बायोटेक स्टार्टअप PeelOn ने उठाई ₹8.3 करोड़ की Funding, बनाया है गजब का प्रोडक्ट, प्लास्टिक से दिला रहा निजात!

बायोटेक स्टार्टअप PeelOn ने अपनी पहली फंडिंग राउंड में 1 मिलियन डॉलर जुटाए हैं, जिससे इसका वैल्यूएशन 7.9 मिलियन डॉलर हो गया है. यह पैसा रिसर्च, प्रोडक्शन और ग्लोबल मार्केटिंग में खर्च होगा. PeelOn पौधों से बने ऐसे पैकेजिंग फिल्म्स बनाता है, जो फलों और सब्जियों की शेल्फ लाइफ तीन गुना तक बढ़ा देते हैं और प्लास्टिक पर निर्भरता कम करते हैं.
बायोटेक स्टार्टअप PeelOn ने उठाई ₹8.3 करोड़ की Funding, बनाया है गजब का प्रोडक्ट, प्लास्टिक से दिला रहा निजात!

PeelOn ने साल 2020 में अपनी शुरुआत की थी और इसके फाउंडर्स हैं तारका रामजी मोटुरु और वेंकट रवि शंकर उम्मिडी. कंपनी का मिशन है कि फलों और सब्जियों की शेल्फ लाइफ को बढ़ाकर किसान, रिटेलर और एक्सपोर्टर्स को फायदा दिया जाए और साथ ही प्लास्टिक का इस्तेमाल भी कम किया जाए.

PeelOn पौधों पर आधारित बायोडिग्रेडेबल और कंपोस्टेबल फिल्म्स बनाता है. ये फिल्म्स फलों और सब्जियों को 3 गुना तक ज्यादा समय तक ताजा रख सकती हैं. इनमें प्राकृतिक तत्व मिलाए जाते हैं, जो पकने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं, ताजगी बनाए रखते हैं और बैक्टीरिया या फंगल इंफेक्शन से बचाते हैं.

कंपनी के दो फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स हैं:

PeelOn-Fresh: बड़े पैमाने पर फलों और सब्जियों की शिपमेंट के लिए लाइनर्स.

PeelOn-Retail+: रिटेल पैकेजिंग बैग्स, जिनमें एंटीमाइक्रोबियल एजेंट्स और इथिलीन स्कैवेंजर्स होते हैं.

कहां से आता है बिजनेस?

PeelOn का बिजनेस मॉडल पूरी तरह B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) है. यह किसानों, एक्सपोर्टर्स और रिटेलर्स के साथ काम करता है. भारत में PeelOn की टेक्नोलॉजी धनिया, ब्रोकोली, हरी पत्तेदार सब्जियां, रामबूटन और केले में इस्तेमाल हो रही है.

R&D और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

नए फंड से PeelOn अपने R&D और प्रोडक्शन फैसिलिटी को विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में विस्तार देगा. साथ ही अमेरिका और भारत में सेल्स और रेगुलेटरी टीम्स को भी मजबूत करेगा. कंपनी एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बना रही है, जिसकी क्षमता होगी 30 टन प्रति माह. इसके अलावा, PeelOn ग्लोबल सर्टिफिकेशन और रेगुलेटरी फाइलिंग पर भी काम कर रहा है, ताकि यह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से एंट्री कर सके.

ग्लोबल मार्केट और प्लास्टिक से जंग

PeelOn के को-फाउंडर मोटुरु के मुताबिक, सिर्फ अमेरिका-मैक्सिको कॉरिडोर में ही फ्रेश प्रोड्यूस का बाजार 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा का है. भारत में भी घरेलू और एक्सपोर्ट दोनों मार्केट लगातार बढ़ रहे हैं.

कंपनी का टारगेट है कि अगले साल तक इसका एनुअल रन रेट 1 मिलियन डॉलर तक पहुंच जाए. PeelOn दूध की पैकेजिंग और ब्लॉकचेन-आधारित ट्रैसेबिलिटी जैसे नए प्रयोग भी कर रहा है, ताकि कार्बन फुटप्रिंट और शेल्फ लाइफ को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके.

निवेशकों का क्या कहना है?

GrowX Ventures के जनरल पार्टनर मनीष गुप्ता ने कहा कि "PeelOn एक बड़ी और अनदेखी चुनौती को हल कर रहा है- प्लास्टिक वेस्ट और फलों-सब्जियों के खराब होने की समस्या. हमें इसमें सिर्फ नई टेक्नोलॉजी नहीं दिख रही, बल्कि भारत और अमेरिका दोनों जगहों से मजबूत कमर्शियल डिमांड भी दिख रही है."

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