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भारत मंडपम में 'स्टार्टअप पे चर्चा' कार्यक्रम में पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स की तारीफ की. उन्होंने कहा कि युवाओं के आइडिया से बहुत सारी प्रॉब्लम सॉल्व हो रही हैं. हमने स्टार्टअप इंडिया शुरू किया, युवाओं को खुला आसमान दिया और आज युवाओं ने एक से बढ़कर एक स्टार्टअप शुरू कर दिए हैं. आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ स्टार्टअप ईकोसिस्टम है.
10 साल पहले देश में 500 से भी कम स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या आज 2 लाख से भी ज्यादा हो गी है. 2014 में भारत में सिर्फ 4 यूनिकॉर्न थे आज भारत में करीब 125 एक्टिव यूनिकॉर्न हैं. दुनिया ये सब देखकर हैरान है. जब भारत की स्टार्टअप जर्नी की बात होगी तो आज के युवा एक ब्राइट केस स्टडी बनने वाले हैं.
आज के वक्त में स्टार्टअप यूनिकॉर्न बन रहे हैं, आईपीओ ला रहे हैं, नौकरियां पैदा हो रही हैं. पिछले ही साल करीब 44 हजार नए स्टार्टअप रजिस्टर हुए हैं. स्टार्टअप इंडिया शुरू होने के बाद किसी साल में ये एक साल में सबसे बड़ा जंप है.
पहले बिजनेस बड़े घरानों के बच्चे लाते थे, क्योंकि उन्हें ही फंडिंग और सपोर्ट मिलता था. मिडिल क्लास के बच्चे सिर्फ नौकरी ही कर पाते थे. अब स्टार्टअप इंडिया ने इस सोच को बदल दिया है. आज टीयर-2 और टीयर-3 शहरों के युवा अपने स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं और जमीनी समस्याओं का समाधान निकाल रहे हैं.
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अगर मैं पूछूं कि स्टार्टअप इतने मायने क्यों रखते हैं, तो शायद सबके अलग-अलग जवाब होंगे. कोई कहेगा भारत दुनिया का सबसे युवा देश है. कोई कहेगा भारत दुनिया की सबसे तेजी से ग्रो कर रही इकनॉमी है, कोई वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर की बात कहेगा. ये सारी बातें सही हैं, लेकिन एक बात जो मेरे दिल को छूती है, वह है स्टार्टअप स्पिरिट. मेरे देश का नौजवान आज कंफर्ट जोन में अपनी जिंदगी गुजरने को तैयार नहीं है. वह अपने लिए नए रास्ते खुद बनाना चाहता है.
आप सभी ने यहां तक पहुंचने के लिए कितना साहस किया होगा. कितना कुछ दांव पर लगाया होगा. पहले देश में रिस्क लेने को डिस्करेज करते थे. लेकिन आज रिस्क टेकिंग पॉपुलर हो गया है. जो लोग मंथली सैलरी से आगे की सोचते हैं, उन्हें इज्जत मिलती है. आज रिस्क टेकिंग आइडिया फैशन बन रहा है. मैं रिस्क टेकिंग पर जोर देता रहा हूं, क्योंकि यह मेरी भी पुरानी आदत है. जो काम कोई करने को तैयार नहीं होता, मैं वो करता हूं. किसी ना किसी को तो रिस्क लेना होगा, नुकसान होगा तो मेरा होगा, फायदा होगा तो देश के करोड़ों लोगों का फायदा होगा.
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पिछले कुछ सालों में एक ऐसा सिस्टम तैयार हुआ है, जो इनोवेशन को बढ़ावा देता है.हमने स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब्स बनाईं, ताकि वहां बच्चों में इनोवेशन बढ़े. हैकेथॉन शुरू किए, इनक्युबेशन सेंटर बनाए, ताकि संसाधनों की कमी से आइडिया खराब ना हो. 180 से ज्यादा प्रोविजन हटाए, लोगों का समय बचाया, ताकि लोग इनोवेशन पर फोकस करें. स्टार्टअप के लिए कई नियमों में सेल्फ सर्टिफिकेशन की सुविधा दी गई.
डिफेंस को देखिए. पहले स्टार्टअप बड़ी कंपनियों से टक्कर लेने की सोच भी नहीं पाते थे, अब कर सकते हैं. स्पेस सेक्टर में भी आज करीब 200 स्टार्टअप काम कर रहे हैं और ग्लोबल मान्यता मिल रही है. ड्रोन सेक्टर में भारत काफी पीछे छूट गया था, जिसमें देश अब आगे बढ़ रहा है. स्टार्टअप अपनी सफलता से हर सेक्टर के लिए नए मौके पैदा कर रहे हैं. हम सभी जानते हैं कि कैपिटल के बिना अच्छे आइडिया मार्केट में नहीं पहुंच पाते. ऐसे में फंड ऑफ फंड के जरिए करीब 25 हजार करोड़ का फंड बनाया, सीड फंडिंग की सुविध भी दी.
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जो देश एआई में जितना आगे होगा, वह देश उतना ही बड़ा फायदा होगा. भारत के लिए यह काम स्टार्टअप्स को करना होगा. फरवरी में भारत में एआई की एक समित हो रही है. इंडिया एआई मिशन के जरिए हम कई सॉल्यूशन दे रहे हैं. अब छोटे स्टार्टअप्स के लिए भी बड़ी टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराने की कोशिश है.
हम ग्लोबल लीडरशिप का टारगेट लेकर आगे बढ़ रहे हैं. हमने डिजिटल स्टार्टअप में सर्विस सेक्टर में काफी काम किया है. अब जरूरत है कि स्टार्टअप मैन्युफैक्चरिंग में ज्यादा ध्यान दें. भविष्य इसी का है. आपकी हर कोशिश में सरकार आपके साथ है. पिछले 10 सालों ने देश की क्षमताओं को साबित किया है. आने वाले सालों में भारत दुनिया का नेतृत्व कर सकता है.
पीएम मोदी के संबोधन से साफ है कि स्टार्टअप इंडिया सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि सोच में बदलाव है. रिस्क लेने की संस्कृति, टियर-2/3 शहरों से उभरते आइडिया, इनोवेशन-सपोर्ट सिस्टम और फंडिंग ने भारत को वैश्विक स्टार्टअप पावरहाउस बनाया है. अब अगला फोकस एआई और मैन्युफैक्चरिंग पर है- जहां भारत नेतृत्व कर सकता है.
16 जनवरी 2016 को पीएम मोदी ने Startup India की शुरुआत की थी.
करीब 500 से बढ़कर 2 लाख से ज्यादा हो गई है.
भारत में करीब 125 एक्टिव यूनिकॉर्न हैं.
पिछले साल करीब 44 हजार नए स्टार्टअप रजिस्टर हुए.
फंड ऑफ फंड, सीड फंडिंग, सेल्फ-सर्टिफिकेशन, इनक्यूबेशन सेंटर, अटल टिंकरिंग लैब्स और नियमों में ढील के जरिए.
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