Shark Tank India 5:स्पेस के पास खड़ा रहेगा ये Drone, पलक झपकते दुश्मन को करेगा नेस्तनाबूत, नहीं पकड़ पाएगा रडार!

Shark Tank India 5 में Kalam Labs ने near-space aerial vehicle ड्रोन पेश किया, जो रडार और एंटी-ड्रोन सिस्टम से बचकर सर्विलांस और स्ट्राइक मिशन कर सकता है. लखनऊ आधारित यह डिफेंस-टेक स्टार्टअप भारतीय सेना के साथ काम कर रहा है. अमन गुप्ता ने 2 करोड़ रुपये में 1.25% इक्विटी लेकर डील फाइनल की.
Shark Tank India 5:स्पेस के पास खड़ा रहेगा ये Drone, पलक झपकते दुश्मन को करेगा नेस्तनाबूत, नहीं पकड़ पाएगा रडार!

Shark Tank India 5: हर बार की तरह इस बार भी शार्क टैंक में स्पेस टेक्नोलॉजी पर काम करने वाला एक स्टार्टअप आया. इस स्टार्टअप का नाम है Kalam Labs, जिसकी शुरुआत 2021 में लखनऊ के अहमद फराज, सशक्त त्रिपाठी (कोटा, राजस्थान) और हर्षित अवस्थी (कानपुर) ने की है. फाउंडर्स ने शो पर आते ही कहा कि आज स्काई इज नॉट द लिमिट. यह स्टार्टअप खास तरह के छोटे एयरक्राफ्ट बनाता है, जिन्हें नीयर स्पेस एरियल व्हीकल कहा जाता है. इस ऊंचाई को Stratospheric लेवल कहते हैं.

यह स्टार्टअप सर्विलांस मिशन से स्ट्राइक तक करने वाले व्हीकल बना रहा है. इस लैब में नीयर स्पेस एरियल व्हीकल बनाए जा रहे हैं. यह स्पेस के इतना नजदीक हैं कि इन्हें रडार पर देख पाना लगभग नामुमकिन हैं. वहीं इनका साइज एक चील जितना छोटा होता है, जिसकी वजह से इन्हें एंटी ड्रोन सिस्टम से गिरा पाना भी मुमकिन नहीं है. स्टार्टअप ने इसका पेटेंट भी फाइल किया हुआ है.

लागत ड्रोन जितनी, ताकत मिनी फाइटर जेट जैसी

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फाउंडर्स ने दावा किया कि इनकी लागत एक ड्रोन जितनी है और ताकत एक मिनी फाइटर जेट जैसी है. इनसे दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकता है. आज के वक्त में ड्रोन वॉरफेयर तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में देश को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे व्हीकल की जररूत है, जो धरती से ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से भी निगरानी कर सकें.

बिट्स-पिलानी में हुई को-फाउंडर्स की मुलाकात

सभी को-फाउंडर्स ने बिट्स पिलानी से पढ़ाई की है. वहीं पर फर्स्ट ईयर में एक्स्ट्रा क्लास में तीनों की मुलाकात हुई. तीनों की ही स्पेस में बहुत ज्यादा दिलचस्पी भी. ऐसे में उन्होंने मिलकर स्पेस का लर्निग प्लेटफॉर्म बनाया, जो स्पेस का मेटावर्स जैसा था. शुरुआती 6 महीनों में ही वह इस स्टार्टअप को 1.5 करोड़ रुपये रेवेन्यू तक ले गए. उन्होंने दो राउंड की फंडिंग भी उठाई. पहली 2.4 करोड़ रुपये की और दूसरी 11.13 करोड़ रुपये की.

तिरंगा भेजा स्पेस में

हालांकि, कुछ वक्त बाद ये समझ आया कि पैरेंट्स की डिमांड थी कोर्सेस को लेकर, लेकिन वह ऐसा नहीं करना चाहते थे तो निवेशकों से बात की. ऐसे में उन्होंने एक बार फिर सोचा कि क्यों ना कि अपने खुद के स्पेस मिशन लॉन्च करें. ऐसे में करीब 2 साल पहले उन्होंने भारत का झंडा स्पेस में लॉन्च किया. इसके लिए उन्होंने रितिक रोशन की एक फिल्म के साथ पार्टनरशिप की थी.

खास तरह के बलून से लॉन्च होते हैं ये ड्रोन

इनके लिए एक खास तरह के बलून का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें डॉ. होमी भाभा और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल ने बनाया है. इसकी मदद से 30-40 किलोमीटर तक की रेंज में जाकर अपने पेलोड को डिप्लॉय किया. अब तक यह स्टार्टअप करीब 60 लॉन्च कर चुका है.

थर्मल इंजन नहीं, तो थर्मल डिटेक्शन मिसाइल हो जाती हैं बेकार

जब ये इतनी ऊंचाई से ड्रॉप किए जाते हैं तो वह फाइटर जेट की तरह मिमिक करते हैं. इनमें गोला-बारूद भी रखा जा सकता है, जो दुश्मन के इलाके में घुसकर बड़ा हमला कर सकता है. इसमें कोई इंजन नहीं यानी थर्मल डिटेक्शन वाली मिसाइल इसे गिरा नहीं सकती. बेहद छोटा है तो एंटी ड्रोन सिस्टम इसे पकड़ नहीं पाता. अभी ये स्टार्टअप आर्मी के साथ मिलकर भी काम कर रही है.

0.2 मीटर की है एक्युरेसी

चीन में इस पर खूब काम हो रहा है, लेकिन भारत में अभी इस पर कोई काम नहीं हो रहा है. फाउंडर्स का दावा है कि भारत में इस तरह का काम करने वाला यह पहला स्टार्टअप है. उन्होंने ये भी कहा कि इन ड्रोन की एक्युरेसी 0.2 मीटर है. यानी बहुत अच्छी एक्युरेसी के साथ ये ड्रोन हमला कर सकता है.

कितना कमा रही है ये कंपनी?

अभी कंपनी के पास करीब 1 करोड़ रुपये के ऑर्डर फाइनल हो रहे हैं. इसके अलावा आर्मी के साथ बात चल रही है, जहां से करीब 150 करोड़ रुपये ऑर्डर की उम्मीद है. फाउंडर्स ने कहा कि लॉकहीड मार्टीन से भी बड़ी कंपनी बनाना चाहते हैं.

फाउंडर्स ने मांगा 300 करोड़ का वैल्युएशन

स्टार्टअप के लिए को-फाउंडर्स ने 0.67 फीसदी इक्विटी के बदले 2 करोड़ रुपये की फंडिंग मांगी. अभी तक 32 फीसदी इक्विटी निवेशकों को दी है. बाकी सारा स्टेक तीनों को-फाउंडर्स के बीच बराबर-बराबर बंटा हुआ है. मोहित और कुणाल तो डील से बाहर हो गए, लेकिन अनुपम, अमन और नमिता ने 2 फीसदी इक्विटी के बदले 2 करोड़ रुपये का ऑफर दिया.

आखिरकार अमन गुप्ता को मिली डील

फाउंडर्स ने एक काउंटर ऑफर दिया, जिसके बाद नमिता ने खुद को डील से आउट कर दिया. इसके बाद अमन और अनुपम के बीच इस स्टार्टअप में पैसे लगाने की रेस लगी और आखिरकार अमन गुप्ता ने 1.25 फीसदी इक्विटी के बदले 2 करोड़ रुपये का ऑफर दिया, जिसे फाउंडर्स ने स्वीकार कर लिया.

Conclusion

Kalam Labs ने दिखा दिया कि भारत में भी अत्याधुनिक डिफेंस और स्पेस टेक्नोलॉजी पर काम हो रहा है. near-space ड्रोन की यह तकनीक न सिर्फ युद्ध रणनीति बदल सकती है, बल्कि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बना सकती है. Shark Tank India 5 में अमन गुप्ता की डील इस स्टार्टअप पर मजबूत भरोसे को दिखाती है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. Kalam Labs क्या बनाता है?

Kalam Labs near-space aerial vehicles बनाता है, जो सर्विलांस और स्ट्राइक मिशन दोनों में इस्तेमाल हो सकते हैं.

2. ये ड्रोन रडार से कैसे बचते हैं?

इनमें इंजन नहीं होता, साइज बहुत छोटा होता है और ये near-space ऊंचाई पर काम करते हैं, जिससे रडार और थर्मल डिटेक्शन फेल हो जाता है.

3. Kalam Labs की स्थापना कब हुई?

इस स्टार्टअप की शुरुआत 2021 में अहमद फराज, सशक्त त्रिपाठी और हर्षित अवस्थी ने की थी.

4. Shark Tank India में किसने निवेश किया?

अमन गुप्ता ने 2 करोड़ रुपये के बदले 1.25% इक्विटी लेकर डील फाइनल की.

5. क्या Kalam Labs भारतीय सेना के साथ काम कर रहा है?

हां, कंपनी भारतीय सेना के साथ बातचीत और प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है और बड़े ऑर्डर की उम्मीद है.

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