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भारत में 10 मिनट में ग्रॉसरी डिलीवरी का बाजार किसी जंग के मैदान से कम नहीं है. यहां Blinkit, Swiggy Instamart और Zepto जैसी कंपनियां एक-दूसरे को पछाड़ने के लिए हर दांव आजमा रही हैं. यह लड़ाई सिर्फ डिस्काउंट और ऑफर्स की नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे चलने वाली रणनीतियों और बड़ी-बड़ी फंडिंग की भी है.
इसी तेज कॉम्पिटिशन के बीच, क्विक कॉमर्स स्टार्टअप (Startup) Zepto एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार दो अलग-अलग वजहों से. एक तरफ कंपनी ने अपने विस्तार के लिए नई फंडिंग (Funding) जुटाई है, तो दूसरी तरफ कंपनी के CEO ने एक प्रतिद्वंद्वी पर उनके खिलाफ 'साजिश' रचने का गंभीर आरोप लगाया है. यह मामला दिखाता है कि इस सेक्टर में खेल कितना बड़ा हो चुका है.
कंपनी की स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, इस डील के तहत एल्सिड इन्वेस्टमेंट्स (Elcid Investments) ने ज़ेप्टो में ₹33.23 प्रति शेयर के हिसाब से 22,55,639 इक्विटी शेयर खरीदे हैं. यह कंपनी में लगभग 0.039% की हिस्सेदारी है. खास बात यह है कि एल्सिड इन्वेस्टमेंट्स ने पिछले साल भी ज़ेप्टो में निवेश किया था, जो कंपनी पर उनके बढ़ते भरोसे को दिखाता है. इस राउंड में कंपनी का वैल्यूएशन $5 बिलियन से ज्यादा का आंका गया है.
यह ₹7.5 करोड़ की फंडिंग तो बस एक छोटा सा हिस्सा है. 4 साल पुराना यह स्टार्टअप असल में 500 मिलियन डॉलर (लगभग ₹4100 करोड़) का एक बड़ा राउंड जुटाने की प्रक्रिया में है. इस बड़े राउंड को कंपनी के मौजूदा निवेशक जनरल कैटलिस्ट (General Catalyst) और एवेनिर ग्रोथ (Avenir Growth) लीड करेंगे.
पैसों की इस लड़ाई के बीच ज़ेप्टो के CEO और को-फाउंडर आदित पालिचा ने कुछ दिनों पहले एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी के CFO (चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर) पर उनके खिलाफ एक 'साजिश' चलाने का आरोप लगाया था.
पालिचा ने एक लिंक्डइन पोस्ट में कहा था कि यह अभियान 'हमारे निवेशकों को फोन करके बिना किसी सबूत के गलत आरोप लगाने, पत्रकारों को सूत्रों के हवाले से ज़ेप्टो के बारे में गलत नंबर/एक्सेल शीट देने और सोशल मीडिया पर एक निगेटिव कहानी फैलाने के लिए बॉट्स को पैसे देने' जैसा है. हालांकि, उन्होंने किसी कंपनी का नाम नहीं लिया.
इन सब के बीच, कंपनी ने हाल ही में भारती एंटरप्राइजेज के वाइस-चेयरमैन अखिल गुप्ता को अपने बोर्ड में एक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया है. यह कदम कंपनी की गवर्नेंस को मजबूत करने और बिजनेस को अगले लेवल पर ले जाने की रणनीति का हिस्सा है.
ज़ेप्टो का यह सफर रोमांचक मोड़ पर है. एक तरफ कंपनी अपने विस्तार के लिए बड़ा फंड जुटा रही है और बोर्ड को मजबूत कर रही है, तो दूसरी तरफ उसे बाजार में कड़े कॉम्पिटिशन और पर्दे के पीछे चल रही 'साजिशों' का भी सामना करना पड़ रहा है. यह मामला दिखाता है कि भारत का क्विक कॉमर्स बाजार कितना आक्रामक हो चुका है, जहां बने रहने के लिए सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि हर तरह के दांव-पेंच की जरूरत है.
1- ज़ेप्टो को हाल ही में कितनी फंडिंग मिली है?
ज़ेप्टो ने एल्सिड इन्वेस्टमेंट्स से ₹7.5 करोड़ की ताजा फंडिंग जुटाई है.
2- इस फंडिंग पर कंपनी का वैल्यूएशन कितना है?
कंपनी का वैल्यूएशन $5 बिलियन से ज्यादा है.
3- ज़ेप्टो के को-फाउंडर्स का क्या नाम है?
ज़ेप्टो के CEO और को-फाउंडर आदित पालिचा हैं. कंपनी के दूसरे को-फाउंडर का नाम कैवल्य वोहरा है.
4- आदित पालिचा ने क्या आरोप लगाया है?
उन्होंने एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी के CFO पर उनके खिलाफ साजिश रचने और झूठी जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है.
5- क्विक कॉमर्स में ज़ेप्टो के मुख्य प्रतिद्वंद्वी कौन हैं?
ज़ेप्टो के मुख्य प्रतिद्वंद्वी ब्लिंकिट (Blinkit), स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart), फ्लिपकार्ट मिनट और अब अमेजन नाउ भी हैं.