पहाड़ में घर? अब भूल जाओ! इस राज्य में लागू हुआ नया भू कानून, एक गलती और सरकार कर लेगी जमीन जब्त!

Uttarakhand Bhu Kanoon: उत्तराखंड सरकार ने राज्य में नया भू कानून लागू कर दिया है. इसके बाद इस पहाड़ी राज्य में दूसरे राज्य के लोगों का जमीन खरीदना मुश्किल हो जाएगा. जानिए क्या है नियम.
पहाड़ में घर? अब भूल जाओ! इस राज्य में लागू हुआ नया भू कानून, एक गलती और सरकार कर लेगी जमीन जब्त!

Uttarakhand Bhu Kanoon: हरिद्वार और उधमसहरिद्वार और उधमसपहाड़ी राज्य उत्तराखंड में नया भू कानून लागू हो गया है. सीएम पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने नए भू कानून का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस कानून के बाद प्रदेश में हरिद्वार और उधम सिंह नगर को छोड़कर 11 जिलों में बाहर के लोग कृषि और उद्यान की जमीन नहीं खरीद सकेंगे. इसके अलावा दूसरे प्रदेश के लोग या परिवार नगर निकाय की सीमा से बाहर भी केवल 250 वर्ग मीटर तक ही जमीन खरीद सकेंगे. ऐसे में ये फैसला उन लोगों के लिए करारा झटका है, जो पहाड़ में घर बनाने का सपना देख रहे हैं.

इन गलतियों से जब्त होगी जमीन

नए भू कानून के मुताबिक यदि बाहरी प्रदेश के लोगों को यदि उत्तराखंड में 250 वर्ग मीटर तक की जमीन खरीदनी है तो इसके लिए बकायदा कानूनी एफिडेविट देना होग. साथ ही इस मामले में पहले से ही तय की प्रक्रिया से गुजरना होगा. इन सब के बावजूद यदि जमीन खरीदने के बाद उसका सही इस्तेमाल नहीं किया गया, तो जमीन को सीधा जब्त कर लिया जाएगा. भू कानून को सख्ती से लागू करने के लिए भी रेवेन्यू डिपार्टमेंट द्वारा पोर्टल जारी किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है.

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पोर्टल में दर्ज करनी होगी ये डीटेल्स

भू कानून पोर्टल में बाहरी राज्यों के लोगों द्वारा जमीन की खरीद-फरोख्त का ब्योरा नियमित तौर पर दर्ज किया जाएगी. नए के साथ-साथ जमीन खरीद के पुराने सौदों के भी ब्योरे दर्ज होंगे. वहीं, सभी जिलों को भी जमीन खरीद के सारी डीटेल्स इस पोर्टल में दर्ज करनी होगी. आपको बता दें कि भू कानून में हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिले को छूट दी गई है. हालांकि, इन जिलों में भी जमीन खरीदने के लिए राज्य स्तर पर अनुमति लेना जरूरी होगा.

30 साल की लीज में ले सकते हैं जमीन

भू कानून में निवेश को बढ़ाने पर भी फोकस किया गया है. स्वास्थ्य, शिक्षा, हाई एजुकेशन, होटल, उद्योग सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रावधान है. कृषि, बागवानी, जड़ी बूटी के प्रोडक्शन, बेमौसम सब्जियां, मसालों के उत्पादन, पशुपालन, दूध उत्पादन, मुर्गी पालन, मछली पालन, फूड प्रोसेसिंग आदि के लिए जमीन 30 साल की लीज में दी जा सकती है. साथ ही राज्य में जिन लोगों के पास साल 2003 से पहले जमीन होने की स्थिति में भू कानूनों के कड़े प्रावधान से राहत मिलेगी.

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