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मिडिल क्लास जिंदगी भर की कमाई एक फ्लैट या घर खरीदने में लगा देते हैं, केवल एक उम्मीद है कि उन्हें अच्छी क्विलाटी का घर मिलेगा. लेकिन, हाल के दिनों में यदि बिल्डर बढ़ती महंगाई के कारण लागत में बढ़तोरी से घर की क्वालिटी से ही गुपचुप तौर पर समझौता किया जा रहा है. हाल ही में ब्रोकरेज फर्म HDFC सिक्युरिटीज की ताजा रियल एस्टेट रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री एक नई चुनौती से जूझ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक प्रोजेक्ट के लिए अप्रूवल लेना जहां आसान हो गया है लेकिन, इनपुट कॉस्ट (स्टील, सीमेंट,लेबर) की आसमान छूती कीमतें हैं.
HDFC सिक्युरिटीज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक प्रोजेक्ट की बढ़ती हुई लागतर सीधे तौर पर बिल्डर के मार्जिन पर दबाव डाल रही है. ब्रोकरेज के मुताबिक इस दबाव से निपटने के लिए डेवलपर्स दो अहम तरीका अपना रहे हैं:
रणनीतिक खरीद: इसमें बिल्डर सस्ते सप्लायर ढूंढने या फिर थोक में माल खरीदते हैं.
वैल्यू इंजीनियरिंग: वैल्यू इंजीनियरिंग किसी प्रोजेक्ट की लागत को कम करने का एक संगठति तरीका है, बिना उसकी अहम कार्यक्षमता को प्रभावित करें. हालांकि यहीं से घर खरीदारों के लिए खतरे की घंटी बजती है.
रियल एस्टेट में वैल्यू इंजीनियरिंग का मतलब है कि बिल्डर उन चीजों को बदल सकता है जो महंगी हैं और उनकी जगह सस्ते विकल्पों का इस्तेमाल कर सकता है, जो देखने में या काम करने में वैसे ही लगें. यह इस तरीके से होते हैं-
मटेरियल बदलना: बाथरूम में महंगी, हाई ग्रेड पीवी पाइप की जगह सस्ती, लो ग्रेड पाइप का इस्तेमाल करना. दोनों का काम पानी पहुंचाना है, लेकिन सस्ती पाइप शायद जल्दी लोक हो जाए या टूट जाए.
ब्रांड में कटौती: महंगी ब्रांडेड टाइल्स की जगह वैसी ही दिखने वाली सस्ती नॉन ब्रैंडेड टाइल्स का इस्तेमाल करना.
डिजाइन में बदलाव: बिल्डिंग के डिजाइन में मामूली बदलाव करना ताकि कम स्टील या फिर कंक्रीट का इस्तेमाल हो.
'वैल्यू इंजीनियरिंग' के कुछ उदाहरण
| महंगा विकल्प | सस्ता विकल्प | खरीदार के लिए जोखिम |
| महंगी, हाई-ग्रेड पीवीसी पाइप | सस्ती, लो-ग्रेड पाइप | जल्दी लीकेज (लीक) या टूटने का खतरा। |
| महंगी ब्रांडेड टाइल्स | वैसी ही दिखने वाली सस्ती नॉन-ब्रांडेड टाइल्स | कम टिकाऊपन, कमजोर फिनिशिंग। |
| ज्यादा स्टील/कंक्रीट वाला डिजाइन | डिजाइन में मामूली बदलाव (कम स्टील/कंक्रीट) | भविष्य में दरारें या जल्दी मेंटेनेंस की समस्या। |
बिल्डर्स भले ही तर्क देते हैं कि वैल्यू इंजीनियरिंग से कीमत नियंत्रण में रहती है. लेकिन घर खरीदारों के लिए यह चिंता का कारण है. यदि वैल्यू इंजीनियरिंग के नाम पर जरूरी क्वालिटी से समझौता किया गया, तो खरीदारों के लिए यह चिंता का कारण है. यदि इंजीनियरिंग के नाम पर जरूरी क्वालिटी से समझौता किया गया, तो खरीदारों को भविष्य में लीकेज, कमजोर फिनिशिंग, दरारे या जल्दी मेंटेनेंस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है
रिपोर्ट के मुताबिक मार्केट में घरों की डिमांड मजबूत बनी हुई है, खासकर मिड-इनकम और प्रीमियम सेगमेंट में. बेंगलुरु, MMR, पुणे जैसे शहरों में मांग काफी तेज है. चूंकि डिमांड ज्यादा है, इसलिए खरीदार अक्सर बिल्डर द्वारा इस्तेमाल किए गए मटेरियल की बहुत गहरी जांच-पड़ताल नहीं कर पाते हैं. ऐसे में, यदि आप नया घर बुक करने जा रहे हैं, तो केवल चमकदार ब्रोशर और सैंपल फ्लैट पर न जाए. बिल्डर से इस्तेमाल जा रहे मटेरियल, ब्रांड और वारंटी से जुड़ी सवाल की साफ जानकारी मांगे.
सवाल: HDFC सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक बिल्डरों की मुख्य चिंता क्या है?
जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, अब अप्रूवल मिलना आसान हो गया है, लेकिन बिल्डरों की मुख्य चिंता कच्चे माल (इनपुट कॉस्ट) की बढ़ती कीमतें हैं.
सवाल:'वैल्यू इंजीनियरिंग' क्या है?
जवाब: यह लागत घटाने का एक तरीका है जिसमें महंगे मटेरियल की जगह सस्ते विकल्प इस्तेमाल किए जाते हैं, जो काम तो वही करते हैं लेकिन उनकी क्वालिटी या टिकाऊपन कम हो सकता है.
सवाल: क्या 'वैल्यू इंजीनियरिंग' हमेशा खराब होती है?
जवाब: नहीं. अगर इसे सही तरीके सेलागू किया जाए, तो यह कीमत कम कर सकती है. लेकिन अगर इसे बिल्डिंग के ढांचे, प्लंबिंग या इलेक्ट्रिकल में इस्तेमाल किया जाए, तो यह खतरनाक हो सकता है.
सवाल: बिल्डर यह सब क्यों कर रहे हैं?
जवाब: कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण उनके मुनाफे (मार्जिन) पर दबाव पड़ रहा है.
सवाल: किन सेगमेंट में घरों की मांग सबसे ज्यादा है?
जवाब: रिपोर्ट बताती है कि मिड-इनकम और प्रीमियम सेगमेंट में घरों की मांग में काफी तेजी देखी गई है.