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महेंद्र सिंह धोनी के निवेश वाली कंपनी गरुड़ एयरोस्पेस ने दुनिया की दिग्गज एविएशन कंपनी एयरबस हेलिकॉप्टर्स के साथ हाथ मिलाया है. यह समझौता केवल ड्रोन्स खरीदने का नहीं है, बल्कि यह भारत को वैश्विक ड्रोन इंटेलिजेंस और सर्विस मार्केट के केंद्र में लाने की एक बड़ी कोशिश है. आइए, इस साझेदारी और 'फ्लेक्सरोटर' ड्रोन्स की अद्भुत क्षमताओं को विस्तार से समझते हैं.
11 मार्च 2026 को गरुड़ एयरोस्पेस ने एयरबस हेलिकॉप्टर्स के साथ 18 फ्लेक्सरोटर (Flexrotor) अनमैन्ड एरियल सिस्टम के अधिग्रहण के लिए अनुबंध किया है.
लीजिंग मॉडल: गरुड़ इन ड्रोन्स को अपने वैश्विक बेड़े में शामिल करेगा और ग्राहकों को 'ड्राय लीज' और 'वेट लीज' (स्टाफ के साथ या बिना स्टाफ के) दोनों मॉडल पर उपलब्ध कराएगा.
क्या है टारगेट: इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हाई-एंड्योरेंस एरियल इंटेलिजेंस और निगरानी समाधान प्रदान करना है.
एयरबस का फ्लेक्सरोटर कोई साधारण ड्रोन नहीं है. यह एक हल्का सामरिक (Tactical) UAS है, जिसे सबसे कठिन मिशनों के लिए बनाया गया है.
हैरान कर देने वाला एंड्योरेंस: यह ड्रोन एक बार उड़ान भरने के बाद 12 से 14 घंटे तक लगातार हवा में रह सकता है.
वजन और क्षमता: इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन लगभग 25 किलोग्राम (55 पाउंड) है.
कम जगह में काम: इसे उड़ने या लैंड करने के लिए किसी रनवे की जरूरत नहीं है. यह महज 3.7 x 3.7 मीटर (लगभग 12x12 फीट) की छोटी सी जगह से खुद ही टेक-ऑफ और रिकवरी कर सकता है.
तेजी से तैनाती: यह सिर्फ 30 मिनट से भी कम समय में ट्रांसपोर्ट मोड से उड़ान भरने के लिए तैयार हो जाता है.
गरुड़ एयरोस्पेस इन ड्रोन्स का उपयोग कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में करने जा रहा है:
इंफ्रास्ट्रक्चर: तेल और गैस पाइपलाइनों की निगरानी, पावर लाइनों का निरीक्षण, रेलवे और हाईवे की सुरक्षा.
आपदा प्रबंधन: जंगलों की आग (Wildfire) की निगरानी, आपदा के समय सर्च और रेस्क्यू (खोज और बचाव) ऑपरेशन.
कानून व्यवस्था: पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए निगरानी और डेटा एकत्र करना.
रक्षा: समुद्री जहाजों या दुर्गम सीमा क्षेत्रों से खुफिया जानकारी जुटाना.
गरुड़ एयरोस्पेस के संस्थापक और सीईओ अग्निश्वर जयप्रकाश ने बताया कि यह साझेदारी उनके अंतरराष्ट्रीय विस्तार के लिए एक मील का पत्थर है.
अनुभव: कंपनी अब तक 5,000 से अधिक ड्रोन बना चुकी है और 500 से अधिक सरकारी और निजी क्लाइंट्स को सेवाएं दे रही है.
मार्केट लीडर: भारत के एग्री-ड्रोन (खेती वाले ड्रोन) सेगमेंट में गरुड़ की 30% बाजार हिस्सेदारी है.
उड़ान का रिकॉर्ड: कंपनी के पास 10 लाख से अधिक घंटों का उड़ान अनुभव (Flight Hours) है.
एयरबस हेलिकॉप्टर्स के साथ यह जुगलबंदी गरुड़ एयरोस्पेस को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती ड्रोन कंपनियों की सूची में शीर्ष पर ले जाएगी. फ्लेक्सरोटर की लंबी दूरी तक उड़ने की क्षमता और छोटे पदचिह्न (Small Footprint) इसे भविष्य के 'मिशन-क्रिटिकल' ऑपरेशंस के लिए सबसे सटीक हथियार बनाते हैं. एमएस धोनी का भरोसा और एयरबस की तकनीक मिलकर भारत के ड्रोन इकोसिस्टम को एक नई ऊंचाई देंगे.
1- गरुड़ एयरोस्पेस ने एयरबस से कितने ड्रोन खरीदने का समझौता किया है?
गरुड़ एयरोस्पेस एयरबस हेलिकॉप्टर्स से 18 फ्लेक्सरोटर (Flexrotor) ड्रोन्स खरीदेगा.
2- फ्लेक्सरोटर ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत क्या है?
इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 12-14 घंटे का एंड्योरेंस (हवा में रहने का समय) और बहुत कम जगह से टेक-ऑफ करने की क्षमता है.
3- क्या यह ड्रोन खेती के काम आएगा?
मुख्य रूप से यह निगरानी, बुनियादी ढांचे के निरीक्षण और सुरक्षा मिशनों के लिए है, लेकिन इसके उच्च-क्षमता वाले सेंसर कृषि डेटा संग्रह में भी मदद कर सकते हैं.
4- गरुड़ एयरोस्पेस में एमएस धोनी की क्या भूमिका है?
महेंद्र सिंह धोनी गरुड़ एयरोस्पेस के ब्रांड एंबेसडर और एक निवेशक (Shareholder) हैं.
5- फ्लेक्सरोटर को लॉन्च करने के लिए कितनी जगह चाहिए?
इसे लॉन्च और रिकवरी के लिए केवल 3.7 मीटर x 3.7 मीटर (लगभग 12 फीट बाई 12 फीट) की जगह की आवश्यकता होती है.
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