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Ola Business Model: हाल ही में ओला (Ola) की तरफ से जीरो कमीशन मॉडल (Zero Commission Model) लागू कर दिया गया है. कंपनी ने इस खास पहल को 'ओला मानसून धमाका' (Ola Monsoon Dhamaka) का नाम दिया है. यह मॉडल ऑटो से शुरू हुआ और फिर बाइक टैक्सी तक पहुंचा, जिसे अब कैब सर्विस पर भी लागू कर दिया गया है.
इस तरह अब ओला पार्टनर ड्राइवर्स को कंपनी को कोई भी कमीशन नहीं देना होगा. इसके तहत राइड के बाद यात्री जो भी भुगतान करेंगे, वह सारा ड्राइवर्स के खाते में जाएगा. सुनने में तो ये बहुत ही मजेदार लग रहा है, लेकिन एक सवाल ये उठता है कि आखिर फिर कंपनी पैसे कैसे कमाएगी?
ओला ने सभी ड्राइवर्स के लिए कमीशन को जीरो किया है, ये नहीं कहा है कि उनसे कोई पैसे लिए बिना मुफ्त में सर्विस दी जाएगी. कंपनी ने अपनी रिलीज में साफ कहा है कि ड्राइवर्स अपने हिसाब से कोई भी प्लान चुन सकते हैं और कंपनी को बिना कोई कमीशन दिए किराए से हुई सारी कमाई अपने पास रख सकते हैं. कंपनी ने कहा है कि इसमें ना तो कोई डिडक्शन होगा, ना ही इसकी कोई सीमा होगी. इससे यह साफ हो जाता है कि ड्राइवर्स को किसी तरह का प्लान चुनना होगा, तब वह जीरो कमीशन मॉडल का फायदा उठा पाएंगे.
कंपनी की तरफ से शुरू किए गए ओला मानसून धमाका की टैगलाइन है अर्निंग्स की बारिश. इसमें कंपनी ने कहा है कि 0% कमीशन देना होगा और अनलिमिटेड अर्निंग होगी यानी बिना किसी सीमा के पैसे कमाए जा सकते हैं. हालांकि, कंपनी ने यह भी साफ-साफ लिख दिया है कि इसका फायदा उठाने के लिए ड्राइवर्स को 30 दिन का पास खरीदना होगा, जिसकी कीमत है 67 रुपये प्रतिदिन. यानी अगर मंथली देखें तो इस पास की कीमत है 2010 रुपये.
ओला में बहुत सारे ड्राइवर्स पार्ट टाइम की तरह कैब या ऑटो या बाइक चलाते हैं. उन लोगों में से कुछ को नुकसान हो सकता है. हालांकि, जो लोग रोज पूरे दिन कैब या ऑटो या बाइक चलाते हैं, उन्हें इसमें फायदा हो सकता है. इससे ड्राइवर्स का सिर्फ एक ही बार चार्ज लगेगा, उसके बाद वह जितना भी कमाएगा, सब उसका होगा. हालांकि, अगर वह बहुत ही कम राइड करता है तो हो सकता है कि इससे उसे नुकसान भी हो जाए.
इस मॉडल से कंपनी को सबसे बड़ा फायदा ये है कि उसकी कमाई फिक्स हो जाएगी. भले ही ड्राइवर्स पूरे महीने कोई राइड लें या ना लें, उन्हें तो फिक्स इनकम मिलेगी ही. इससे कंपनी को अपने रेवेन्यू का अनुमान लगाने और उसी के हिसाब से मार्केटिंग समेत तमाम कामों के लिए बजट बनाने में आसानी होगी. देश के 250 से भी ज्यादा शहरों में कंपनी के साथ 15 लाख से भी ज्यादा ड्राइवर जुड़े हैं. अगर मान लें कि सभी ने जीरो कमीशन का प्लान ले लिया तो वह हर रोज 67 रुपये चुकाएंगे, मतलब कंपनी हर रोज करीब 10 करोड़ कमाएगी.