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गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज के खिलाफ ED ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर 3 फाउंडर्स को गिरफ्तार किया है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया में जाना-माना नाम गेम्सक्राफ्ट (Gameskraft) इस समय कानूनी और वित्तीय संकटों के भंवर में फंसा हुआ है. पहले तो कंपनी के पूर्व CFO द्वारा किए गए ₹270 करोड़ से अधिक के बड़े वित्तीय घोटाले (Scam) ने कॉरपोरेट जगत को हिला कर रख दिया. वहीं अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस स्टार्टअप के फाउंडर्स को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार कर लिया है.
धोखाधड़ी, जालसाजी और सट्टेबाजी के इस खेल ने कंपनी की साख पर गहरा दाग लगा दिया है. गेम्सक्राफ्ट का मामला भारतीय कॉरपोरेट इतिहास के एक बड़े 'इनसाइडर फ्रॉड' और कानूनी कार्यवाहियों में से बनकर उभरा है. आइए समझते हैं इस पूरे मामले की परतें.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है. ED की यह कार्रवाई उन कई FIRs पर आधारित है जो पीड़ितों द्वारा की गई आत्महत्याओं और धोखाधड़ी के आरोपों के बाद दर्ज की गई थीं.
छापेमारी: कर्नाटक और दिल्ली-NCR में 17 ठिकानों पर तलाशी ली गई.
गिरफ्तारी: कंपनी के 3 संस्थापकों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया गया है.
आरोप: कंपनी पर ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर सट्टेबाजी और अवैध धन के हेरफेर का आरोप है.
सितंबर 2025 में कंपनी के भीतर एक और बड़ा विस्फोट हुआ था. CFO रमेश प्रभु ने खुद एक ईमेल के जरिए कबूल किया था कि उन्होंने पिछले 4 सालों में कंपनी के ₹270.43 करोड़ का गबन किया. उन्होंने यह पैसा अपने व्यक्तिगत फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में लगा दिया, जहां उन्हें भारी नुकसान हुआ.
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) रमेश प्रभु ने इस गबन को छिपाने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाए:
नकली दस्तावेज: रमेश प्रभु ने जाली म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट तैयार किए, ताकि कंपनी को लगे कि पैसा सुरक्षित निवेश में है.
बैंक स्टेटमेंट्स से छेड़छाड़: RBL बैंक के एक खाते का उपयोग कर फंड्स को अपने पर्सनल अकाउंट में डायवर्ट किया और बैंक रिकॉर्ड्स बदल दिए.
राइट-ऑफ: आखिरकार कंपनी को FY25 के अकाउंट्स में पूरे ₹270.43 करोड़ राइट-ऑफ (बट्टे खाते में डालना) करने पड़े.
जब सितंबर 2025 में ये मामला खुला तो रमेश प्रभु के खिलाफ बेंगलुरु में FIR दर्ज की गई, जिसमें उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IPC की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं:
एक CFO किसी भी कंपनी के वित्त का संरक्षक होता है. रमेश प्रभु, जो पहले एक फिनटेक स्टार्टअप "थ्री व्हील्स यूनाइटेड" के को-फाउंडर भी रह चुके थे, उनसे ऐसी उम्मीद नहीं थी. इस घटना ने साबित कर दिया है कि आंतरिक ऑडिट सिस्टम (Internal Audit) और कॉरपोरेट कंट्रोल कितने कमजोर हो सकते हैं.
2017 में पृथ्वी सिंह द्वारा स्थापित यह कंपनी पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रही थी. दिल्ली में रियल-मनी गेमिंग पर प्रतिबंध के बाद कंपनी ने Rummyculture और Pocket52 जैसे ऐप्स बंद कर दिए थे. अब CFO के घोटाले के बाद संस्थापकों की गिरफ्तारी ने कंपनी के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं.
गेम्सक्राफ्ट का मामला उन सभी स्टार्टअप्स और कॉरपोरेट हाउस के लिए एक चेतावनी है जो वित्तीय पारदर्शिता (Transparency) को हल्के में लेते हैं. सट्टेबाजी और गबन का यह कॉकटेल न केवल निवेशकों का पैसा डूबाता है, बल्कि पूरे इकोसिस्टम का भरोसा तोड़ता है. अब यह मामला अदालतों में है, जहाँ रमेश प्रभु और संस्थापकों को लंबी जेल की सजा हो सकती है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 स्टार्टअप (Startup) क्या होता है?
एक नई कंपनी जो नवाचार के माध्यम से किसी समस्या का समाधान करती है.
Q2 स्टार्टअप्स को फंडिंग कैसे मिलती है?
वेंचर कैपिटल, एंजेल इन्वेस्टर्स या सरकारी ग्रांट्स के माध्यम से.
Q3 कॉरपोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) क्या है?
यह उन नियमों और प्रक्रियाओं का समूह है, जिसके माध्यम से किसी कंपनी को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चलाया जाता है.
Q4 F&O ट्रेडिंग क्या है?
यह शेयर बाजार का एक जोखिम भरा हिस्सा है (डेरिवेटिव्स), जहाँ भविष्य की कीमतों पर दांव लगाया जाता है.