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दूर के गांव में रहने वाले हर युवा का सपना होता है कि वह भी शहर आकर पैसे कमाए. शहरों में सब कुछ मिलता है, लेकिन गांव का स्वाद नहीं मिलता. ऐसे ही एक युवा हैं आलोक रंजन, जो बिहार के चंपारण से दिल्ली आए, लेकिन यहां पर उन्हें गांव का स्वाद बहुत याद आता था. ना घर जैसी लिट्टी-चोखा मिलता था, ना ही चंपारण मटन का स्वाद मिल पाता था और ना ही दाल-भात-भुजिया का लुत्फ उठा पाते थे. यह सब देखते हुए उन्होंने गांव के खाने को शहरों तक लाने का जिम्मा उठाया और शुरू किया मल्टीब्रांड फूड स्टार्टअप 'गांव'. अपने स्टार्टअप (Startup) को लेकर आलोक रंजन पहुंचे शार्क टैंक इंडिया के चौथे सीजन (Shark Tank India Season 4) में.
मौजूदा वक्त में गांव के तहत आलोक दिल्ली-एनसीआर में लोगों को बिहारी, अवधी और राजस्थानी खाने का स्वाद दे पा रहे हैं. अब तक वह 4 लाख से भी ज्यादा ऑर्डर डिलीवर कर चुके हैं. गांव के तहत अभी 4 तरह के ब्रांड हैं. पहला तो गांव ही है, जिसमें बिहारी खाना दिया जाता है. दूसरा है चंपारण, जिसमें वहां का फेमस मटन लोग खा सकते हैं. एक ब्रांड है तिरहुट, जिसमें स्नैक्स बनाए जाते हैं. वहीं एक अन्य ब्रांड है दुमारा, जिसके तहत बिरयानी बेची जाती है.
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आलोक बिहार से 2009 में दिल्ली बीटेक करने आए थे, लेकिन उसमें मन नहीं लगा. आलोक बताते हैं कि उनके पापा साइकिल पर फेरी लगाकर सामान बेचने का काम किया करते थे. इसके बाद उन्होंने बीबीए और एमबीए किया और फिर नौकरी करने लगे. नौकरी के साथ-साथ ही उन्होंने 2011 में करीब 9.5 लाख रुपये लगाकर 'गांव' (Gaon) नाम से एक रेस्टोरेंट की शुरुआत की. धीरे-धीरे दिल्ली-एनसीआर में उनके 3 आउटलेट हो गए, लेकिन कोविड में बिजनेस ठप पड़ गया और सब कुछ बंद करना पड़ा. कोविड के बाद उन्होंने क्लाउड किचन मॉडल के साथ फिर से बिजनेस शुरू किया.
गांव ने 2020-21 में 90 लाख रुपये का बिजनेस किया, जो अगले साल बढ़कर 1.62 करोड़ रुपये हो गया. वहीं उसके अगले साल कंपनी ने 3.86 करोड़ रुपये कमाए. वहीं पिछले साल यानी 2023-24 में कंपनी ने 5.5 करोड़ रुपये कमाए. इस साल कंपनी अब तक 3.08 करोड़ रुपये कमा चुके हैं और इस पूरे साल में 7.5 करोड़ रुपये कमाने का अनुमान है.
फाउंडर ने अपने स्टार्टअप की 4 फीसदी इक्विटी के बदले 80 लाख रुपये की फंडिंग मांगी. अमन और पीयूष तो शुरुआत में ही इस डील से बाहर हो गए. वहीं विनीता ने 4 फीसदी के बदले 40 लाख रुपये और 3 साल के लिए 10 फीसदी की दर से 40 लाख रुपये का कर्ज ऑफर किया. नमिता ने भी यही ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने ब्याज दर 9 फीसदी रखी. इसके अलावा 7 फीसदी इक्विटी के बदले 80 लाख रुपये का ऑफर अनुपम ने दिया. हालांकि, अंत में विनीता और अनुपम ने एक साथ मिलकर 8 फीसदी के बदले 80 लाख रुपये का ऑफर किया और ये डील डन हो गई.