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भारत के रक्षा क्षेत्र में अब नई सोच और स्टार्टअप्स (Startups) का संगम होने जा रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने देश में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक नई स्टार्टअप नीति लाने की घोषणा की है. इस नीति का मकसद है कि उभरते हुए नवाचारों को सीधे रक्षा अनुप्रयोगों (Defence Applications) से जोड़ा जाए, ताकि भारत रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बन सके.
डीआरडीओ पहले ही करीब 2000 उद्योगों (Industries) का एक मजबूत नेटवर्क बना चुका है, जिन्हें वह शून्य शुल्क (Zero-Cost Technology Transfer) पर तकनीक दे रहा है. इससे देश में घरेलू उत्पादन और रक्षा उपकरण निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है.
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं. डीआरडीओ के माध्यम से देश के स्टार्टअप्स (Startups), एमएसएमई (MSMEs) और शैक्षणिक संस्थानों (Academic Institutions) को इस मिशन से जोड़ा गया है. यह पहल न सिर्फ ‘मेक इन इंडिया (Make in India)’ को बढ़ावा दे रही है, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat)’ की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो रही है.
डीआरडीओ ने अपने पेटेंट्स (Patents) भारतीय उद्योगों के लिए नि:शुल्क उपलब्ध (Free Access) कर दिए हैं. साथ ही, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TDF) के जरिए स्टार्टअप्स और एमएसएमई को वित्तीय मदद दी जा रही है. अब तक 26 नई तकनीकें इस योजना के तहत विकसित की जा चुकी हैं. इनमें से दो प्रणालियां पीएसएलवी मिशन (PSLV Mission) के साथ अंतरिक्ष में भी भेजी गईं. सरकार ने इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त फंड भी स्वीकृत किया है.
डीआरडीओ ने रक्षा और एयरोस्पेस (Aerospace) क्षेत्र में इनोवेशन बढ़ाने के लिए डेयर टू ड्रीम प्रतियोगिता (Dare to Dream Contest) के चार संस्करण पूरे कर लिए हैं. इसका उद्देश्य युवाओं और स्टार्टअप्स को नई तकनीक पर काम करने के लिए प्रेरित करना है. इसके अलावा, डीआरडीओ की 24 प्रयोगशालाओं (Labs) की विश्वस्तरीय टेस्टिंग सुविधाएं
अब उद्योगों के लिए खोल दी गई हैं. ये सभी सुविधाएं Defence Testing Portal पर लिस्टेड हैं.
रक्षा अनुसंधान विभाग ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट बजट (R&D Budget) का 25% हिस्सा स्टार्टअप्स, एमएसएमई और यूनिवर्सिटीज के लिए रिजर्व किया है. साथ ही, देशभर में 15 DRDO Industry-Academia Centres of Excellence बनाए गए हैं, जहां 82 से अधिक रिसर्च क्षेत्रों में काम चल रहा है. इनका मकसद है कि उद्योग, शिक्षाविद और शोधकर्ता मिलकर भविष्य की रक्षा तकनीकों (Future Defence Technologies) को विकसित करें.
डीआरडीओ अब उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के Defence Industrial Corridors में भी Knowledge Partner की भूमिका निभा रहा है. यहां स्टार्टअप्स और एमएसएमई को रक्षा उत्पाद निर्माण में सहायता दी जा रही है. साथ ही, iDEX (Innovations for Defence Excellence) पहल के तहत स्टार्टअप्स और रिसर्चर्स को अनुदान देकर रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए नई तकनीकें विकसित की जा रही हैं.
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, डीआरडीओ का 2025-26 के लिए बजट अनुमान ₹26,816.82 करोड़ रखा गया है. यह आंकड़ा बताता है कि सरकार रक्षा अनुसंधान में लगातार निवेश बढ़ा रही है, ताकि भारत की रक्षा तकनीक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने.
डीआरडीओ की नई स्टार्टअप नीति भारत के रक्षा क्षेत्र को नवाचार, तकनीक और आत्मनिर्भरता के नए दौर में ले जाएगी. जहां पहले रक्षा तकनीक केवल सरकारी प्रयोगशालाओं तक सीमित थी, अब वह युवाओं, स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों तक पहुंच रही है. इससे भारत न सिर्फ रक्षा उत्पादन में स्वदेशी बनेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर तकनीकी शक्ति के रूप में भी उभरेगा.
डीआरडीओ भारत की रक्षा तकनीक और अनुसंधान से जुड़ी सरकारी एजेंसी है.
रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप्स और नवाचार को बढ़ावा देना.
यह एक योजना है जिसके तहत स्टार्टअप्स को नई तकनीक बनाने के लिए फंड दिया जाता है.
डीआरडीओ की प्रतियोगिता जो रक्षा नवाचार को बढ़ावा देती है.
हां, अब यह शून्य शुल्क पर उपलब्ध कराई जा रही हैं.
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