में उनके एक को-फाउंडर है, जिनका नाम है रजत. बता दें कि शार्क टैंक में रजत जैन अपनी ईसीजी मशीन स्पंदन लेकर आए थे, जिनका जिक्र होते ही जजों को याद आ गया. ध्रुव ने बताया कि इस कंपनी में रजत की 50 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसे सुनते ही जज नाराज हो गई कि इतनी बड़ी हिस्सेदारी होने के बावजूद वह शार्क टैंक में साथ क्यों नहीं आए. बता दें कि इस बिजनेस में 3 लाख रुपये रजत ने लगाए हैं और 2 लाख रुपये ध्रुव ने लगाए हैं.

कितनी फंडिंग मांगी, कितनी मिली?

फाउंडर ने अपने स्टार्टअप की 5 फीसदी इक्विटी के बदले 1 करोड़ रुपये की फंडिंग मांगी. मोहित ये कहते हुए बाहर हो गए कि एक पार्ट टाइम फाउंडर के पास 50 फीसदी इक्विटी है और वो यहां नहीं हैं, बिजनेस उन्हें समझ नहीं आया और वह बाहर हो गए. कनिका ने कहा कि उन्हें ये स्पेस समझ ही नहीं आता. वहीं अमन ने कहा कि वह पारुल के साथ गलत कर रहे हैं. कुणाल बहल ने बिजनेस मॉडल पर कुछ सवाल हुए, जिसमें सबसे बड़ी नाराजगी कैपटेबल पर जताई गई. अनुपम मित्तल ने शुरुआत में तो ऑफर दे दिया, लेकिन आखिरकार उन्होंने ऐसा ऑफर दिया, जिस पर डील नहीं हुई.

Conclusion

Paper Pro ने Shark Tank India 5 में एक गंभीर समस्या—दूध में मिलावट—का सस्ता और आसान समाधान पेश किया. इनोवेशन और सोशल इम्पैक्ट के बावजूद कमजोर कैपटेबल, पार्ट-टाइम को-फाउंडर और CTO के साथ ट्रीटमेंट ने निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया. यह पिच दिखाती है कि अच्छा आइडिया तभी स्केल करता है, जब टीम, इक्विटी और गवर्नेंस भी मजबूत हों.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. Paper Pro क्या करता है?

यह स्टार्टअप दूध में मिलावट पहचानने के लिए पेपर-आधारित टेस्टिंग किट बनाता है.

Q2. किट की कीमत कितनी है?

एक किट की कीमत करीब 40 रुपये है.

Q3. क्या यह आम लोग भी इस्तेमाल कर सकते हैं?

हां, लेकिन फिलहाल 80% रेवेन्यू B2B से आता है.

Q4. Shark Tank में डील क्यों नहीं हुई?

कैपटेबल, पार्ट-टाइम को-फाउंडर और CTO की सैलरी को लेकर शार्क्स असंतुष्ट थे.

Q5. कंपनी आगे क्या बनाने वाली है?

पनीर, घी और शहद की टेस्टिंग किट पर काम चल रहा है.

(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)

  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6