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उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी-रेरा) ने एक बार फिर रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. गृह खरीदारों से मिली शिकायतों की सुनवाई करते हुए अथॉरिटी की बेंच ने महागुन, माहालक्ष्मी, गौड़संस सहित कई प्रमुख बिल्डरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं. यह कार्रवाई न केवल कानून के उल्लंघन को रोकने के लिए है, बल्कि उन आम लोगों के भरोसे को कायम रखने के लिए भी है जो वर्षों से घर खरीदने की प्रक्रिया में ईमानदारी और पारदर्शिता की उम्मीद कर रहे हैं.
सुनवाई के दौरान पाया गया कि कई बिल्डरों ने यूपी-रेरा अधिनियम की धारा 13 का उल्लंघन करते हुए बिना निर्धारित प्रारूप में करार किए खरीदारों से अग्रिम राशि ली.
प्रमोटर के खिलाफ भी हुई कार्रवाई
महागुन ग्रुप से जुड़ी 16 शिकायतों की सुनवाई
महालक्ष्मी ग्रुप के खिलाफ 9 शिकायतों में पाया गया कि कंपनी ने खरीदारों को दिए गए अलॉटमेंट लेटर सरकार द्वारा निर्धारित प्रारूप में जारी नहीं किए.इसे धारा 13 का सीधा उल्लंघन मानते हुए मामलों को धारा 61 के तहत दंडात्मक कार्रवाई के लिए भेजा गया.
पंचशील बिल्डटेक, एस.जेपी के खिलाफ भी एक्शन
गौड़संस हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. पर चार मामलों में इसी तरह के आचरण के लिए 25,000 प्रति केस (कुल 1 लाख) का जुर्माना लगाया गया. यूपी-रेरा की इस सख्त कार्रवाई से संदेश साफ है कि अब बिल्डरों की मनमानी नहीं चलेगी. कब्जा देने में देरी, गलत जानकारी या अधूरे दस्तावेज देने जैसी समस्याओं पर अब रेरा चुप बैठने वाला नहीं है. यह फैसला हजारों गृह खरीदारों के लिए राहत लेकर आया है और रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही की एक नई मिसाल कायम की है.
IANS इनपुट के साथ