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दिल्ली में शनिवार को चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (Chandigarh University) ने भारत का सबसे बड़ा यूनिवर्सिटी-प्रेरित स्टार्टअप लॉन्चपैड "कैंपस टैंक" (Campus Tank) शुरू किया. इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह (Jitendra Singh) मौजूद रहे. उन्होंने इस यूनिवर्सिटी की पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सोच के साथ मेल खाता बताया और कहा कि इससे देशभर के युवाओं को बड़ा मंच मिलेगा.
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू (Satnam Singh Sandhu) ने कहा कि यह मंच युवाओं के लिए एक ऐसा इकोसिस्टम (Ecosystem) तैयार करेगा जहां शिक्षा, निवेशक और उद्योग साथ मिलकर काम करेंगे. उन्होंने बताया कि पहले चरण में ही इस प्रोग्राम को जबरदस्त रिस्पॉन्स (Response) मिला है.
कैंपस टैंक एक यूथ एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (Youth Entrepreneurship Program) है, जो भारत में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है. यह पूरी तरह से स्वदेशी पहल है और इसका मकसद युवा उद्यमियों को बिजनेस आइडिया (Business Idea) से लेकर ग्रोथ (Growth) तक हर स्टेप पर मदद करना है.
इस लॉन्चपैड की शुरुआत होते ही पहले चरण में 20 हजार से ज्यादा युवा रजिस्टर्ड हुए. इसके अलावा 6 हजार स्टार्टअप्स पहले से इस प्रोग्राम का हिस्सा हैं. टारगेट है कि इस चरण में कम से कम 1000 स्टार्टअप्स को प्लेटफॉर्म पर लाया जाए और इनमें से 300 को आगे ग्रोथ की दिशा दी जाए.
जितेंद्र सिंह ने कहा कि कैंपस टैंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं और विजन के साथ पूरी तरह मेल खाता है. यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (Public-Private Partnership) को आसान बनाएगा और स्टार्टअप्स के लिए मजबूत नींव रखेगा.
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की प्रो-चांसलर हिमानी सूद (Himani Sood) ने कहा कि इस पहल में एंजेल इंवेस्टर्स (Angel Investors), कारोबारी और एकेडमी, सभी एक मंच पर आए हैं. यह इकोसिस्टम युवाओं को नेटवर्किंग और फंडिंग (Funding) के अवसर देगा.
हिमानी सूद ने बताया कि भारत के कुल स्टार्टअप्स में से 51 प्रतिशत छोटे शहरों यानी टियर-2 (Tier-2) और टियर-3 (Tier-3) सिटीज से आते हैं. इसका मतलब यह है कि अब स्टार्टअप कल्चर (Startup Culture) सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है.
भारत आज दुनिया में तीसरे नंबर का स्टार्टअप इकोसिस्टम है. लक्ष्य है कि 2047 तक हम पहले नंबर पर आएं. हिमानी सूद ने भरोसा जताया कि अगर इसी तरह युवाओं को मौका मिलता रहा तो यह बिल्कुल संभव है.
स्टार्टअप अब भारत में सिर्फ एक बिजनेस नहीं, बल्कि कल्चर बन चुका है. हर युवा को मौका दिया जा रहा है और सरकार से लेकर यूनिवर्सिटी तक, सब मिलकर एक इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं.
कैंपस टैंक जैसी पहल भारत के स्टार्टअप कल्चर को नई दिशा देने वाली है. इससे छोटे शहरों तक उद्यमिता का विस्तार होगा और लाखों युवाओं को नौकरी खोजने की बजाय खुद बिजनेस खड़ा करने का मौका मिलेगा. आने वाले समय में भारत वाकई दुनिया का स्टार्टअप हब (Startup Hub) बन सकता है.
नया और इनोवेटिव बिजनेस आइडिया से शुरू किया गया कारोबार स्टार्टअप कहलाता है.
अच्छा आइडिया, टीम और फंडिंग जरूरी होती है.
जो लोग शुरुआती स्टार्टअप्स में पैसा लगाते हैं, उन्हें एंजेल इंवेस्टर कहते हैं.
जिस स्टार्टअप की वैल्यू 1 अरब डॉलर से ज्यादा हो जाए, उसे यूनिकॉर्न कहते हैं.
यह भारत सरकार की एक योजना है जो स्टार्टअप्स को मदद और फंडिंग देती है.
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