Shark Tank India-4: रिंग से पेमेंट का Startup, अमन बोले- 'बच्चे आते-जाते रहते हैं, मिलते हैं फिर मार्केट में'

Shark Tank India-4: इस स्टार्टअप की शुरुआत की है मुंबई के रहने वाले विजय वासुदेव खूबचंदानी, महक सावला, और कार्तिक मेनन ने. यह स्मार्ट रिंग बिना किसी चार्ज के भुगतान करने का एक आसान और नया तरीका है.
Shark Tank India-4: रिंग से पेमेंट का Startup, अमन बोले- 'बच्चे आते-जाते रहते हैं, मिलते हैं फिर मार्केट में'

Shark Tank India-4: जरा सोच कर देखिए.. आप बिना वॉलेट या फोन के घर से बाहर निकले हैं. यानी आपके पास ना कैश या कार्ड है और ना ही यूपीआई करने के लिए फोन है. ऐसे में भी आप बिना किसी परेशानी के पेमेंट्स कर रहे हैं, जैसे कोई जादू हो. कुछ ऐसा ही जादू दिखाने वाला स्टार्टअप पहुंचा शार्क टैंक इंडिया के चौथे सीजन (Shark Tank India Season 4) में. इस स्टार्टअप (Startup) का नाम है सेवेन (7) रिंग, जो स्मार्ट रिंग बनाता है.

इस स्टार्टअप की शुरुआत की है मुंबई के रहने वाले विजय वासुदेव खूबचंदानी, महक सावला, और कार्तिक मेनन ने. यह स्मार्ट रिंग बिना किसी चार्ज के भुगतान करने का एक आसान और नया तरीका है. 7 साल की मेहनत और कड़ी कोशिशों के बाद, 7 रिंग अब पेमेंट की दुनिया में बदलाव लाने के लिए तैयार है.

रिंग को नहीं करना पड़ता चार्ज

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यह रिंग यूपीआई लाइट पर चलती है, जिसके लिए किसी बैंक अकाउंट से लिंक करने की जरूरत नहीं होती. रिंग के साथ एक मोबाइल वॉलेट मिलता है, जिससे यह लिंक होती है. इस रिंग को चार्ज भी करने की जरूरत नहीं होती है, ना ही फोन से पेयर करने की जरूरत होती है. इसे मेट्रो ट्रेन कार्ड की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

इस रिंग को पहनने के बाद जब आपको पेमेंट करनी होती है तो मुट्ठी बांधकर टैप करना होता है, खुले हाथ से पेमेंट नहीं होगी. विजय बताते हैं कि उन्होंने इस रिंग को बनाने की प्रेरणा एप्पल वॉच से ली. देखा कि टेक्नोलॉजी तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में भविष्य में रिंग से भुगतना का बड़ा मार्केट हो सकता है.

3 वैरिएंट की रिंग हैं

अभी कंपनी के पास इस रिंग के 3 वैरिएंट हैं और सभी का पेटेंट भी है उनके पास. यह सारी रिंग मेड इन इंडिया हैं. कंपनी इसका कच्चा माल बाहर से लेते हैं और उसके बाद मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली खुद ही करते हैं. ऐप भी कंपनी ने खुद ही डेवलप किया है. इसमें एक एंटीना है, जो एक खास फ्रीक्वेंसी पर काम करता है. मास्टर कार्ड, रुपे और वीजा सबके लिए अलग-अलग होती है.सभी के साथ कंपनी ने अलग-अलग वेरिफिकेशन भी कराई है.

क्या हैं इन रिंग के दाम?

इस रिंग को चार्ज करने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि यह एनएफसी पर काम करती है. यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के जरिए काम करता है. जैसे ही इसे टैप किया जाता है, यह डिवाइस से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के जरिए चार्ज ले लेता है और पेमेंट हो जाती है. इस रिंग के तीन वैरिएंट हैं, जो 1500, 4500 और 27,000 रुपये के हैं. 17 हजार रुपये वाली रिंग 18 कैरेट सोने की बनी हुई है. रिंग से पेमेंट करने पर लोगों को कुछ कैशबैक भी मिलता है.

अमन बोले- मिलते हैं फिर मार्केट में

पिच के दौरान अनुपम ने कहा कि यहां एक बोट भी है, जो आपकी कॉम्पटीटर है. ऐसे में विजय ने कहा कि इस मार्केट में कई लोग रह सकते हैं. वहीं इस पर जब अमन से बात की तो उन्होंने कहा कि हेल्थ रिंग तक तो वह जानते हैं, लेकिन रिंग से पेमेंट उन्होंने भी पहली बार सुना है. वहीं अमन ने विजय से कहा- 'थोड़ा तेज भागो विजय, मिलते हैं फिर मार्केट में.' इससे पहले सेट पर आते ही स्टार्टअप को देखकर अमन ने कहा था- 'बच्चे आते-जाते रहते हैं'

2017 में शुरू की थी कंपनी

विजय ने 2005 में सिटीबैंक में जॉब की थी. उसके बाद 2012 में एक स्टार्टअप शुरू किया, जिसे कुछ वक्त बाद बंद कर दिया. 2017 में उन्होंने सेवेन की शुरुआत की. 2018 में उन्होंने कंपनी इनकॉरपोरेट की. 2019 में पहला पेटेंट मिला. 2020 में मास्टरकार्ड से पूरी दुनिया में पेमेंट के लिए सर्टिफिकेशन लिया.

इसके बाद 15 अगस्त 2021 को सेवन रिंग को लॉन्च करने का प्लान था, लेकिन उससे पहले ही मास्टर कार्ड को सरकार ने कुछ वजहों से बैन कर दिया. इसकी वजह से बिजनेस शुरू होने से पहले ही ठप हो गया. 1.5 साल तक कंपनी बंद रही. उस दौरान फाउंडर्स अपने नेटवर्क के दूसरे फाउंडर्स को वेब3 की कोडिंग कर के देते रहे और पैसे कमाते रहे.

सितंबर 2023 में किया प्रोडक्ट लॉन्च

2022 में कंपनी ने रुपे के साथ पार्टनरशिप की, जिन्होंने कोई लाइसेंसिंग या सार्टिफिकेशन फीस भी नहीं ली. इसके बाद सितंबर 2023 में स्टार्टअप ने अपना प्रोडक्ट लॉन्च किया. सारा बिजनेस डी2सी है और कंपनी की वेबसाइट से ही आता है. उसके बाद से अब तक करीब 3000 रिंग बेच चुके हैं.

पहले भी उठा चुके हैं फंडिंग

यह स्टार्टअप पहले भी फंडिंग उठा चुका है. 2018 में कंपनी ने 50 लाख रुपये की फंडिंग उठाई. 2020 में कंपनी ने 65 लाख रुपये उठाए. वहीं 2022 में कंपनी ने 39 लाख रुपये की फंडिंग ली. 72 लाख रुपये की फंडिंग 2023 में उठाए. अभी कंपनी 8-9 करोड़ रुपये का एक बड़ा राउंड कर रही है, उसी के तहत शार्क टैंक भी आए हैं.

इस स्टार्टअप में विजय के बाद 48 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि बाकी को-फाउंडर्स के पास 15 और 17 फीसदी इक्विटी है. कंपनी ने 2023-24 में 61 लाख रुपये की कमाई की. वहीं कंपनी ने इस साल पहली तिमाही में 26 लाख रुपये और दूसरी तिमाही में 35 लाख रुपये की कमाई की है.

मिली 3 शार्क डील, ₹75 लाख की फंडिंग

फाउंडर्स ने कहा कि उन्हें अगले 3 सालों में 30 लाख रिंग बेचनी हैं और ये कहते हुए कंपनी की 1 फीसदी इक्विटी के बदले फाउंडर्स ने 75 लाख रुपये की फंडिंग मांगी. अनुपम और अमन इस डील से आउट हो गए. वहीं विनीता और वरुण ने साथ मिलकर 1 फीसदी के बदले 50 लाख रुपये और 3 साल के लिए 10 फीसदी की दर पर 25 लाख रुपये का कर्ज ऑफर किया. पीयूष ने 75 लाख रुपये के बदले 3 लाख रुपये का ऑफर दिया. आखिरकार तीनों शार्क ने 1.5 फीसदी इक्विटी और 1.5 फीसदी एडवाइजरी इक्विटी के बदले 3 फीसदी के लिए 75 लाख रुपये देकर डील फाइनल की.

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अनुज मौर्या

अनुज मौर्या

असिस्टेंट न्यूज एडिटर, ज़ी बिजनेस हिंदी डिजिटल

अनुज मौर्या ज़ी बिजनेस हिंदी डिजिटल में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में काम करते हैं. बिजनेस पत्रकारित

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