DPIIT ने जारी की Startup India FoF 2.0 की गाइडलाइन्स, जानिए कैसे मिलेगा स्टार्टअप्स को फायदा

सरकार ने Startup India Fund of Funds 2.0 के लिए नए ऑपरेशनल गाइडलाइन्स जारी किए हैं, जिनका मकसद स्टार्टअप्स तक फंडिंग को ज्यादा व्यवस्थित और असरदार तरीके से पहुंचाना है. 10,000 करोड़ रुपये के इस फंड के जरिए खास तौर पर डीप टेक, मैन्युफैक्चरिंग और शुरुआती स्टेज के स्टार्टअप्स को सपोर्ट मिलेगा.
DPIIT ने जारी की Startup India FoF 2.0 की गाइडलाइन्स, जानिए कैसे मिलेगा स्टार्टअप्स को फायदा

सरकार ने स्टार्टअप सेक्टर को और मजबूत बनाने के लिए Startup India Fund of Funds 2.0 की ऑपरेशनल गाइडलाइन्स जारी कर दिए हैं.

सरकार ने स्टार्टअप सेक्टर को और मजबूत बनाने के लिए Startup India Fund of Funds 2.0 की ऑपरेशनल गाइडलाइन्स जारी कर दिए हैं. ये गाइडलाइन्स Department for Promotion of Industry and Internal Trade यानी DPIIT द्वारा जारी किए गए हैं, जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत काम करता है.

इस योजना के तहत कुल 10,000 करोड़ रुपये का फंड बनाया गया है, जिसका मकसद देश के स्टार्टअप्स तक पूंजी पहुंचाना और निवेश को ज्यादा संगठित तरीके से आगे बढ़ाना है. खास बात ये है कि सरकार सीधे निवेश नहीं करेगी, बल्कि फंड्स के जरिए निवेश को बढ़ावा देगी.

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योजना कैसे काम करेगी: AIF के जरिए निवेश

निवेश प्रक्रिया: इस योजना के तहत पैसा सीधे स्टार्टअप्स को नहीं दिया जाएगा, बल्कि SEBI-रजिस्टर्ड Category I और II Alternative Investment Funds (AIFs) के जरिए लगाया जाएगा. ये AIFs आगे DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में निवेश करेंगे.

प्राइवेट निवेश को बढ़ावा: इस मॉडल से प्राइवेट निवेशकों को भी आकर्षित किया जाएगा, ताकि ज्यादा पूंजी स्टार्टअप सेक्टर में आए और रिस्क भी संतुलित रहे.

कौन करेगा योजना का संचालन: SIDBI की अहम भूमिका

इम्प्लीमेंटेशन एजेंसी: इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी Small Industries Development Bank of India यानी SIDBI को दी गई है, जो AIFs का चयन और उनकी निगरानी करेगा.

भविष्य की योजना: DPIIT एक और इम्प्लीमेंटेशन एजेंसी को जोड़ने की तैयारी में है, जिससे इस योजना की पहुंच और बेहतर हो सके.

फंडिंग में क्या होगा खास: अलग-अलग कैटेगरी में फंड

डीप टेक और मैन्युफैक्चरिंग: गाइडलाइन्स में AIFs को अलग-अलग सेगमेंट में बांटा गया है जैसे डीप टेक फंड, माइक्रो वेंचर कैपिटल, टेक्नोलॉजी आधारित मैन्युफैक्चरिंग और जनरल फंड.

नियम तय किए गए: हर कैटेगरी के लिए फंड साइज, सरकारी योगदान और प्राइवेट निवेश की न्यूनतम सीमा तय की गई है ताकि पैसा सही सेक्टर में जाए.

चयन प्रक्रिया कैसी होगी: दो चरणों में होगा चयन

पहला चरण: इम्प्लीमेंटेशन एजेंसी पहले AIFs की स्क्रीनिंग और ड्यू डिलिजेंस करेगी.

दूसरा चरण: इसके बाद एक वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कमेटी अंतिम चयन करेगी, जो टीम के अनुभव और निवेश रणनीति को ध्यान में रखेगी.

एक्सपर्ट्स की कमेटी

विशेषज्ञों की भूमिका: इस कमेटी में Vallabh Bhansali, Ashok Jhunjhunwala, Renu Swarup, Chintan Vaishnav और Rajesh Gopinathan जैसे अनुभवी लोग शामिल हैं.

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स्टार्टअप्स को क्या फायदा मिलेगा: बेहतर फंडिंग और सपोर्ट

कैपिटल फ्लो में सुधार: इस योजना से स्टार्टअप्स को आसानी से फंड मिलेगा और निवेश का प्रोसेस ज्यादा ट्रांसपेरेंट होगा.

इकोसिस्टम डेवलपमेंट: फंड से मिलने वाले रिटर्न का कुछ हिस्सा मेंटरशिप, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सपोर्ट सिस्टम पर भी खर्च किया जाएगा.

Conclusion

Startup India Fund of Funds 2.0 एक ऐसा कदम है जो भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई दिशा दे सकता है. इससे न सिर्फ निवेश बढ़ेगा बल्कि नए आइडियाज और इनोवेशन को भी मजबूती मिलेगी. अगर सही तरीके से लागू हुआ तो भारत ग्लोबल स्टार्टअप हब बनने की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ सकता है.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 क्या सरकार सीधे मेरे स्टार्टअप में निवेश करेगी?

नहीं, सरकार FoF 2.0 के तहत उन वेंचर कैपिटल फंड्स (AIFs) को पैसा देगी, जो आगे चलकर आपके जैसे होनहार स्टार्टअप्स में निवेश करेंगे.

Q2 इस स्कीम का लाभ लेने के लिए क्या मेरा स्टार्टअप मान्यता प्राप्त होना चाहिए?

हां, केवल वही स्टार्टअप इस फंड से लाभ पा सकते हैं जो DPIIT (Startup India) के साथ रजिस्टर्ड हैं.

Q3 डीप-टेक (Deep Tech) स्टार्टअप्स क्या होते हैं?

वे स्टार्टअप्स जो वैज्ञानिक खोज या इंजीनियरिंग की बहुत गहरी और नई तकनीकों (जैसे AI, बायोटेक, रोबोटिक्स) पर आधारित होते हैं.

Q4 'फंड ऑफ फंड्स' शब्द का क्या मतलब है?

इसका मतलब है 'फंड्स का फंड'. सरकार एक बड़ा फंड बनाती है जो सीधे बिजनेस में पैसा न लगाकर दूसरे छोटे-छोटे इन्वेस्टमेंट फंड्स में पैसा लगाता है.

Q5 यह स्कीम पुरानी वाली स्कीम से कैसे अलग है?

FoF 2.0 में ज्यादा स्पष्टता है, इसे अलग-अलग सेक्टरों (जैसे डीप-टेक) के हिसाब से बांटा गया है और इसमें निजी पूंजी जुटाने पर ज्यादा जोर दिया गया है.

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