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देश में छोटे और मझोले व्यवसायों (Small Businesses) के लिए बड़ी राहत की घोषणा हुई है. सरकार ने Small Companies की परिभाषा को बदलते हुए टर्नओवर (Turnover Limit) और पेड-अप कैपिटल (Paid-Up Capital) की लिमिट बढ़ा दी है. इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिलेगा जो अब तक नियमित कंप्लायंस (Compliance Rules) के बोझ तले दबे हुए थे.
मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (Ministry of Corporate Affairs) ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. अब जिन कंपनियों का सालाना कारोबार 100 करोड़ रुपये तक है और पेड-अप कैपिटल 10 करोड़ रुपये तक है, वह Small Company के दायरे में आएंगी. इससे पहले लिमिट सिर्फ 40 करोड़ और 4 करोड़ थी. नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं और लाखों कंपनियों को इससे बड़ी राहत मिल सकती है.
सरकार ने Companies Act के तहत Small Companies की परिभाषा बदल दी है. नई बनाम पुरानी लिमिट- टेबल में समझें.
| कैटेगरी | पुरानी लिमिट | नई लिमिट |
|---|---|---|
| Paid-Up Capital | ₹4 Crore | ₹10 Crore |
| Annual Turnover | ₹40 Crore | ₹100 Crore |
अब ज्यादा संख्या में कंपनियां Small Company की श्रेणी में आएंगी. यह कदम Ease of Doing Business को बढ़ाने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है.
भारत में MSME सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है. पहले तय लिमिट के कारण बड़ी संख्या में कंपनियों को Small Company का लाभ नहीं मिलता था. कंप्लायंस का बोझ छोटा बिजनेस संभाल नहीं पाता. 100 करोड़ की नई लिमिट अधिक यथार्थवादी मानी जा रही है. डिजिटल बिजनेस और स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार को देखते हुए यह बदलाव जरूरी था.
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नई परिभाषा से कंपनियों को कई बड़े फायदे मिलेंगे:
Small Companies को कैश फ्लो स्टेटमेंट बनाने की जरूरत नहीं होती. यह छोटा लेकिन बड़ा ऑपरेशनल राहत है.
ज्यादा लंबी-चौड़ी रिपोर्टिंग की जरूरत नहीं. एक सिंपल बोर्ड रिपोर्ट से काम चल जाता है.
किसी नियम के उल्लंघन पर पेनाल्टी बहुत कम लगती है.
जहां बड़ी कंपनियों को मोटी फीस देनी पड़ती है, वही Small Companies बहुत कम फीस में काम कर लेती हैं.
Small Companies के बीच मर्जर का प्रोसेस बेहद आसान और तेज होता है. किसी भी कोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती.
Small Companies को साल में सिर्फ दो बोर्ड मीटिंग करनी होती है: एक साल के पहले हिस्से में और एक साल के दूसरे हिस्से में. दोनों के बीच कम से कम 90 दिन का गैप जरूरी है.
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सरकार का फोकस अगले 5 वर्षों में भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है. यह कदम उसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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नई परिभाषा के लागू होने से छोटे और मझोले उद्यमों को बड़ी राहत मिलेगी. कम कंप्लायंस, कम पेनाल्टी, सरल रिपोर्टिंग और तेज मर्जर जैसे फायदे भारत के बिजनेस इकोसिस्टम को और मजबूत बनाएंगे. यह बदलाव Startup India, Digital India और Make in India जैसे कार्यक्रमों के मकसद को भी मजबूत करेगा. आने वाले समय में Small Companies की ग्रोथ भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा सकती है.
एक रजिस्टर्ड बिजनेस इकाई जिसे कानून मान्यता देता है.
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वह वास्तविक राशि जो शेयरहोल्डर्स ने कंपनी में निवेश की हो.
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