&format=webp&quality=medium)
UP Rera Builders Recovery: उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP Rera) ने डिफॉल्टर बिल्डरों पर अपना शिकंजा कसा है. साथ ही घर खरीदारों को एक बड़ी राहत दी है. यूपी रेरे ने एक सख्त योजना के तहत, अब तक 5700 रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) के बदले बिल्डर्स से 1410 करोड़ रुपए की वसूली सुनिश्चित की है. यूपी रेरा की इस योजना से हजारों घर खरीदारों में उम्मीद जगी है, जिनकी मेहनत की कमाई लंबे वक्त से अटके हुए प्रोजेक्ट्स में फंसी हुई है. यूपी रेरा की वसूली की रफ्तार अगस्त 2023 से कई गुना ज्यादा बढ़ गई है.
यूपी रेरा की कुल 1410 करोड़ रुपए की वसूली में से लगभग 61 फीसदी हिस्सा, यानी 861 करोड़ रुपए, अगस्त 2023 से लेकर 15 जुलाई 2025 के बीच ही वसूला गया है. वहीं, 1 जनवरी 2025 से लेकर 15 जुलाई 2025 के बीच ही 955 मामलों में 251 करोड़ रुपए की वसूली की गई है. यह पिछले साल की इसी अवधि में हुई 244 करोड़ रुपए की वसूली से भी ज्यादा है. आपको बता दें कि वसूली में इस तेजी का कारण यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी द्वारा अपनाई गई कुछ सख्त रणनीतियां हैं.
यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी जिलाधिकारियों के साथ हर महीने रिव्यू मीटिंग ले रहे हैं. साथ ही डिफॉल्टर प्रमोटर्स पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है. रेरा ने ये भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी बिल्ड को नए प्रोजेक्ट के रजिस्ट्रेशन या मौजूदा प्रोजेक्ट के विस्तार की मंजूरी तब तक नहीं दी जाएगी, जब तक वह पुराने घर खरीदारों के दावों का संतोषजनक निपटारा नहीं कर देता है. इन नए नियमों ने बिल्डरों पर नकेल कसी है.
यूपी रेरा ने केवल वसूली ही नहीं की है आपसी समझौते को भी बढ़ावा दिया है. प्रमोटर्स और आवंटियों के बीच आपसी बातचीत के जरिए लगभग 1650 रिकवरी सर्टिफिकेट्स के बदले 500 करोड़ रुपए की देनदारी का निपटारा हुआ है. इसके अलावा सुलह मंचों और दूसरी कार्यवाहियों के जरिए 8500 और मामलों को सुलझाया गया है. इसकी अनुमानित मूल्य 3320 करोड़ रुपए है. कुल मिलाकर अब तक 15850 शिकायतकर्ता घर खरीदारों के 5180 करोड़ रुपए का निपटारा हो चुका है.