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भारत में लाखों गिग वर्कर्स (Gig Workers) और प्रवासी मजदूर (Migrant Workforce) शहरों में बेहतर नौकरी, रहने की जगह और स्थिर कमाई की तलाश में आते हैं. लेकिन आज भी उनके सामने भरोसेमंद नौकरी, सुरक्षित रहने की जगह, सस्ती सुविधा और सही जानकारी न मिल पाने की बड़ी समस्या खड़ी रहती है. इसी समस्या को टेक्नोलॉजी (AI Platform) और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर (Worker Hubs) के जरिए हल करने के मिशन पर काम कर रहा है बेंगलुरु बेस्ड स्टार्टअप Nia.one (Gig Worker Infrastructure Startup).
कंपनी ने अपने इस मॉडल को और तेजी से फैलाने के लिए Elevar Equity से 2.4 मिलियन डॉलर (Seed Funding) जुटा लिए हैं. यह फंडिंग उन बड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाएगी जिनमें शामिल है- नए Niadel हब्स लॉन्च करना, AI सिस्टम Rafiki को और स्मार्ट बनाना और एक मजबूत ऑपरेशनल टीम तैयार करना. Nia.one का लक्ष्य है कि देशभर के रोजगार कॉरिडोर में एक ऐसा नेटवर्क तैयार हो जहां गिग वर्कर सुरक्षित जीवन और स्थिर कमाई के साथ भविष्य बना सकें.
2024 में छाबड़ा और लेफ्टिनेंट कर्नल पुष्कर राज द्वारा शुरू किया गया Nia.one एक फुल-स्टैक, फिजिटल प्लेटफॉर्म है. इसका लक्ष्य है प्रवासी और गिग वर्कर्स को नौकरी, रहने की जगह, भोजन, मोबिलिटी और बेसिक सुविधाएं एक ही इकोसिस्टम में उपलब्ध कराना. Nia.one इन्हें एक साथ जोड़कर वर्कर्स की जिंदगी में 3 बड़े बदलाव लाना चाहता है:
यह मॉडल गिग वर्कर्स को “जॉब से लेकर रहने की जगह तक” एक सुव्यवस्थित अनुभव देता है.
Niadels वह फिजिकल हब हैं जो वर्कर्स की जरूरतों को एक जगह पूरा करते हैं. इन हब्स में मिलता है-
Nia.one का दावा है कि इससे वर्कर्स की सेविंग बढ़ती है, लॉजिस्टिक कंपनियों को स्थिर मैनपावर मिलता है और बार-बार जॉब बदलने की समस्या काफी कम हो जाती है.
Rafiki Nia.one का AI लेयर है, जो वर्कर्स से मिले डाटा के आधार पर-
कंपनी के अनुसार AI आधारित यह सिस्टम रिटेंशन रेट बढ़ाता है, सेविंग सुधारता है और वर्कर्स की जिंदगी को स्थिर बनाता है.
Nia.one सिर्फ एक नौकरी खोजने वाला प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि गिग वर्कर्स की पूरी लाइफ बदलने का मिशन है. अपने Niadel हब्स, AI आधारित Rafiki, सुरक्षित रहने की जगह और बिना बिचौलियों के रोजगार मॉडल की वजह से यह स्टार्टअप गिग इकॉनमी को एक नए स्तर पर ले जा रहा है. फंडिंग के बाद इसकी स्पीड और भी बढ़ेगी और आने वाले समय में यह भारत में गिग वर्कर्स के लिए सबसे बड़ा सपोर्ट नेटवर्क बन सकता है.
एक नई कंपनी जो इनोवेटिव मॉडल पर काम करती है.
स्टार्टअप के शुरुआती विस्तार के लिए मिलने वाली फंडिंग.
फ्रीलांस या अस्थायी काम करने वाले वर्कर्स.
डाटा के आधार पर सही विकल्प सुझाता है.
फिजिकल और डिजिटल दोनों सिस्टम का संयोजन.
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