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भारत के लिए यह समय केवल तकनीक को अपनाने का नहीं है, बल्कि दुनिया के सामने अपनी 'एआई शक्ति' (AI Power) का प्रदर्शन करने का है.
भारत के लिए यह समय केवल तकनीक को अपनाने का नहीं है, बल्कि दुनिया के सामने अपनी 'एआई शक्ति' (AI Power) का प्रदर्शन करने का है. इसी साल फरवरी में भारत ने अपने पहले 'एआई इम्पैक्ट समिट' (AI Impact Summit) की मेजबानी की, जिसने दुनिया को यह साफ़ संदेश दे दिया कि भारत अब एआई की चर्चा का हिस्सा मात्र नहीं रहेगा, बल्कि इस विमर्श का नेतृत्व करेगा.
अब एआई-नेटिव वेंचर कैपिटल फर्म 'SenseAI' की एक नई रिपोर्ट ने इस बढ़ते कदम पर मुहर लगा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में वैश्विक एआई निवेश 800 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें वेंचर कैपिटल फंडिंग लगभग दोगुनी होकर 226 अरब डॉलर हो गई है. इस पूरी वैश्विक हलचल के बीच, भारत अब एआई एप्लिकेशन्स के एक बड़े केंद्र (Hub) के रूप में उभर रहा है, जहां तकनीक को न केवल बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है, बल्कि उसे स्थानीय जरूरतों के हिसाब से ढालकर नई पीढ़ी की कंपनियां खड़ी की जा रही हैं.
दुनिया अब तक भारत को तकनीक के क्षेत्र में एक 'फॉलोअर' (पीछे चलने वाला) मानती थी, लेकिन यह रिपोर्ट इस पुरानी सोच को चुनौती देती है. भारत अब एआई की 'एप्लिकेशन लेयर' (Application Layer) का मुख्य चालक बनकर उभर रहा है. एप्लिकेशन लेयर वह बिंदु है जहां तकनीक का असली व्यावसायिक मूल्य (Commercial Value) पैदा होता है.
सेंस एआई के मैनेजिंग पार्टनर राहुल अगरवाला ने इस बदलाव को एक बेहतरीन उदाहरण से समझाया. उन्होंने कहा, "एआई कोई एक चीज नहीं है, यह सिर्फ चैटजीपीटी (ChatGPT) नहीं है. उदाहरण के लिए, बिजली को लें- बहुत सारे प्लांट बिजली पैदा करते हैं, लेकिन 'एप्लिकेशन' वह बिजली का उपकरण है, जिसे आप घर पर इस्तेमाल करते हैं, जैसे टोस्टर. यही वह जगह है जहां एआई आपके और मेरे लिए वास्तव में उपयोगी बनता है."
आंकड़े बताते हैं कि भारत का एआई इकोसिस्टम अब पूरी तरह से 'एप्लिकेशन ओरिएंटेड' हो गया है. आज 75% भारतीय एआई स्टार्टअप्स 'एप्लिकेशन लेयर' पर काम कर रहे हैं और लगभग 80% फंडिंग इसी क्षेत्र में आ रही है. सबसे खास बात यह है कि ये स्टार्टअप्स अपने शुरुआती दौर में ही राजस्व (Revenue) जुटाने की स्थिति में पहुंच रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नई इंडस्ट्री के जन्म के समय हमने इतना बड़ा निवेश पहले कभी नहीं देखा. भारत की ताकत 'सर्विसेज' (Services) में रही है, लेकिन अब समय 'इनोवेशन' (Innovation) का है. भारतीय एआई अनुसंधान संगठन की सलाहकार और 'Forj' की संस्थापक जूही भटनागर का मानना है कि पिछले दशक में चीन ने मैन्युफैक्चरिंग में जीत हासिल की, सिंगापुर ने फैसलों की रफ्तार में और अमेरिका ने इनोवेशन में. लेकिन एआई क्रांति ने यह साफ कर दिया है कि अगर आप इनोवेटिव नहीं हैं, तो आप वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगे. भारत को अब पेपर से पेटेंट और पेटेंट से प्रोडक्ट तक का सफर तय करना होगा.
एआई एप्लिकेशन्स अब पूरे इकोसिस्टम का लगभग 75% हिस्सा हैं, जिसमें 'एंटरप्राइज सास' (Enterprise SaaS) सबसे बड़ी कैटेगरी बनकर उभरी है. इस सेगमेंट की हिस्सेदारी साल 2024 में 14.1% थी, जो 2025 में बढ़कर 25.5% हो गई है. यह दिखाता है कि कॉर्पोरेट जगत में एआई को कितनी तेजी से काम का हिस्सा बनाया जा रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, 60% स्टार्टअप्स अपने शुरुआती चरण में ही 'पोस्ट-रेवेन्यू' (कमाई शुरू करने वाले) हो चुके हैं. इसका मुख्य कारण एआई-नेटिव एप्लिकेशन्स का तेजी से अपनाया जाना और उनके मुद्रीकरण (Monetisation) के छोटे चक्र हैं. इतना ही नहीं, एंटरप्राइज एआई कॉन्ट्रैक्ट का आकार भी पिछले दो सालों में $39,000 से बढ़कर $530,000 हो गया है, जो एआई पर कंपनियों के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है.
एआई अब सिर्फ़ प्रयोग (Experiment) की चीज़ नहीं रह गई है, बल्कि यह क्रियान्वयन (Execution) के दौर में पहुंच चुकी है. एमओवीआईएन इंडिया (MOVIN India) के टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी हेड अचिन शर्मा के अनुसार, हमें एआई को अलग-अलग आयामों से देखना होगा.
एक 'पारंपरिक एआई' (Traditional AI) था, जो कुछ खास उद्योगों तक सीमित था. लेकिन अब हम 'एजेंटिक एआई' (Agentic AI) के दौर में हैं, जहां स्वायत्त निर्णय लेने (Autonomous Decision-making) की क्षमता आ गई है. अचिन का कहना है कि एआई फिलहाल बिजनेस की समस्याओं को टुकड़ों में हल कर रहा है, लेकिन आने वाले समय में इसे पूरे वर्कफ्लो (Workflow) और बड़े परिदृश्य के साथ जोड़कर देखना होगा, तभी इसका असली फायदा मिल पाएगा.
जैसे-जैसे एआई का विस्तार हो रहा है, जवाबदेही और रेगुलेशन का सवाल भी बड़ा होता जा रहा है. भारत दुनिया में एआई (जैसे GPT) के सबसे बड़े यूजर बेस में से एक है. हर दिन लाखों भारतीय एआई के साथ इंटरैक्ट करते हैं, जिससे भारी मात्रा में डेटा पैदा होता है.
राहुल अगरवाला ने इस मुद्दे पर 'डिजिटल संप्रभुता' (Digital Sovereignty) की बात की. उन्होंने कहा कि अगर एक अरब से ज्यादा भारतीय विदेशी एआई प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उनका डेटा देश से बाहर जा रहा है. क्या इस डेटा को देश में ही नहीं रहना चाहिए? क्या हमारी सरकार और कंपनियों को इस डेटा से सीखने का फायदा नहीं मिलना चाहिए? इन सवालों के जवाब 'हां' में हैं और यहीं रेगुलेशन की जरूरत महसूस होती है.
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अचिन शर्मा ने इस चर्चा में भारत के डेटा कानून 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट' (DPDP Act) के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर कोई सर्विस फ्री है, तो आप खुद एक प्रोडक्ट हैं. भारत से डेटा एक्सपोर्ट हो रहा है और इस पर लगाम लगाना जरूरी है.
जूही भटनागर ने एक और गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान दिलाया. भारत डेटा और इनसाइट्स तो दे रहा है, लेकिन उस डेटा से पैदा होने वाला राजस्व (Revenue) और टैक्स का फायदा विदेशों (मुख्यतः अमेरिका) में जा रहा है. इसका मतलब है कि भारत इनपुट दे रहा है, लेकिन वैल्यू का फायदा कहीं और हो रहा है.
भारत का एआई इकोसिस्टम अब अपनाने (Adoption) के चरण से निकलकर स्वामित्व (Ownership) की ओर बढ़ रहा है. अब फोकस इस बात पर है कि डेटा, इनोवेशन और आर्थिक मूल्य भारत के पास ही रहे. भारत इस अगले चरण को कैसे संभालता है, यह न केवल भारत की स्थिति को वैश्विक एआई लीडर के रूप में मजबूत करेगा, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं और 'ग्लोबल साउथ' (Global South) के लिए भी एक मिसाल पेश करेगा.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 एआई एप्लिकेशन लेयर क्या होती है?
यह वह स्तर है जहां एआई तकनीक का वास्तविक उपयोग होता है.
Q2 भारत के कितने स्टार्टअप्स एआई एप्लिकेशन पर काम कर रहे हैं?
लगभग 75% स्टार्टअप्स इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं.
Q3 एंटरप्राइज SaaS क्या है?
यह कंपनियों के लिए सॉफ्टवेयर सेवाएं प्रदान करने का मॉडल है.
Q4 एजेंटिक एआई क्या है?
यह ऐसा एआई है जो खुद निर्णय लेने में सक्षम होता है.
Q5 DPDP Act क्या है?
यह भारत का डेटा सुरक्षा कानून है.