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महाराष्ट्र सरकार ने एक नई स्टार्टअप नीति (Maharashtra Startup, Entrepreneurship and Innovation Policy 2025) को मंजूरी दी है, जिसका नाम है 'महाराष्ट्र स्टार्टअप, एंटरप्रेन्योरशिप और इनोवेशन पॉलिसी 2025'. इस नीति के तहत राज्य भर में स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने की कोशिश होगी. इसके तहत सिर्फ शहरों में नहीं, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों तक स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाएगा.
5 अगस्त 2025 को लॉन्च हुई इस पॉलिसी का मकसद है कि आने वाले 5 सालों में 1.25 लाख नए उद्यमियों को तैयार किया जाए. साथ ही इसका मकसद नहीं है कि 50 हजार स्टार्टअप्स को मान्यता दी जाए और युवाओं को वित्तीय सहायता, ट्रेनिंग और मेंटरशिप के जरिए सफल स्टार्टअप शुरू करने में मदद दी जाए.
नई पॉलिसी के तहत युवाओं को ₹5 लाख से ₹10 लाख तक के लोन पर सिर्फ 3% ब्याज देना होगा. इसके लिए 3 चरणों वाली चयन प्रक्रिया होगी, जिसमें 5 लाख युवाओं की स्क्रीनिंग की जाएगी, जिनमें से 25,000 को सीधे फंड और इनक्यूबेशन की मदद मिलेगी. ITI और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में माइक्रो इनक्यूबेटर्स बनाए जाएंगे, जिससे टेक्निकल बैकग्राउंड वाले छात्रों को भी स्टार्टअप शुरू करने का मौका मिलेगा.
नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास 300 एकड़ में फैली 'महाराष्ट्र इनोवेशन सिटी' (MIC) बनाई जाएगी. इस सिटी में AI, फिनटेक, हेल्थटेक, स्पेसटेक, साइबर सिक्योरिटी, डीपटेक, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर के लिए खास क्लस्टर होंगे. यहां R&D लैब्स, को-वर्किंग स्पेस, इन्वेस्टर मीटिंग जोन और सिंगल विंडो क्लीयरेंस की सुविधा होगी.
पॉलिसी के तहत सरकार ने ₹500 करोड़ का 'महा फंड' लॉन्च किया है, जिससे स्टार्टअप्स को सीड फंडिंग दी जाएगी. इसके अलावा, सरकार ने दो वेंचर फंड भी घोषित किए हैं. ₹200 करोड़ का वेंचर फंड IDBI Capital के साथ, जो DeepTech, AgriTech, HealthTech और महिला स्टार्टअप्स पर केंद्रित होगा. ₹100 करोड़ का फंड SIDBI के साथ, जो 1:2 के पब्लिक-प्राइवेट मॉडल पर चलेगा.
हर साल होने वाले 'महाराष्ट्र स्टार्टअप वीक' के जरिए चुने गए स्टार्टअप्स को सरकार ₹25 लाख तक के पायलट वर्क ऑर्डर देगी. इसके साथ ही सरकार उन्हें और भी मदद देगी जैसे-
सरकार ने ये भी तय किया है कि अब स्कूलों और ITI कोर्सेज में एंटरप्रेन्योरशिप कोर्स शामिल किए जाएंगे. हर जिला प्लान के 3.5% हिस्से को इनोवेशन और स्टार्टअप्स के लिए रिजर्व किया जाएगा, जिससे लोकल स्तर पर भी क्लस्टर और स्टार्टअप बढ़ सकें.
इस पूरे सिस्टम को संभालने के लिए एक जनरल बॉडी बनाई जाएगी, जिसकी अध्यक्षता खुद मुख्यमंत्री करेंगे. इसके अलावा एक गवर्निंग काउंसिल और महाराष्ट्र स्टेट इनोवेशन सोसाइटी (MSInS) इसे ऑपरेट करेगी. हर राज्य विभाग अपनी सालाना राशि का 0.5% स्टार्टअप और इनोवेशन को देने के लिए रिजर्व करेगा. एक सेंट्रल रजिस्ट्री सिस्टम भी बनेगा, जिससे हर स्टार्टअप, मेंटर, इन्वेस्टर और इनक्यूबेटर को यूनीक आईडी मिलेगी, जिससे सरकारी स्कीम्स में पारदर्शिता रहेगी.
महाराष्ट्र की यह नई पॉलिसी सिर्फ एक सब्सिडी स्कीम नहीं है– यह एक पूरा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाने की दिशा में ठोस कदम है. इसमें गांव से लेकर शहर तक, कॉलेज से लेकर निवेशकों तक सभी को जोड़ा गया है. AI, हेल्थ, एग्री और डीपटेक जैसे उभरते सेक्टरों को इस पॉलिसी के केंद्र में रखा गया है. अगर इसका सही से अमल हुआ, तो महाराष्ट्र भारत का नंबर 1 स्टार्टअप राज्य बन सकता है.
1. महाराष्ट्र की नई स्टार्टअप पॉलिसी का मुख्य मकसद क्या है?
नवाचार, स्वरोजगार और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देना.
2. क्या गांवों और छोटे शहरों को भी इस पॉलिसी में जगह मिली है?
हाँ, हर जिले में माइक्रो इनक्यूबेटर और स्टार्टअप क्लस्टर बनेंगे.
3. स्टार्टअप्स को कितनी राशि तक का लोन मिलेगा?
₹5 लाख से ₹10 लाख तक का लोन, 3% सब्सिडी ब्याज पर.
4. इनोवेशन सिटी कहां बनेगी और उसमें क्या होगा?
नवी मुंबई में, जहां AI, स्पेसटेक, बायोटेक जैसे सेक्टरों के लिए सुविधाएं होंगी.
5. क्या महिलाओं और छात्रों को भी फायदा मिलेगा?
बिलकुल, महिला स्टार्टअप्स और ITI छात्रों को प्राथमिकता मिलेगी.