कॉफी पीने गए थे रितेश अग्रवाल, बगल वाली टेबल से उठकर आया युवा फाउंडर, दे डाली 'बिजनेस पिच', कर दिया इंप्रेस!

नागपुर के एक कैफे में एक युवा स्टार्टअप फाउंडर ने ओयो (OYO) के सीईओ रितेश अग्रवाल को अपने पास वाली टेबल पर बैठा देखा. बिना किसी हिचकिचाहट के, इस फाउंडर ने 'Shoot your shot' (मौका न गंवाना) के मंत्र पर अमल किया और रितेश को अपना बिजनेस आइडिया पिच कर दिया. रितेश अग्रवाल न केवल शांत भाव से मिले, बल्कि नागपुर जैसे शहर से ग्लोबल एआई प्लेटफॉर्म बनाने की सोच की सराहना भी की.
कॉफी पीने गए थे रितेश अग्रवाल, बगल वाली टेबल से उठकर आया युवा फाउंडर, दे डाली 'बिजनेस पिच', कर दिया इंप्रेस!

आपने अक्सर सुना होगा कि मौका कभी दस्तक देकर नहीं आता. कुछ ऐसा ही कुछ हुआ नागपुर के एक 'C7 कैफे' में, जहां एक युवा फाउंडर रोहित राउत (rohit_raut5) अपने लैपटॉप पर काम कर रहे थे. अचानक उनकी नजर पास बैठे एक शख्स पर पड़ी, जो कोई और नहीं बल्कि भारतीय हॉस्पिटैलिटी दिग्गज ओयो (OYO) के फाउंडर और सीईओ रितेश अग्रवाल थे.

रोहित के लिए यह पल 'करो या मरो' जैसा था. उनके पास दो विकल्प थे- या तो रितेश को चुपचाप जाने देते और ताउम्र पछताते, या फिर अपनी झिझक छोड़कर उनसे बात करते. रोहित ने दूसरा रास्ता चुना. उन्होंने बिना किसी तैयारी, बिना किसी स्लाइड और बिना किसी 'एलिवेटर पिच' के रितेश अग्रवाल का सामना किया. इस दिलचस्प कहानी को रोहित ने रेडिट (Reddit) पर साझा किया है, जो अब पूरे स्टार्टअप कम्युनिटी के लिए प्रेरणा बन गई है.

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निकलने ही वाले थे रितेश और तभी..

रितेश अग्रवाल उस समय कैफे से निकलने ही वाले थे. रोहित ने साहस जुटाया और सीधे उनके पास जाकर कहा, "हाय रितेश, मैं बच्चों के लिए एक पर्सनलाइज्ड एआई लर्निंग प्लेटफॉर्म बना रहा हूं. हम नागपुर से ही काम कर रहे हैं और हमारे पास शुरुआती यूजर्स भी हैं. मैं इसे ग्लोबल लेवल पर ले जाने के लिए आपसे मेंटरशिप चाहता हूं."

रितेश अग्रवाल का रिएक्शन और 'नागपुर' का जादू

रोहित की बात सुनकर रितेश अग्रवाल बिल्कुल भी असहज नहीं हुए. इसके उलट, वह ये जानकर बेहद खुश हुए कि कोई नागपुर जैसे छोटे शहर से बैठकर ग्लोबल विजन के साथ एआई (AI) पर काम कर रहा है. रितेश ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "आप इसे नागपुर से बना रहे हैं? यह वाकई बहुत अच्छा है."

दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई. रितेश इस बात से काफी प्रभावित दिखे कि छोटे शहरों के फाउंडर्स अब तकनीक के सबसे एडवांस क्षेत्र में काम कर रहे हैं. रोहित ने बताया कि रितेश ने उन्हें समय दिया, उनकी बात सुनी और जाने से पहले उनके साथ एक फोटो भी खिंचवाई. रोहित के मुताबिक, रितेश का व्यवहार बिल्कुल साधारण और मानवीय था, जिसने उन्हें बहुत प्रभावित किया.

स्टार्टअप्स के लिए 5 बड़े सबक

रोहित ने अपनी पोस्ट में इस मुलाकात से मिले अनुभवों को विस्तार से साझा किया है, जो हर उभरते उद्यमी के काम आ सकते हैं:

1- 10 सेकंड का नियम: अगर आप 10 सेकंड से ज्यादा हिचकिचाते हैं, तो मौका हाथ से निकल जाता है. रोहित ने तुरंत फैसला लिया, वरना रितेश कैफे से बाहर जा चुके होते.

2- परफेक्ट पिच की जरूरत नहीं: आपको हमेशा भारी-भरकम प्रेजेंटेशन की जरूरत नहीं होती. बस स्पष्ट रहें कि आप क्या बना रहे हैं और आपको क्या मदद चाहिए.

3- इंसानियत को पहचानें: बड़े फाउंडर्स भी आखिर इंसान ही हैं. रोहित इससे पहले उदय कोटक और निखिल कामथ जैसे दिग्गजों से भी मिल चुके हैं, जिससे उनका डर खत्म हो गया.

4- छोटा शहर, बड़ी सोच: छोटे शहर से ग्लोबल प्रोडक्ट बनाना आज के समय में एक 'यूनीक' पॉइंट है, जो निवेशकों और मेंटर्स का ध्यान खींचता है.

5- फोटो जरूर लें: रोहित की सलाह है- फोटो लेने में शर्माएं नहीं. यह न केवल एक याद है, बल्कि आपकी यात्रा का एक महत्वपूर्ण सबूत भी.

Conclusion

यह कहानी हमें याद दिलाती है कि नेटवर्किंग के लिए हमेशा बड़े इवेंट्स या फॉर्मल मीटिंग्स की जरूरत नहीं होती. कभी-कभी एक रैंडम कॉफी शॉप भी आपके बिजनेस का टर्निंग पॉइंट बन सकती है. रोहित राउत की इस पहल और रितेश अग्रवाल की विनम्रता ने यह साबित कर दिया है कि भारत का स्टार्टअप कल्चर अब बड़े शहरों की चकाचौंध से निकलकर नागपुर जैसे शहरों की गलियों और कैफे तक पहुंच चुका है.

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