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Shark Tank India-4: छोटे दुकानदारों के लिए बिलिंग मशीन का बड़ा सेटअप लगाना काफी मुश्किल होता है. ऐसे में वह कुछ किफायदी और आसान से इस्तेमाल होने वाली चीज ढूंढते हैं. शार्क टैंक इंडिया के चौथे सीजन (Shark Tank India Season 4) में एक ऐसा ही स्टार्टअप (Startup) आया, जो कुछ इसी तरह की बिलिंग मशीन ऑफर कर रहा है. फाउंडर्स का तो यहां तक दावा था कि वह गल्ले पर बैठने वाले के फ्रॉड से दुकान के मालिक को छुटकारा दिला सकता है.
इस स्टार्टअप का नाम है ईजो (EZO), जो एक बिलिंग मशीन और सॉल्यूशन मुहैया कराता है. फाउंडर्स का दावा है कि लोग सिर्फ 2 क्लिक में ही बिल बना सकते हैं. वहीं दिन भर का पूरा हिसाब-किताब अपने मोबाइल में ही देख सकते हैं. अभी तक वह 35 हजार से भी ज्यादा दुकानों को डिजिटल कर चुके हैं. यह दुकानें 600 से ज्यादा नॉन मेट्रो शहरों की हैं.
मौजूदा वक्त में कंपनी 12 भाषाओं में सर्विस देती है. शार्क टैंक में आने से एक महीने पहले कंपनी की मशीन से 1.20 करोड़ बिल प्रिंट किए गए थे. इस स्टार्टअप की शुरुआत की है महाराष्ट्र के गौरव काटे, मकरंद काटे और ऋषिकेश ने.
गौरव और मकरदं भाई हैं, जबकि ऋषिकेश गौरव के स्कूल के दोस्त हैं. गौरव और ऋषिकेश में अक्सर बिजनेस को लेकर बातें होती थीं और एक दिन दोनों ने मिलकर बिजनेस शुरू करने का फैसला किया. हालांकि, पहला बिजनेस कोविड के दौरान बंद हो गया, तो उन्होंने दूसरा बिजनेस ईजो का शुरू किया.
इस स्टार्टअप से दुकानदारों को बस एक बार जुड़ना होता है. इसके बाद वह खुद ही मन्यू तक अपडेट तक के दे देते हैं. इस मशीन की कीमत करीब 7001 रुपये है, जिसे दुकादारों को 6001 रुपये में दिया जाता है. इसके तहत प्रिंटिंग मशीन और 1 साल का सब्सक्रिप्शन दिया जाता है. वहीं अगले साल से 3000 रुपये रिन्यूअल चार्ज लिया जाता है.
कंपनी ने 2022-23 में करीब 4 करोड़ रुपये की सेल की. उसके अगले साल यह सेल बढ़कर 12 करोड़ रुपये के करीब हो गई. वहीं इस साल यानी 2024-25 में 30 करोड़ रुपये की सेल का टारगेट है. शुरुआती 6 महीनों में ही कंपनी ने 10.5 करोड़ रुपये की सेल कर ली है. कुणाल ने कहा कि प्रॉफिटेबिलिटी के आंकड़े बताइए, सब दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा. इसके बाद फाउंडर्स ने बताया कि वह हर साल 1 करोड़ से भी ज्यादा का नुकसान उठा रहे हैं.
अनुपम ने कहा पूरी दाल ही काली है. अकाउंटिंग का जो तरीका फाउंडर्स बता रहे थे, उससे सभी शार्क नाराज हो गए. फाउंडर्स ने अपने इस स्टार्टअप के लिए 0.33 फीसदी इक्विटी के बदले 50 लाख रुपये की फंडिंग मांगी. हालांकि, किसी भी शार्क ने इस बिजनेस में पैसे लगाने से मना कर दिया, क्योंकि किसी को भी फाउंडर्स और उनकी तरफ से बताए गए आंकड़ों पर भरोसा नहीं हो रहा था.