मैं सदमे में हूं.. ₹30 हजार खर्च कर के मिली इन्टर्नशिप, बस 23 दिन में टूटा सपना, बोला- 'गलती की भरोसा कर के'

पोस्ट करने वाले ने अपना नाम नहीं बताया, लेकिन उन्होंने जो अनुभव शेयर किया वो कई युवाओं को अंदर तक हिला सकता है. स्टार्टअप के फाउंडर ने इंटर्न को तीन महीने बाद फुल टाइम नौकरी और ₹40,000 की सैलरी का वादा किया था. लेकिन एक क्लाइंट के पीछे हटते ही इंटर्न को कह दिया गया – अब तुम्हारी ज़रूरत नहीं है.
मैं सदमे में हूं.. ₹30 हजार खर्च कर के मिली इन्टर्नशिप, बस 23 दिन में टूटा सपना, बोला- 'गलती की भरोसा कर के'

एक इंटर्नशिप करने गुरुग्राम आया युवा आज ठगा हुआ महसूस कर रहा है. घर छोड़कर, करीब 30,000 रुपये खर्च करके सपना लेकर आया था, लेकिन महज 23 दिन बाद उसकी नौकरी छिन गई. ये कहानी एक Reddit पोस्ट में शेयर की है, जो अब तेजी से वायरल हो रही है. इस कहानी ने सोशल मीडिया पर एक बहस छेड़ दी है.

पोस्ट करने वाले ने अपना नाम नहीं बताया, लेकिन उन्होंने जो अनुभव शेयर किया वो कई युवाओं को अंदर तक हिला सकता है. स्टार्टअप के फाउंडर ने इंटर्न को तीन महीने बाद फुल टाइम नौकरी और ₹40,000 की सैलरी का वादा किया था. लेकिन एक क्लाइंट के पीछे हटते ही इंटर्न को कह दिया गया – अब तुम्हारी ज़रूरत नहीं है.

"हर दिन 10-12 घंटे काम किया... कुछ वीकेंड भी दिए"

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इस Reddit यूज़र @Regrets_only_ का कहना है कि उन्होंने हर दिन 10 से 12 घंटे काम किया. कई बार वीकेंड्स पर भी ऑफिस जाना पड़ा. फाउंडर ने शुरुआत में पर्सनल मेंटरशिप और करियर ग्रोथ का वादा किया था. लेकिन कुछ ही हफ्तों में वो सारे वादे धुएं में उड़ गए.

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "मैं सदमे में हूं... मुझे अफ़सोस है कि मैंने फाउंडर की बातों पर यकीन कर लिया." अब ये इंटर्न गुरुग्राम के कॉम्पिटिटिव स्टार्टअप माहौल में नौकरी की तलाश में है, लेकिन हालात आसान नहीं हैं.

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सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा, मिले हमदर्द भी

पोस्ट वायरल होते ही Reddit पर कई लोगों ने अपनी राय दी. कुछ ने अपनी भी ऐसी ही कहानियां शेयर कीं. एक यूज़र ने कमेंट किया, "मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था. हिम्मत मत हारो. रोज़ लिंक्डइन पर अप्लाई करो. भले ही 90% पोस्ट फेक हों, लेकिन महीने में 2-3 कॉल्स मिल ही जाएंगी."

एक और यूज़र ने कहा, "उस समय जो जानकारी तुम्हारे पास थी, उसी हिसाब से ये सही फैसला था. अब फाउंडर से बात करो, हो सकता है उसके जानने वाले फाउंडर्स को कोई बंदा चाहिए हो. ये इकोनॉमी टफ है, लेकिन तुम्हें कोई न कोई मौका ज़रूर मिलेगा."

स्टार्टअप्स में वादों और हकीकत के बीच फासला

इस घटना ने एक बार फिर स्टार्टअप इंडस्ट्री में इंटर्न्स के साथ होने वाले बर्ताव पर सवाल खड़े कर दिए हैं. कई बार जो वादे ऑफर लेटर में होते हैं, वो ज़मीन पर नहीं उतरते. खासकर जब कंपनी किसी एक क्लाइंट पर निर्भर होती है और बिज़नेस अचानक बदल जाता है.

नई पीढ़ी के लिए सबक

इस कहानी से एक बड़ा सबक मिलता है– सिर्फ ग्लैमरस वेबसाइट्स और फाउंडर के जोश से प्रभावित होकर नौकरी का फैसला न लें. अच्छे से कंपनी का बैकग्राउंड चेक करें. बातों के बजाय लिखित वादों को अहमियत दें. और सबसे ज़रूरी, अगर आप कहीं शिफ्ट हो रहे हैं, तो उस फैसले पर दो बार सोचें.

अब क्या?

फिलहाल उस इंटर्न की नौकरी चली गई है, लेकिन उम्मीद अभी बाकी है. सोशल मीडिया पर लोगों का सपोर्ट मिल रहा है. और शायद किसी दिन कोई फाउंडर, जो वाकई में वादे निभाता है, इस इंटर्न की पोस्ट पढ़कर उसे नया मौका दे. स्टार्टअप की दुनिया जितनी तेज़ और जोशीली है, उतनी ही अनप्रेडिक्टेबल भी. और इसमें चलना है, तो गिरने के बाद फिर खड़ा होना भी आना चाहिए.

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