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भारत की स्टार्टअप क्रांति को एक दशक पूरा होने के अवसर पर केंद्र सरकार ने 'स्टार्टअप इंडिया' पहल के तहत मान्यता के मानदंडों में ऐतिहासिक संशोधन किए हैं. उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की तरफ से अधिसूचित नए नियमों का मकसद भारत को सिर्फ उपभोग-आधारित बाजार से बदलकर एक 'हाई-टेक्नोलॉजी' और 'अनुसंधान-आधारित' वैश्विक हब बनाना है. 2016 में शुरू हुई इस पहल ने अब तक 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स को मान्यता दी है और अब अगले दशक के लिए एक भविष्य की तैयारी हो रही है.
सरकार का यह फैसला 'विकसित भारत @ 2047' के विजन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. नए मानदंडों के तहत उन उद्यमों को अधिक समय और संसाधन दिए गए हैं जो गहरे अनुसंधान (R&D) और जटिल तकनीकों पर काम कर रहे हैं. इससे न केवल रोजगार पैदा करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि भारत की विनिर्माण क्षमता और तकनीकी संप्रभुता भी मजबूत होगी.
स्टार्टअप मान्यता के लिए पात्रता की सबसे बड़ी बाधा टर्नओवर की सीमा थी. पहले केवल ₹100 करोड़ तक के टर्नओवर वाली संस्थाओं को ही स्टार्टअप माना जाता था. अब इस सीमा को दोगुना करके ₹200 करोड़ कर दिया गया है. इस बदलाव का मुख्य कारण स्टार्टअप्स का तेजी से बढ़ता पैमाना और उनके व्यापार चक्र की जटिलता है. अब अधिक राजस्व वाली कंपनियां भी सरकारी फंडिंग स्कीमों, टैक्स छूट और नियामक राहतों का लाभ उठा सकेंगी, जिससे उन्हें और बड़ा बनने में मदद मिलेगी.
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जो स्टार्टअप्स आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, बायोटेक और उन्नत विनिर्माण जैसी 'डीप टेक' (Deep Tech) श्रेणियों में काम कर रहे हैं, उनके लिए सरकार ने नियमों को बेहद लचीला बना दिया है. डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:
आयु सीमा: मान्यता की अवधि को 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया है. चूंकि इन क्षेत्रों में रिसर्च और डेवलपमेंट में लंबा समय लगता है, इसलिए उन्हें अधिक समय तक स्टार्टअप का दर्जा मिलता रहेगा.
टर्नओवर सीमा: इन स्टार्टअप्स के लिए टर्नओवर की सीमा को बढ़ाकर ₹300 करोड़ कर दिया गया है.
मकसद: यह कदम उन उद्यमों के लिए है जिनका 'जेस्टेशन पीरियड' (विकास का समय) लंबा होता है और जिन्हें भारी पूंजी निवेश की जरूरत होती है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र में नवाचार को जमीनी स्तर पर ले जाने के लिए सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. अब सहकारी समितियां (Cooperative Societies) भी स्टार्टअप के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए पात्र होंगी. इसमें मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों के तहत पंजीकृत समितियां शामिल हैं. इससे ग्रामीण उद्योगों और समुदाय-आधारित उद्यमों को आधुनिक तकनीक अपनाने और स्टार्टअप इंडिया के तहत मिलने वाले इंसेंटिव का लाभ उठाने का मौका मिलेगा.
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स्टार्टअप मान्यता के इन संशोधित नियमों से भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिलेगी. टर्नओवर सीमा बढ़ाने और डीप टेक को विशेष रियायत देने से उन कंपनियों को संजीवनी मिलेगी जो जटिल तकनीकों पर काम कर रही हैं लेकिन राजस्व बढ़ने के कारण सरकारी लाभों से वंचित हो जाती थीं. सहकारी समितियों का समावेश यह सुनिश्चित करेगा कि स्टार्टअप क्रांति का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों और खेतों तक भी पहुंचे.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 स्टार्टअप के लिए अब टर्नओवर की नई सीमा क्या है?
A. सामान्य स्टार्टअप्स के लिए टर्नओवर की सीमा ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹200 करोड़ कर दी गई है.
Q2 डीप टेक (Deep Tech) स्टार्टअप्स को क्या विशेष लाभ मिला है?
A. उन्हें अब 20 साल तक स्टार्टअप माना जाएगा और उनके लिए टर्नओवर की सीमा ₹300 करोड़ होगी.
Q3 क्या अब कोऑपरेटिव सोसाइटीज भी स्टार्टअप बन सकती हैं?
A. हां, केंद्र सरकार ने अब सहकारी समितियों को भी स्टार्टअप की श्रेणी में शामिल करने का फैसला किया है.
Q4 स्टार्टअप मान्यता मिलने के मुख्य फायदे क्या हैं?
A. मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को टैक्स में छूट, सरकारी फंडिंग तक पहुंच और आसान अनुपालन (Compliance) जैसे लाभ मिलते हैं.
Q5 यह नया नियम कब से प्रभावी माना जाएगा?
A. सरकार द्वारा अधिसूचना जारी होने के साथ ही ये नए मानदंड तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं.