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(फोटो सोर्स: Experion Developers)
Real Estate: ज़ी न्यूज़ की खबर का बड़ा असर हुआ है. रियल एस्टेट सेक्टर की नामी कंपनियों Experion Developers और Experion Capital पर धोखाधड़ी के आरोपों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 630 करोड़ रुपए से ज्यादा की जमीन से जुड़े मामले में आखिर FIR दर्ज कर ली है. आइए जानते हैं क्या थी ये धोखाधड़ी और कौन-कौन शामिल था इसमें.
ज़ी मीडिया के स्पेशल इनवेस्टिगेटिव टीम परिवेश वात्स्यायन के अनुसार, गुरुग्राम के सेक्टर 62 की यही वो बेशकीमती जमीन है…जिसके लिए Experion Developers पर आरोप है कि उसने सिस्टम की आंखों में धूल झोंका और 630 करोड़ रुपये की कीमत वाली जमीन को अपने नाम करने के लिए साजिशों का जाल बुना.
प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) की शिकायत पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW ने FIR दर्ज कर ली है. Experion Developers और Experion Capital के खिलाफ FIR दर्ज की गई है.
Experion बिल्डर की धांधली का खुलासा ZEE NEWS बहुत पहले ही कर चुका है, जिसकी वजह से पिछले कई महीनों से जांच चल रही थी. चलिए समझाते हैं कि आखिर कैसे जमीन को हथियाने के लिए एक गहरा चक्रव्यूह रचने का आरोप है.
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ED की जांच में सामने आया था कि Experion ग्रुप सीधे तौर पर कंपनी नहीं खरीद पा रहा था, इसलिए उन्होंने पहले सिस्टम को उलझाया. आरोप है कि जानबूझकर कोर्ट में याचिकाएं डाली गईं ताकि वक्त बर्बाद हो और पीछे से 'वोट' खरीदे जा सकें. ED के मुताबिक, Experion ग्रुप ने धांधली के लिए अपनी ही दूसरी कंपनी Experion Capital (ECPL) के जरिए खेल किया.
जांच के मुताबिक, Experion Capital ने 160 करोड़ रुपये देकर स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक का कर्ज खरीदा और 50 फीसदी वोटिंग राइट्स हासिल कर लिए. Standard Chartered बैंक का कर्ज 494 करोड़ से ज्यादा का था, लेकिन उसने सिर्फ 160 करोड़ में यानी 70 फीसदी के नुकसान पर कर्ज बेच दिया था.
इसी तरह ब्लैकस्टोन समूह से जुड़ा करीब 58 करोड़ के कर्ज को करीब-करीब आधी कीमत यानी 25 करोड़ में Experion ग्रुप को बेच दिया गया. इन 25 रुपये से ब्लैकस्टोन कंपनी का 10 फीसदी और वोटिंग राइट्स हासिल कर लिया.
आसान भाषा में कहें तो आरोप है कि Experion ने यह कर्ज इसलिए खरीदा ताकि वो कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स यानी CoC पर कब्जा कर सके, क्योंकि कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स ही तय करती है कि दिवालिया कंपनी किसे बेची जाएगी.
दरअसल प्लान ये था कि मैं ही खरीदार हूं, और मैं ही फैसला करूंगा कि किसे बेचना है. दिवालिया कानून के तहत ऐसा करना कानूनी रूप से गलत हैं.
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Alchemist ARC जिसके पास वोटिंग का 35% अधिकार था. उस कंपनी के प्रतिनिधि ने ED के सामने बयान दिया था कि उन पर दबाव डाला गया, ताकि वो Experion Capital के पक्ष में वोट डाले.
Alchemist ARC के प्रमोटर हैं आलोक धीर. आलोक धीर पेशे से कॉरपोरेट वकील हैं और इसी का फायदा उठाकर वो फंसे हुए लोन को अपनी ही कंपनियों के जरिए खरीदने लगा.
ऐसे ही एक हेराफेरी के केस में आलोक धीर और उनकी कंपनी फंस चुकी है और अब Experion ग्रुप केस में भी आलोक धीर और उनकी कंपनी Alchemist ARC की भूमिका संदिग्ध है.
ऐसी ही धांधली के जरिए Experion Capital ने 95% वोटिंग पावर हासिल की और अपनी ही दूसरी कंपनी Experion Developers के रेज़ोल्यूशन प्लान को पास कर दिया और जांच में सामने आया था कि ऐसा करने के लिए उसने साम और दाम का सहारा लिया.
इस घोटाले में एक और खेल खेला गया. गुरुग्राम के सेक्टर 63 की जिस 9.32 एकड़ जमीन के लिए ये पूरी बिसात बिछाई गई, वो जमीन ED पहले ही जब्त कर चुकी थी. वो जमीन Religare Finvest घोटाले के पैसों से थी. ED का कहना है कि Experion ग्रुप ने ट्रिब्यूनल से यह बात छिपाई.
Experion ग्रुप पर दिवालिया प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर सस्ती कीमत पर जमीन हासिल करने की कोशिश करने का आरोप है, जिसकी जांच अब दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के पास है. परत दर परत खोलेगी और इस धांधली में शामिल कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट तय करेगी. इसके बाद कोर्ट में शामिल दोषियों को सजा सुनाएगी.
Q1. पूरा मामला क्या है?
गुरुग्राम की करीब ₹630 करोड़ कीमत वाली जमीन को सस्ते में हासिल करने के लिए कथित साजिश रची गई.
Q2. किन कंपनियों पर आरोप लगे हैं?
Experion Developers और Experion Capital पर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं.
Q3. FIR किसने दर्ज की है?
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने FIR दर्ज की है, ED की शिकायत के आधार पर.
Q4. धोखाधड़ी का तरीका क्या था?
आरोप है कि कर्ज सस्ते में खरीदकर CoC पर कब्जा किया गया, ताकि कंपनी और जमीन अपने पक्ष में ली जा सके.
Q5. Dignity Buildcon का क्या रोल है?
यह कंपनी जमीन खरीदने के लिए ₹992 करोड़ से ज्यादा का कर्ज लेकर फंसी हुई थी.
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