गिग वर्कर्स की जिंदगी बदल रहा है ये स्टार्टअप, अब जुटाई 21 करोड़ रुपये की Funding

गिग वर्कर्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाला बेंगलुरु बेस्ड स्टार्टअप Nia.one ने Elevar Equity से 2.4 मिलियन डॉलर (करीब 21.3 करोड़ रुपये) की सीड फंडिंग जुटाई है. कंपनी इन पैसों का इस्तेमाल अपने Niadel हब्स का विस्तार करने, AI लेयर Rafiki को अपग्रेड करने और नई टीम हायर करने में करेगी. Nia.one का लक्ष्य देशभर के प्रवासी और गिग वर्कर्स को स्थिर और सुरक्षित जीवन देना है.
गिग वर्कर्स की जिंदगी बदल रहा है ये स्टार्टअप, अब जुटाई 21 करोड़ रुपये की Funding

भारत में लाखों गिग वर्कर्स (Gig Workers) और प्रवासी मजदूर (Migrant Workforce) शहरों में बेहतर नौकरी, रहने की जगह और स्थिर कमाई की तलाश में आते हैं. लेकिन आज भी उनके सामने भरोसेमंद नौकरी, सुरक्षित रहने की जगह, सस्ती सुविधा और सही जानकारी न मिल पाने की बड़ी समस्या खड़ी रहती है. इसी समस्या को टेक्नोलॉजी (AI Platform) और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर (Worker Hubs) के जरिए हल करने के मिशन पर काम कर रहा है बेंगलुरु बेस्ड स्टार्टअप Nia.one (Gig Worker Infrastructure Startup).

कंपनी ने अपने इस मॉडल को और तेजी से फैलाने के लिए Elevar Equity से 2.4 मिलियन डॉलर (Seed Funding) जुटा लिए हैं. यह फंडिंग उन बड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाएगी जिनमें शामिल है- नए Niadel हब्स लॉन्च करना, AI सिस्टम Rafiki को और स्मार्ट बनाना और एक मजबूत ऑपरेशनल टीम तैयार करना. Nia.one का लक्ष्य है कि देशभर के रोजगार कॉरिडोर में एक ऐसा नेटवर्क तैयार हो जहां गिग वर्कर सुरक्षित जीवन और स्थिर कमाई के साथ भविष्य बना सकें.

क्या है Nia.one और कैसे काम करता है इसका मॉडल?

2024 में छाबड़ा और लेफ्टिनेंट कर्नल पुष्कर राज द्वारा शुरू किया गया Nia.one एक फुल-स्टैक, फिजिटल प्लेटफॉर्म है. इसका लक्ष्य है प्रवासी और गिग वर्कर्स को नौकरी, रहने की जगह, भोजन, मोबिलिटी और बेसिक सुविधाएं एक ही इकोसिस्टम में उपलब्ध कराना. Nia.one इन्हें एक साथ जोड़कर वर्कर्स की जिंदगी में 3 बड़े बदलाव लाना चाहता है:

  • स्थिर नौकरी
  • सुरक्षित और सस्ती रहने की सुविधा
  • मध्यस्थों और ब्रोकर्स से मुक्ति

यह मॉडल गिग वर्कर्स को “जॉब से लेकर रहने की जगह तक” एक सुव्यवस्थित अनुभव देता है.

क्या होते हैं Niadel हब- Nia.one का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर?

Niadels वह फिजिकल हब हैं जो वर्कर्स की जरूरतों को एक जगह पूरा करते हैं. इन हब्स में मिलता है-

  • नौकरी की जानकारी
  • रहने की सुरक्षित जगह
  • सस्ता और हेल्दी खाना
  • बेसिक सुविधाएं
  • कम दूरी पर काम की जगह (1 किलोमीटर के अंदर)

Nia.one का दावा है कि इससे वर्कर्स की सेविंग बढ़ती है, लॉजिस्टिक कंपनियों को स्थिर मैनपावर मिलता है और बार-बार जॉब बदलने की समस्या काफी कम हो जाती है.

AI असिस्टेंट Rafiki- वर्कर्स का डेटा-ड्रिवन साथी

Rafiki Nia.one का AI लेयर है, जो वर्कर्स से मिले डाटा के आधार पर-

  • सही नौकरी
  • सही लोकेशन
  • उनके कौशल और अनुभव से मैचिंग
  • कम्यूट फ्रेंडली विकल्प तय करता है.

कंपनी के अनुसार AI आधारित यह सिस्टम रिटेंशन रेट बढ़ाता है, सेविंग सुधारता है और वर्कर्स की जिंदगी को स्थिर बनाता है.

Conclusion

Nia.one सिर्फ एक नौकरी खोजने वाला प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि गिग वर्कर्स की पूरी लाइफ बदलने का मिशन है. अपने Niadel हब्स, AI आधारित Rafiki, सुरक्षित रहने की जगह और बिना बिचौलियों के रोजगार मॉडल की वजह से यह स्टार्टअप गिग इकॉनमी को एक नए स्तर पर ले जा रहा है. फंडिंग के बाद इसकी स्पीड और भी बढ़ेगी और आने वाले समय में यह भारत में गिग वर्कर्स के लिए सबसे बड़ा सपोर्ट नेटवर्क बन सकता है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. स्टार्टअप क्या होता है?

एक नई कंपनी जो इनोवेटिव मॉडल पर काम करती है.

2. Seed Funding क्या होती है?

स्टार्टअप के शुरुआती विस्तार के लिए मिलने वाली फंडिंग.

3. Gig Worker किसे कहते हैं?

फ्रीलांस या अस्थायी काम करने वाले वर्कर्स.

4. AI असिस्टेंट क्या करता है?

डाटा के आधार पर सही विकल्प सुझाता है.

5. फिजिटल प्लेटफॉर्म क्या होता है?

फिजिकल और डिजिटल दोनों सिस्टम का संयोजन.

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