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उत्तर प्रदेश में अब घर या किसी भी तरह का निर्माण कराने वालों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है. सरकार ने नए उत्तर प्रदेश बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट बायलॉज 2025 में डीम्ड अप्रूवल का नियम लागू किया है. इसके तहत यदि कोई डेवलपमेंट अथॉरिटी किसी बिल्डिंग के नक्शे के आवेदन पर 30 दिन यानी एक महीने के भीतर कोई फैसला नहीं लेता है, तो कुछ शर्तों के साथ नक्शे को अपने आप पास मान लिया जाएगा. इस नियम का मुख्य उद्देश्य निर्माण अनुमति प्रक्रिया में होने वाली देरी को खत्म करना और अधिकारियों को जवाबदेही तय करना है.
नए नियमों के मुताबिक, ग्रुप हाउशिंग, कमर्शियल और दूसरे भवनों के नक्शे, जो एक लाइसेंस प्राप्त तकनीकी व्यक्ति (आर्किटेक्ट/इंजीनियर) द्वारा तैयार किए गए है, यदि 30 दिनों के अंदर अप्रूव नहीं किए जाते तो अपने आप स्वीकृत माने जाएंगे.
इन नियमों का करना होगा नियम
बिल्डिंग परमिट के लिए कई डिपार्टमेंट से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की जरूरत होती है, जिसमें अक्सर देरी होती थी. नए नियमों में इसके लिए भी प्रावधान किया गया है.
30 दिन के अंदर लेना होगा निर्णय
| प्रक्रिया (Process) | समय-सीमा (Timeline) | परिणाम (Result) |
| नक्शा आवेदन | दिन 1 | आवेदन जमा हुआ |
| प्राधिकरण द्वारा फैसला | 30 दिन के अंदर | या तो पास, या आपत्ति के साथ वापस |
| 30 दिन के बाद (यदि कोई फैसला नहीं) | - | शर्तों के साथ स्वतः स्वीकृत (Deemed Approved) |
उत्तर प्रदेश बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट बायलॉज 2025 के नए नियमो में छोटे भूखंड मालिकों को और भी ज्यादा राहत दी गई है. प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित लेआउट में 500 वर्ग मीटर तक के आवासीय (सिंगल यूनिट) और 200 वर्ग मीटर तक के कमर्शियल प्लॉट के नक्श, यदि लाइसेंस प्राप्त तकनीकी व्यक्ति द्वारा नियमों के मुताबिक प्रमाणित हैं, तो उन्हें तत्काल ऑनलाइन मंजूरी मिल जाएगी. इसके अलावा छोटे प्लॉट मालिकों को निर्माण शुरू करने के लिए मंजूरी की जरूरत नहीं है. केवल ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर 1 रुपए का सांकेतिक शुल्क जमा करना होगा और क स्व-प्रमाणित घोषणा पत्र देना होगा.
सवाल: 'डीम्ड अप्रूवल' नियम क्या है?
जवाब: यह एक नया नियम है जिसके तहत यदि विकास प्राधिकरण आपके बिल्डिंग नक्शे के आवेदन पर 30 दिनों में कोई फैसला नहीं देता है, तो इसे कुछ शर्तों के साथ अपने आप पास मान लिया जाएगा.
सवाल: क्या यह नियम सभी तरह के प्लॉट पर लागू होगा?
जवाब: नहीं, यह प्रावधान मुख्य रूप से उन भूखंडों पर लागू होता है जो विकास प्राधिकरण के किसी अनुमोदित लेआउट का हिस्सा हैं.
सवाल: यदि 'डीम्ड अप्रूव्ड' नक्शे में कोई गलती पाई जाती है तो कौन जिम्मेदार होगा?
जवाब: यदि नक्शे में मास्टर प्लान या बिल्डिंग बायलॉज का कोई उल्लंघन होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी भूखंड के मालिक और नक्शा प्रमाणित करने वाले लाइसेंस प्राप्त तकनीकी व्यक्ति (आर्किटेक्ट/इंजीनियर) की होगी.
सवाल: क्या 'डीम्ड अप्रूवल' के बाद भी परमिट रद्द हो सकता है?
जवाब: हां, यदि यह पाया जाता है कि मंजूरी गलत तथ्यों या बयानों के आधार पर प्राप्त की गई है, तो प्राधिकरण 30 दिनों के भीतर परमिट को रद्द कर सकता है.
सवाल: NOC मिलने में देरी होने पर क्या होगा?
जवाब: नए नियमों के तहत, यदि कोई विभाग निर्धारित समय में NOC जारी नहीं करता है, तो उसे 'डीम्ड NOC' यानी स्वतः जारी मान लिया जाएगा और देरी के लिए संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय होगी .