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पिछले एक दशक में भारत में गिफ्ट देने वाले स्टार्टअप्स की दुनिया ने धीरे-धीरे लेकिन ठोस कदमों से आगे बढ़ना शुरू किया. ट्रैक्सन टेक्नोलॉजीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय गिफ्टिंग स्टार्टअप्स ने 2015 से अब तक करीब 11.59 करोड़ डॉलर यानी 1000 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाई है.
हालांकि, इस पूरे सफर में 2025 की तस्वीर थोड़ी फीकी दिखती है. इस साल अब तक सिर्फ एक ही भारतीय गिफ्टिंग कंपनी, 'इंडिगिफ्ट्स', को निवेश मिला है और वो भी महज 57,600 डॉलर का एंजेल राउंड.
गिफ्टिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा फंडिंग 2022 में देखने को मिली थी. उस साल भारतीय स्टार्टअप्स ने करीब 6.39 करोड़ डॉलर जुटाए. कोरोना के बाद बदले गिफ्टिंग बिहेवियर ने इस सेक्टर को नई दिशा दी. लोग डिजिटल गिफ्ट्स और एक्सपीरियंस-बेस्ड गिफ्टिंग की ओर ज्यादा आकर्षित हुए, जिससे निवेशकों का ध्यान भी इस ओर गया.
2023 में गिफ्टिंग स्टार्टअप्स ने 3.27 करोड़ डॉलर जुटाए और 2024 में यह आंकड़ा और गिरकर 13 लाख डॉलर तक पहुंच गया. 2025 की बात करें तो अब तक की फंडिंग एक्टिविटी बेहद धीमी रही है. सिर्फ एक ही कंपनी को फंडिंग मिली है और वह भी मामूली रकम में.
दुनिया भर के गिफ्टिंग स्टार्टअप्स ने 2015 से अब तक करीब 1.7 अरब डॉलर जुटाए हैं. 2022 में ग्लोबल गिफ्टिंग स्टार्टअप्स ने सबसे ज्यादा 559 मिलियन डॉलर फंडिंग जुटाई थी, लेकिन इसके बाद निवेश की रफ्तार सुस्त हो गई. 2024 में फंडिंग 99.8 मिलियन डॉलर रही — यानी 54% की गिरावट.
Raise ने सबसे ज्यादा फंडिंग जुटाकर ऑनलाइन गिफ्ट कार्ड मार्केट में अपना दबदबा बना लिया है.
| कंपनी का नाम | देश | फंडिंग (USD में) |
|---|---|---|
| Raise | अमेरिका | $220 मिलियन |
| Floward | सऊदी अरब | $190.2 मिलियन |
| Bloom & Wild | यूके | जानकारी नहीं |
ट्रैक्सन की रिपोर्ट कहती है कि गिफ्टिंग सेक्टर अब सिर्फ ऑफलाइन या मौकों तक सीमित नहीं है. यह अब टेक्नोलॉजी बेस्ड और अनुभव-केंद्रित (experience-focused) इंडस्ट्री बन रहा है. डिजिटल गिफ्ट कार्ड, कस्टमाइज़्ड गिफ्टिंग और सब्सक्रिप्शन मॉडल अब इस सेक्टर की पहचान बन रहे हैं.
भारत में यह सेक्टर अब फाउंडर-लेड, डिजिटल-फर्स्ट ब्रांडिंग और स्मार्ट ऑपरेशन्स पर जोर दे रहा है. ट्रैक्सन की को-फाउंडर नेहा सिंह कहती हैं, “भारत धीरे-धीरे परिपक्व हो रहा है और यहां की कंपनियां इनोवेशन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी में नए स्टैंडर्ड सेट कर रही हैं.”
स्टार्टअप इंडिया के तहत सरकार 3 बड़ी योजनाएं चला रही है. इन योजनाओं का मकसद स्टार्टअप्स को शुरुआती फंडिंग, प्रोडक्ट डेवेलपमेंट और विस्तार के समय सहायता देना है. गिफ्टिंग सेक्टर की कंपनियों को इनसे फायदा मिल सकता है. ये तीन स्कीम हैं-
FFS (Fund of Funds for Startups)
Startup India Seed Fund Scheme (SISFS)
Credit Guarantee Scheme for Startups (CGSS)
गिफ्टिंग स्टार्टअप्स के लिए राह आसान नहीं है, लेकिन उम्मीद की किरण ज़रूर है. टेक्नोलॉजी, कस्टमर बिहेवियर में बदलाव और सरकार की योजनाएं.. ये तीनों मिलकर इस इंडस्ट्री को नई दिशा दे सकती हैं. बशर्ते कंपनियां इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान दें.
1. भारत में गिफ्टिंग स्टार्टअप्स ने अब तक कितनी फंडिंग जुटाई है?
करीब 1000 करोड़ रुपये यानी 11.59 करोड़ डॉलर.
2. 2025 में कितनी भारतीय कंपनियों को फंडिंग मिली?
इस साल यानी 2025 में सिर्फ एक स्टार्टअप इंडिगिफ्ट्स को फंडिंग मिली है.
3. गिफ्टिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा फंडिंग किस साल हुई?
2022 में इस सेक्टर में सबसे ज्यादा फंडिंग हुई. उस साल भारतीय स्टार्टअप्स ने करीब 6.39 करोड़ डॉलर जुटाए.
4. कौन सी ग्लोबल कंपनी टॉप पर है फंडिंग के मामले में?
अमेरिका की कंपनी Raise फंडिंग के मामले में $220 मिलियन के साथ टॉप पर रही.
5. क्या सरकार की स्कीम्स से गिफ्टिंग स्टार्टअप्स को मदद मिलती है?
हां, खासतौर पर शुरुआती और विकास के चरण में.