भारत बनेगा आत्मनिर्भर! Rare-Earth-Free मोटर बना रहा ये स्टार्टअप, अब जुटाई 52 करोड़ रुपये की फंडिंग

बेंगलुरु स्थित Chara Technologies ने सीरीज़ A फंडिंग राउंड में 52 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जिसका नेतृत्व Arkam Ventures ने किया. कंपनी रेयर-अर्थ-फ्री मोटर्स (Rare-Earth-Free Motors) बनाती है और अब इस निवेश से अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 5 गुना बढ़ाने जा रही है. इसका लक्ष्य भारत में टिकाऊ और सस्ते इलेक्ट्रिक मोटर्स बनाना है जो चीन पर निर्भर न हों.
भारत बनेगा आत्मनिर्भर! Rare-Earth-Free मोटर बना रहा ये स्टार्टअप, अब जुटाई 52 करोड़ रुपये की फंडिंग

बेंगलुरु की इलेक्ट्रिक मोटर निर्माता कंपनी Chara Technologies ने अपने सीरीज़ A राउंड में करीब ₹52 करोड़ (USD 6 मिलियन) जुटाए हैं. इस राउंड का नेतृत्व Arkam Ventures ने किया है, जबकि इसमें Exfinity Venture Partners, Kalaari Capital और IIMA Ventures ने भी हिस्सा लिया है.

यह स्टार्टअप rare-earth-free motors और कंट्रोलर बनाता है. कंपनी इस फंड का इस्तेमाल नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट (Manufacturing Unit) लगाने के साथ-साथ टेस्टिंग फैसिलिटी और प्रोडक्ट डेवलपमेंट (Product Development) को तेज करने में करेगी.

नई फैक्ट्री से बढ़ेगी प्रोडक्शन क्षमता

कंपनी के फाउंडर और CEO भक्त केशवाचार (Bhaktha Keshavachar) के अनुसार, नई फैक्ट्री और टेस्टिंग सेंटर बेंगलुरु में स्थापित किए जाएंगे. इसका लक्ष्य मौजूदा उत्पादन को 20,000 यूनिट से बढ़ाकर 1 लाख यूनिट सालाना करना है. कंपनी आने वाले समय में हल्के, हाई-स्पीड मोटर्स और इंडस्ट्रियल वेरिएंट्स भी लॉन्च करेगी. इसके अलावा कंट्रोल्स, एल्गोरिद्म्स और सिस्टम एफिशिएंसी में सुधार पर भी ध्यान देगी.

बिना रेयर-अर्थ मटीरियल के मोटर बनाने की दिशा में काम

Chara Technologies की शुरुआत 2019 में भक्त केशवाचार, महालिंगम कौशिक और रवि प्रसाद ने की थी. उनका लक्ष्य था ऐसा इलेक्ट्रिक मोटर सिस्टम (Electric Powertrain System) बनाना, जो rare-earth magnets पर निर्भर न हो.

दरअसल, पारंपरिक मोटर्स में इस्तेमाल होने वाले ये मैग्नेट्स मोटर की कुल लागत का लगभग 40% होते हैं और ज्यादातर चीन से आयात किए जाते हैं. इससे न सिर्फ कीमत में अस्थिरता आती हैष बल्कि सप्लाई चेन पर निर्भरता भी बढ़ जाती है.

क्या है ‘सिंक्रोनस रिलक्टेंस आर्किटेक्चर’?

Chara ने एक नई तकनीक अपनाई है, जिसे Synchronous Reluctance Architecture कहा जाता है. इस डिजाइन में किसी भी प्रकार के मैग्नेट की जरूरत नहीं होती. कंपनी का दावा है कि इससे मोटर की लागत में 15–20% की कमी आती है और परफॉर्मेंस पारंपरिक PMSM (Permanent Magnet Synchronous Motors) के बराबर रहती है. कंपनी के सभी कंट्रोल सिस्टम, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और एल्गोरिद्म्स इन-हाउस विकसित किए जाते हैं और सारे उत्पाद भारत में ही डिज़ाइन और मैन्युफैक्चर किए जाते हैं.

किन वाहनों में लगती हैं Chara की मोटर्स?

कंपनी इस समय दोपहिया (Two-Wheeler), तिपहिया (Three-Wheeler), चौपहिया (Four-Wheeler) वाहनों के साथ ही कृषि और औद्योगिक मशीनों (Industrial Equipment) के लिए मोटर बनाती है. इसके करीब 100 ग्राहक (Customers) हैं, जिनमें Greaves Cotton, BullWork, Sonalika, VST जैसे नाम शामिल हैं. कंपनी ने Greaves Cotton के साथ पार्टनरशिप भी की है, जिसके तहत दोनों कंपनियां Aurangabad में मोटर्स और कंट्रोलर का संयुक्त उत्पादन करेंगी.

रेवेन्यू टारगेट और फ्यूचर प्लान

Chara Technologies अगले वित्त वर्ष में अपनी राजस्व (Revenue) को 6 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रख रही है. कंपनी उम्मीद कर रही है कि FY27 तक करीब 40,000 मोटर्स बेचेगी. भक्त केशवाचार ने कहा कि नई फैक्ट्री से उन्हें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी.

पर्यावरण को होने वाला नुकसान होगा कम

कंपनी का ‘मैग्नेट-फ्री’ फोकस सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक पर्यावरणीय पहल (Environmental Initiative) भी है. महालिंगम कौशिक (Co-founder & CTO) के अनुसार, “Rare-earth materials की माइनिंग पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक है. यूरोप के कई OEM अब ऐसे मोटर्स की तलाश में हैं जो टिकाऊ हों और पूरे जीवनचक्र में कम प्रदूषण फैलाएं.”

पेटेंट और सर्टिफिकेशन

कंपनी ने अब तक 9 पेटेंट के लिए आवेदन किया है, जिनमें से एक को मंजूरी मिल चुकी है. इसके उत्पादों को ARAI और ICAT जैसी सरकारी एजेंसियों से अप्रूवल भी मिल चुका है. इसका मतलब है कि कंपनी के प्रोडक्ट्स अब ऑटोमोटिव स्टैंडर्ड्स (Automotive Standards) के अनुरूप हैं और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार हैं.

राजस्व मॉडल और एक्सपेंशन प्लान

Chara का B2B मॉडल (Business-to-Business) है. यह अपने मोटर्स और कंट्रोलर सीधे OEMs (Original Equipment Manufacturers) और पार्ट सप्लायर को बेचती है. कंपनी भविष्य में अपने मोटर कंट्रोल सॉफ्टवेयर (Motor Control Software) को भी लाइसेंस करने की योजना बना रही है ताकि अतिरिक्त रेवेन्यू जेनरेट किया जा सके. भारत के अलावा कंपनी की मौजूदगी बेल्जियम और इटली में भी है, जहां से यह यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में विस्तार करेगी.

Conclusion

Chara Technologies का लक्ष्य भारत को रेयर-अर्थ-फ्री मोटर टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाना है. यह सिर्फ एक बिजनेस कहानी नहीं बल्कि भारत की डीप-टेक क्रांति (Deep-Tech Revolution) का संकेत है. इस निवेश के साथ कंपनी न सिर्फ घरेलू बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारतीय इंजीनियरिंग को नई पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1- स्टार्टअप क्या होता है?

ऐसी नई कंपनी जो किसी नए विचार या टेक्नोलॉजी पर काम करती है.

2- सीरीज A फंडिंग क्या होती है?

यह शुरुआती निवेश राउंड होता है जिसमें स्टार्टअप विस्तार के लिए पैसा जुटाता है.

3- रेयर-अर्थ एलिमेंट्स क्या हैं?

ऐसे खनिज जो इलेक्ट्रॉनिक और मोटर मैन्युफैक्चरिंग में जरूरी होते हैं और जमीन से निकलते हैं, जिनकी काफी कमी है.

4- डीप-टेक कंपनी का क्या मतलब है?

जो कंपनी वैज्ञानिक या तकनीकी इनोवेशन पर आधारित प्रोडक्ट बनाती है.

5- क्या Chara जैसी कंपनियां भारत को आत्मनिर्भर बना सकती हैं?

हां, ऐसी इनोवेटिव कंपनियां भारत को EV टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बना रही हैं.

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