Shark Tank India-4: दिव्यांगों को 'पैर' दे रहा है ये Startup, हुई 3 शार्क डील, मिली 60 लाख रुपये की Funding

शार्क टैंक इंडिया के चौथे सीजन (Shark Tank India Season 4) में एक ऐसा स्टार्टअप (Startup) आया, जिसने प्रोस्थेटिक्स बनाए हैं. इस स्टार्टअप का नाम है फ्यूप्रो, जिसकी शुरुआत की है चंडीगढ़ के निमिश मेहरा और केरल के साइरिल जो बेबी ने. अपने इनोवेशन से वह प्रोस्थेटिक्स की दुनिया में बड़ा बदलाव ला रहे हैं.
Shark Tank India-4: दिव्यांगों को 'पैर' दे रहा है ये Startup, हुई 3 शार्क डील, मिली 60 लाख रुपये की Funding

शार्क टैंक इंडिया के चौथे सीजन (Shark Tank India Season 4) में एक ऐसा स्टार्टअप (Startup) आया, जिसने प्रोस्थेटिक्स बनाए हैं. इस स्टार्टअप का नाम है फ्यूप्रो, जिसकी शुरुआत की है चंडीगढ़ के निमिश मेहरा और केरल के साइरिल जो बेबी ने. अपने इनोवेशन से वह प्रोस्थेटिक्स की दुनिया में बड़ा बदलाव ला रहे हैं. उनकी सस्ती और शानदार तकनीकों ने अब तक 15,000 से भी ज्यादा दिव्यांगों की जिंदगी बदल दी है.

फ्यूप्रो के पास 20 इनोवेटिव प्रोडक्ट्स हैं, जिनमें 5 पेटेंटेड डिज़ाइन शामिल हैं और सारे के सारे प्रोडक्ट मेड इन इंडिया हैं. कंपनी के प्रोडक्ट अधिकतर विदेशी ब्रांड्स के मुकाबले 50-80 फीसदी तक सस्ते हैं. वहीं कंपनी का दावा है कि भारतीय कॉम्पटीटर्स की तुलना में भी उनके प्रोडक्ट करीब 10-15 फीसदी तक सस्ते हैं. साथ ही फाउंडर्स का ये भी कहना है कि वह क्वालिटी के साथ कोई समझौता नहीं करते हैं.

अंशुल की कहानी शेयर की

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फ्यूप्रो ने शार्क टैंक में अपने पिच के दौरान उन्होंने अंशुल की कहानी साझा की, जो एक राष्ट्रीय स्तर के पर्वतारोही हैं. एक सड़क दुर्घटना में अपना पैर खोने के बाद, फ्यूप्रो की प्रोस्थेटिक लेग की मदद से अंशुल ने फिर से चलना सीखा और अपने जुनून को नया जीवन दिया. इस स्टार्टअप के प्रोस्थेटिक्स के फायदे गिनाते हुए अंशुल कहते हैं कि यह कॉस्ट इफेक्टिव हैं, हल्के हैं, इनमें स्प्रिंग एक्शन है और रेंज ऑफ मोशन अच्छा है.

कॉलेज प्रोजेक्ट को बदला बिजनेस में

निमिश एक अंतरराष्ट्रीय रेस कार डिजाइनर हैं, जिन्होंने अपने कॉलेज प्रोजेक्ट को एक ऐसे मिशन में बदल दिया. वह घायल सैनिकों से प्रेरणा लेकर आधुनिक प्रोस्थेटिक्स बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. उन्होंने अपने जूनियर साइरिल के साथ मिलकर फ्यूप्रो की शुरुआत की है और अब दिव्यांगों की मदद कर रहे हैं. हालांकि, कॉलेज प्रोजेक्ट के तहत जो प्रोस्थेटिक उन्होंने बनाया था, उसका सिर्फ प्रोटोटाइप बनाकर रखा है, क्योंकि वह बहुत महंगा है. अभी लोगों को किफायती प्रोस्थेटिक्स बनाए हैं.

जब निमिश ने समझी पैर की अहमियत

निमिश मेहरा ने कहा, "दो महीने तक बिस्तर पर रहने के बाद मुझे अहसास हुआ कि चलने-फिरने की आजादी कितनी जरूरी है. ये सिर्फ मोबिलिटी वापस पाने का नहीं, बल्कि अपनी आजादी और आत्मनिर्भरता को लौटाने का सवाल है. एक रेस-कार इंजीनियर से हेल्थकेयर इनोवेटर बनने के सफर में, मैंने देखा है कि कैसे सस्ते और सुलभ प्रोस्थेटिक्स लोगों की जिंदगी बदल सकते हैं. सोचा कि आर्मी के जो जवान पैर खो देते हैं, उन्हें मदद की जा सकेगी."

बूटस्ट्रैप्ड है कंपनी

यह एक बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप है, जिसमें सारे पैसे कंपनी के को-फाउंडर्स ने ही लगाए हैं. इस स्टार्टअप में एक फाउंडिंग शेयरहोल्डर भी हैं, जो कंपनी के ऑपरेशन्स में एक्टिव नहीं रहते, लेकिन उन्होंने सारी फाइनेंसिंग की है. इनका नाम है अश्मित, जो निमिश के फैमिली फ्रेंड हैं. उन्होंने बिजनेस में अभी तक 2.5 करोड़ रुपये डाले हैं. इस कंपनी में अश्मित के पास 40 फीसदी, निमिश के पास 30 फीसदी और साइरिल के पास 25 फीसदी इक्विटी है.

फाउंडर्स ने मांगे 1 फीसदी के बदले 60 लाख

फाउंडर्स ने अपने स्टार्टअप में 1 फीसदी इक्विटी के बदले 60 लाख रुपये मांगे. इस स्टार्टअप ने 2022-23 में 2.16 करोड़ रुपये की सेल की. उसके अगले साल 2.5 करोड़ रुपये की सेल की. वहीं इस साल कंपनी शुरुआती 6 महीने में 1.48 करोड़ का सेल कर चुकी है और पूरे साल में 5 करोड़ रुपये का टारगेट है. अनुपम इस डील से शुरुआत में ही आउट हो गए.

कुणाल ने 10 फीसदी के बदले 2 करोड़ रुपये देने का ऑफर दिया, लेकिन साथ ही एक कंडीशन भी रख दी कि कैपटेबल में बदलाव करना होगा, जिसे फाउंडर्स ने नहीं माना. वहीं अमन ने 3 फीसदी के बदले 60 लाख का ऑफर दिया. रितेश और नमिता ने साथ मिलकर 5 फीसदी के बदले 60 लाख का ऑफर दिया. आखिरकार रितेश, नमिता और अमन ने साथ मिलकर 4 फीसदी के बदले 60 लाख रुपये का निवेश किया और डील डन हुई.

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