रेंट एग्रीमेंट बनाना हुआ बेहद सस्ता, 10 साल तक स्टांप ड्यूटी पर मिलेगी बंपर छूट, जानें जेब पर कितना होगा असर

प्रदेश सरकार ने राज्य में किरायेदारी को सरल और ट्रांसपेरेंट बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब रेंटल डीड पर स्टांप फीस और रजिस्ट्रेशन फीस से छूट को मंजूरी दे दी है.
रेंट एग्रीमेंट बनाना हुआ बेहद सस्ता, 10 साल तक स्टांप ड्यूटी पर मिलेगी बंपर छूट, जानें जेब पर कितना होगा असर

प्रदेश सरकार ने राज्य में किरायेदारी को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए भी बड़ा फैसला लिया है. कैबिनेट ने 10 वर्ष तक की अवधि के किरायानामा विलेखों पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट मंजूर कर दी है. इसका उद्देश्य यह है कि भवन स्वामी और किरायेदार दोनों किरायानामा लिखित रूप में तैयार करें और रजिस्ट्री कराएं, जिससे विवाद कम हों और किरायेदारी विनियमन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके.

रेंटल डीड की रजिस्ट्री जरूरी

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वर्तमान नियमों के अनुसार एक वर्ष से अधिक अवधि की रेंटल डीड की रजिस्ट्री अनिवार्य है, लेकिन आमतौर पर अधिकांश किरायानामे मौखिक होते हैं या यदि लिखित होते भी हैं तो उनकी रजिस्ट्री नहीं कराई जाती.

रेंटल डीड की रजिस्ट्री जरूरी

  • अभी तक ऐसे मामलों का पता आमतौर पर जीएसटी विभाग और बिजली विभाग जैसी एजेंसियों की पत्रावलियों की जांच में चलता है और बाद में कमी स्टाम्प शुल्क की वसूली की कार्रवाई करनी पड़ती है.
  • यह भी अनिवार्य है कि रेंटल डीड की रजिस्ट्री हो या न हो, उस पर सही स्टाम्प शुल्क हर हाल में जमा होना चाहिए.

इस वजह से सरकार ने लिया फैसला

सरकार का मानना है कि यदि शुल्क अधिक होता है तो लोग डीड लिखने और रजिस्ट्री कराने से बचते हैं. इसी वजह से मानक किरायेदारी डीड को बढ़ावा देने और 10 वर्ष तक की अवधि के रेंट एग्रीमेंट को औपचारिक बनाने के लिए फीस में छूट देने की जरूरत महसूस की गई.

अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए

  • इस छूट प्रणाली के तहत रेंटल डीड पर अधिकतम स्टाम्प शुल्क और अधिकतम रजिस्ट्रेशन फीस अब निश्चित राशि से अधिक नहीं ली जाएगी.
  • साथ ही औसत वार्षिक किराया तय करते समय अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये रखी गई है। टोल संबंधी पट्टे और खनन पट्टों को छूट से बाहर रखा गया है ताकि रेवेन्यू हानि न हो.

निर्धारित अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रीकरण फीस

औसत वार्षिक किराया (रुपये में)01 वर्ष तक (फीस)1 से 5 वर्ष (फीस)5 से 10 वर्ष (फीस)
₹ 2,00,000 तक₹ 500₹ 1,500₹ 2,000
₹ 2,00,001 से ₹ 6,00,000₹ 1,500₹ 4,500₹ 7,500
₹ 6,00,001 से ₹ 10,00,000₹ 2,500₹ 6,000₹ 10,000

वार्षिक किराये में लागू होगी कीमत

स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार अधिकतम स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क की सीमा तय कर दी गई है. यह सीमा किरायेदारी की अवधि और औसत वार्षिक किराए के आधार पर लागू होगी. इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा क्योंकि अब किरायेदारी विलेख पर भारी स्टाम्प शुल्क भरने की बाध्यता नहीं रहेगी और लोग अधिक सहजता से रजिस्ट्री करा सकेंगे.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल: सरकार ने किरायेदारी को लेकर क्या बड़ा फैसला किया है?

जवाब: 10 साल तक के रेंट एग्रीमेंट पर स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी है.

सवाल: सरकार यह छूट क्यों दे रही है?

जवाब: मकान मालिक और किरायेदार लिखित एग्रीमेंट रजिस्टर कराएं, जिससे विवाद कम हों.

सवाल: अभी तक लोग रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर क्यों नहीं कराते थे?

जवाब: शुल्क (फीस) अधिक होने के कारण लोग रजिस्ट्री कराने से बचते थे.

सवाल: इस फैसले से आम जनता को क्या फायदा होगा?

जवाब: अब रेंट एग्रीमेंट पर भारी स्टाम्प शुल्क भरने की बाध्यता नहीं रहेगी.

सवाल: नई व्यवस्था में फीस कैसे तय होगी?

जवाब: अब स्टाम्प शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस की एक अधिकतम सीमा तय कर दी गई है.

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